गुरुवार, 28 जनवरी 2010
इस दुनिया में छोड़ जाओ प्यारे ऐसे अपने निशां
इस दुनियां में छोड़के जाओ ऐसे अपने निशां।
जिन पर चलके खुश हो दुनियां का हर इन्सां॥
प्यार की प्यारे फसल उगाओ चारों दिशाओं में
प्यार ही प्यार लहराये कुछ भी नजर आये ना।
देखो महापुरुषों के हैं जीवन त्याग से भरे हुए
मानवता की खातिर कर गये जीवन को कुर्बां।
वो जीवन क्या जीवन जिसे याद करे न कोई
जीवन वो जीवन जिसे याद करे सारा ये जहाँ।
एक दिन जाना होगा सबको छोड़ के ये दुनियां
जाना है तो ऐसे जाओ बन हर दिल के महमां।
बुधवार, 20 जनवरी 2010
हम तुम कितने पागल थे अब तक मुझको याद है
वो प्यार तेरा मस्ती भरा, अब तक मुझको याद है।
हाय वो तेरी प्यारी अदा, अब तक मुझको याद है॥
एक दूसरे के हुए थे पहली ही मुलाकात में हम
चाहत का वो हसीं लम्हा, अब तक मुझको याद है।
आँखों में मस्ती छायी थी और दिल भी धड़के थे
हाये वो दिल का धड़कना, अब तक मुझको याद है।
एक दूजे को देखे बिना हमें चैंन नहीं आता था
बेताबी का वो प्यारा नशा,अब तक मुझको याद है।
रविवार, 17 जनवरी 2010
लाखों में हँसीं जानम चेहरा यह तुम्हारा
लाखों में हँसीं जानम चेहरा यह तुम्हारा।
तभी तो दिल ने तुझको दिल में उतारा।
मौसम की तो तुम्हें दाद ही देनी चाहिए
प्यार से जिसने तुम्हारा रूप ये निखारा।
पहली ही नज़र में मैं तो होश गवां बैठा
पता ही नहीं चला दिल तुझपे कब हारा।
हर अदा तुम्हारी लुभाती है दिल को प्रिये
लगता यह अंदाज़ तेरा सबसे ही न्यारा।
ख्वाहिश है दिल की ये रहूँ तेरे आस पास
इस तरह तूने मुझे दिलो-दिमाग से मारा।
शनिवार, 9 जनवरी 2010
दूरी तेरी अब सही नहीं जाती
दूरी तेरी अब सही नहीं जाती।
बात दिल की कही नहीं जाती॥
समझ सको तो समझ जाओ न
देखो मुझे अब और तरसाओ न॥
जो भी देखता पागल कहता है
चाह में मुझे घायल समझता है।
जो भी समझे समझे ये जमाना
मुश्किल बड़ा बिन तेरे जी पाना।
किसी से लेता कोई भी सलाह
न सुनता न करता कोई परवाह।
दिल की बात को दबाये रहता हूँ
दिल ही जानता कैसे सहता हूँ।
न जाने तुम क्यों खफा हो गए
कहो प्रिये क्यों बेवफा हो गए।
मेरा कसूर बताओ कम से कम
कहीं निकल ना जाये मेरा दम।
बहुत हो चुका मान भी जाओ
हालत दिल की जान भी जाओ।
माफ़ करने वाले बहुत बड़े होते
माफ़ी देने से वो छोटे नहीं होते।
दूरी तेरी अब सही नहीं जाती।
बात दिल की कही नहीं जाती॥
समझ सको तो समझ जाओ न
देखो मुझे अब और तरसाओ न॥
शनिवार, 26 दिसंबर 2009
रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही
उन बिन काटे न कटी जागी मैं सारी रात
वो जो होते साथ तो बन जाती मेरी बात
हाय ! हाय! हाय!
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
सुलझे न सुलझी ये उलझन मेरी य उलझन मेरी
मार कर अपने मन को तरसती रही तरसती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
अकेले में जीना जीना है क्या-2
जीना नहीं यह जीना है सजा-2
कहते बने न यह मन की व्यथा
मन की व्यथा ही है मेरी कथा-2
मैं ही जानूँ मुझे कैसा लगा
तन-मन से ही धड़कती रही,बहकती रही
पिया मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ अब तुम्हें उस तरह -२
कोशिश में कमी कोई रखी नहीं
कोशिश तो की मैंने हर एक तरह-2
समझ से परे थी बेचैनी मेरी-2
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर को भी मैं सो न सकी -२
पगला गयी हूँ मैं उनके बिना
मारी गयी हो जैसे मेरी मती-2
हालत बेकाबू मेरी होती गयी
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
अब आये अब करती रही -२
दरवाजे को ही तकती रही- २
कुछ भी समझ में आया नहीं
बस खुद को ही छलती रही-2
धक धक दिल मेरा करता रहा
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
जैसा हुआ कभी वैसा न हो-२
तंग कोई मेरे जैसा न हो-२
अब क्या कहें क्या न कहें
संग किसी के ऐसा न हो-2
अगन की चुभन घुटन से भरी
मन ही मन में सिकुड़ती रही,उखड़ती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
बुधवार, 9 दिसंबर 2009
जय हो पाट बाबा की (जबलपुर वाले)
मन की खुशियाँ मिलें, पाट बाबा के दरबार में।
मन की कलियाँ खिलें, पाट बाबा के दरबार में।
सच्चे मन से जिसने जो माँगा
बाबा ने वो उसको दिया है
दुःख सारे ही लेकर उसके
सुख - सागर को दिया है
दुखिया सुखिया बनें, पाट बाबा के दरबार में।
भक्तों का हरदम ही यहाँ पर
खूब ताँता लगा रहता है
बड़ा ही दयालू है यह बाबा
हर कोई यह कहता है
आओ मिलके चलें, पाट बाबा के दरबार में।
बाबा के चरणों में हरदम
जिसका ध्यान लगा है
उस पर कृपा हुई बाबा की
सोया भाग जगा है
अर्जी सबकी लगें, पाट बाबा के दरबार में।
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009
मैया मैहर वाली
मैया मैहर वाली ,मुझपे महर करो
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।
विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा
समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।
काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो।
द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।
शुक्रवार, 27 नवंबर 2009
छोड़ दिया रे उसने मुझको जाने क्या सोचकर
छोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
तोड़ दिया रे, उसने दिलको,जाने क्या सोचकर।
ख्वाबों में बस वो ही वो, मुझको दिखती है
ख्यालों में बस वो ही वो , हरदम खिलती है
मोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
दिल ही दिल में दिल उससे, बातें करता है
मन चाहे ढंग से उससे, मुलाकातें करता है
जोड़ दिया रे, गम से मुझको, जाने क्या सोचकर।
उसके बगैर जीने की, सोच नहीं सकता हूँ
किसी तरह मैं खुदको, रोक नहीं सकता हूँ
झिंझोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
गुरुवार, 26 नवंबर 2009
जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
इस गीत की रेकार्डिंग भी हो चुकी है
मन की जिन्दगी, किसको मिली यहाँ
जिसको मिली यहाँ,खुश वो भी नहीं यहाँ
जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
कभी खुदका गम
कभी जग का गम
पीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
एक नहीं कई एक मिलेंगे
दिल को दुखाने वाले
झुकने वाले नहीं मिलेंगे
मिलेंगे झुकाने वाले
चाक गरेबां हो जाए तो
सींते चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
साथ नहीं कोई देता है
देखो प्यारे यहाँ
कहने को सब साथी हैं
देखो सारे यहाँ
जितनी साँसे मिली हैं प्यारे
खींचे चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
उतना इकठ्ठा करो कि
जिससे जिन्दगी पलती रहे
प्यार- मोहब्बत से मिलके
जिन्दगी चलती रहे
रीते ही हम आये हैं
रीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
रविवार, 22 नवंबर 2009
जैसे ही मैंने देखा तुझे, दिल यह मचल गया
जैसे ही देखा तुझक़ो
दिल मेरा मचल गया।
पल में ही दीवाना
पल में ही दीवाना
दिल मेरा बहल गया।
पूरी हुई दिल की,
पूरी हुई दिल की,
जो भी आस थी
बस तेरी ही तेरी,
बस तेरी ही तेरी,
मुझको तलाश थी
बेकाबू था दिल मेरा
बेकाबू था दिल मेरा
तुझसे ही संभल गया।
होती है दीवाने की
कोई न कोई अरमां
होती है परवाने की
होती है परवाने की
कोई न कोई शमां
पाकर तुझे दिल का
ही अरमां निकल गया।
शनिवार, 31 अक्टूबर 2009
गर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते
गर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते
लोगों को रुलाते भी तब भी वो न रोते।
ये कमीशन खाने के लिए खूब उकसाते
परसेंट से खाते हैं और सबको खिलाते।
जब इच्छा होती तब अपने दफ्तर जाते
जब इच्छा होती तब वो अपने घर आते।
ये कभी डरते नहीं मगर सभी को डराते
हाँ हजूरी करते नहीं हर किसी से कराते।
हमेशा ही सबको अपना रुतबा दिखाते
गर कोई न देखे तो उसे सबक सिखाते।
सरकारी अफसरों के तो मजे ही मजे हैं
क्योंकि मजे करने में बिल्कुल ही मजे हैं।
जिम्मेदारी लेते बहुत कम पर देते जादा
ये अफसर नहीं हैं आज के ये महाराजा।
प्रजातंत्र में अफसरों को पूरी आजादी है
कानून को तोड़ने मरोड़ने के ये आदी हैं।
जो भी इन के मन भाता ये वही करते हैं
फायदे की बातों पे ही ध्यान को धरते हैं।
कहते हैं कि जनता समस्याएं नेता जाने
वो ही जाते जनता के आगे हाथ फैलाने।
अफसर जनता के सामने कभी न जायें
फिर उनके लिए वो तकलीफ क्यों उठायें।
उनका सहारा उनकी किस्मत उनका खुदा
सीनियर अफसरों ने ये विदाई में कहा है।
सरकारी धन खाने में ये अफसर माहिर हैं
ओखली के भीतर चोट के मगर बाहिर हैं।
इनसे पंगा लेना मतलब आ बैल मुझे मार
बस जपा करें मंत्र जय हो प्रजातंत्र सरकार।
बुधवार, 21 अक्टूबर 2009
जैसा बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे
जैसा बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे।
दिल में ग़र होगा प्यार तो ही बाँटोगे॥
हुनर है तभी कुछ कर पाओगे वरना
उमर भर किसी के तलवे ही चाटोगे।
पहले ख़ुद सुधर जाओ फ़िर सुधारो
सुधरे बिना किसी को कैसे सुधारोगे।
दुश्मन दोस्त कौन समझना मुश्किल
ज्ञान बिना दुश्मन दोस्त कैसे छांटोगे।
अगर दुश्मनी निभाने से फुर्सत मिले
तब ही दिल से दिल की दूरी पाटोगे।
रविवार, 18 अक्टूबर 2009
ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा
ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा
तेरी हरकतों से हो न,जीना मुश्किल मेरा
ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो,यूँ फ़िदा।
जिसको भी तू देखे,हो जाए क्यों दीवाना
हाय,तेरी खातिर मुझको,पड़ता घबराना
मान जा मेरा कहना,सच कहता हूँ वरना
कहीं तेरी वजह न हो जाए कोई लफडा।
ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो यूँ फ़िदा।
समझा समझा के मैं,तुझको थक गया हूँ
तेरी कसम मैं तो,बिल्कुल ही पक गया हूँ
क्या हैं तेरे इरादे,तू मुझको यह बतला दे
बहुत सता लिया तूने,अब और न सता।
ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो,यूँ फ़िदा।
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009
दिल से जो होता है, जग में सभी का
पैरोडी
है दुनियां उसी की जमाना उसी का...
दिल से जो होता है, जग में सभी का।
उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का॥
भला जो करेगा, भला उसका होगा
उसके पीछे पीछे, हर कोई होगा
आदमी वही करे जो,भला आदमी का।
उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का।
गैरों के दुःख को, जो अपना बना ले
प्यार से बढ़ कर, गले से लगा ले
करे दूर दुःख जो, हर एक दुखी का।
उसको ही कहते हैं,फ़रिश्ता जमीं का।
जो नफ़रत मिटा के,मुहब्बत सिखा दे
मुहब्बत से सबको, मुहब्बत सिखा दे
चखा दे मज़ा जो, इस जिंदगी का।
उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का।
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2009
इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में
इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में।
तेरी खुश्बू सी लगे मेरी सांसों में॥
खाने को खाया है मीठा तो बहुत
उतना कहाँ जितना तेरी बातों में।
दिन तो गुजर ही जाते जैसे-तैसे
पर खले जुदाई तेरी मेरी रातों में।
कुछ भी नहीं सुहाता है बगैर तेरे
लेकर देखूं तसवीर तेरी हाथों में।
लगा हुआ है पहरा चारों तरफ़ से
जीता मैं ज्यों जीभ मेरी दाँतों में।
तेरे जैसा नहीं होगा जादूगर कोई
दिल मेरा गया तेरी मुलाकातों में।
तेरे जैसा नहीं होगा जादूगर कोई
दिल मेरा गया तेरी मुलाकातों में।
रविवार, 4 अक्टूबर 2009
उनसे दो बातें क्या करली उनका दम घुटने लगा
उनसे दो बातें क्या कर ली
उनका तो दम ही घुटने लगा ।
पल भर में ही उन्हें लगा कि
जैसे सब कुछ ही लुटने लगा ।
तारीफ तो इस लिए की जाती
कि आत्मीयता बनी रहे आपस में
इसका मतलब यह नहीं कि जमाना
उसके आगे तन-मन से झुकने लगा।
वो बहुत ही खूबसूरत हैं शायद
किसी ने उनसे यह कह दिया
फ़िर क्या था फ़िर तो चाँद
बदली में जा के छुपने लगा।
एक से एक पड़े हैं खूबसूरत
चेहरे इस खूबसूरत जहाँ में
हाय जाने क्यों हर कोई शख्श
बेताबी से उनकी ओर मुड़ने लगा।
शनिवार, 3 अक्टूबर 2009
जब जब मैंने सच बोला तो अपनों से हम दूर हुए
जब जब मैंने सच बोला अपनों से हम दूर हुए।
अपनों से जो सपने देखे सपने वो सब चूर हुए॥
जब भी जिसकी पड़ी जरूरत ले गए वो घर से
मुझको जरूरत पड़ी तो भोलेपन से मजबूर हुए।
साथ में बैठना उठना था जब थे हालात के मारे
फिरने लगे वो मुझसे ज्यों दौलत से भरपूर हुए।
एक दूजे के बिना दोनों कभी दूर नहीं रह पाए
नज़रों से मुझे गिरा दिया जब से वो मशहूर हुए।
हम न करते तारीफ तो पता ही नहीं चल पाता
ज्यों ही पता लगा हम से दुनिया की वो हूर हुए।
रविवार, 27 सितंबर 2009
फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी
फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी
बना के क्यों बिगाडा रे, .....
दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया रे दीवाना
ओ दीवाने ओ दीवाने -२
मुझको रिझा के,अपना बना के,
बनाया रे दीवाना ओ दीवाने ओ दीवाने
दिल में मेरे दिलवर बन के, दिल से लगाया मुझको
प्यार अगर ये झूठा था तो, क्यों बहलाया दिल को
कसमें खिला के, ख़ुद भी खा के,
दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया रे दीवाना
ओ दीवाने ओ दीवाने-2
गुरुवार, 24 सितंबर 2009
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
शाम सवेरे मैं पूजा करूँगा धरूँगा तेरा ध्यान॥
मूरख ज्ञानी बन जाता है
जाये जहाँ आदर पाता है
मुझको भी मिले सम्मान।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
अंधकार से मुझको उबारो
भवसागर से मुझको तारो
मेरा भी करो कल्याण।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
तेरी शरण में जो भी आया
जो भी माँगा वो ही पाया
दो मुझको भी वरदान।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
सोमवार, 21 सितंबर 2009
जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया
जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया । आज मैं यह दोहा आप के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह २४/९/१९७६ की बात है जब मैंने पहली बार कवि सम्मलेन देखा व सुना था । इस दोहे ने मेरा जीवन ही बदल दिया । भानु प्रताप बुंदेला जी ने यह दोहा सुनाया था।
एक पनिहारिन कुए पर पानी भरने जाती है और दोहा वहीं से शुरू होता है।
पानी ऐंचत झुकी कुआ में,
झलके अंग अनोखे।
मानो जमुना जी में हों,
गुम्बद ताजमहल के ।
आप सब भी इस दोहे का आनंद लें.धन्यवाद !!
रविवार, 20 सितंबर 2009
आओ हम डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें
आओ हम डांस करें मिलके ख़ुदको एडवांस करें।
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
आँखों में आँखों डालो, दिलवर दिल को उछालो
मस्ती में मौज मना लो, बांहों में बांहों को डालो
बिन तेरे क्या है जीना, सुन सुन ओ मेरी हंसीना
होगा इन आँखों से पीना, होगा इन बांहों में जीना
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
देखो छेड़ो न मुझको, कुछ कुछ होता है मुझको
क्या कुछ होता है तुझको, बांहों में ले लो मुझको
बदन यह गोरा गोरा,देखो पगलाये यह मन मोरा
चूमें हम थोड़ा थोड़ा, मिलके झूमें थोड़ा थोडा़
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
देखो सब झूम रहे हैं, एक दूजे को चूम रहे है
मस्ती में कूक रहे हैं, पर हम क्यों चूक रहे हैं
तुझसा ना कोई मिला,मिला तो दिल यह खिला
दिल में ना कोई गिला, मस्ती में पी और पिला
मौसम हँसीनहै दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
मेरे सपनों के राजा, थोडा और करीब आ जा
मस्ती में मुझ पर छा जा, मुझसे अब दूर ना जा
होंगे न हम कभी जुदा, तुझसे आने लगा मजा
भायी हर तेरी अदा, चाहे मिले अब कोई सजा
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
मुझको संभालो मैं गयी, देखो पागल दीवानी हुई
कुछ भी अब दिखता नहीं, मन मारे चुकता नहीं
मेरे सपनों की रानी, हाय तेरी यह मस्त जवानी
होने लगी पानी पानी, हाय छाने लगी रवानी
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।
हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की
हाय तेरे रूप ने हालत मेरी ख़राब की।
जानलेवा हर अदा लगे तेरे शबाव की॥
देखा कर यूँ मुझे प्यार से जाने जिगर
जिन्दगी ये मेरी तो तुमने लाजवाब की।
तरासा था मैंने जिसे कभी ख्वाबों में
बस वही तुम तमन्ना हो मेरे ख्वाब की।
जब से मैंने पी ली तेरी इन आँखों से
जरूरत क्या अब पड़ी मुझे शराब की।
जिन्दगी यूँ ही कट जाये मेरी मस्ती में
बस बनी रहे यूँ ही इनायत जनाब की।
शुक्रवार, 18 सितंबर 2009
पाकर मन का मोहना
पा कर मन का मोहना कैसे हो खुदको रोकना
कौन सोच में डूबे तुम प्यार में खुदको झोकना
जब से देखा है उसको होश नहीं है अब मुझको
सच कहूँ ऐसे में मुझे भाये न किसी का टोकना।
ख़ुद में ही मैं लगी डूबने ख़ुदको ही मैं लगी ढूँढने
डूबी गयी गहरी प्यार में भाये न किसी से बोलना।
उसकी शरण में जब से गई उसकी हो के रह गई
भाने लगा अब तो मन को साथ में उसके डोलना।
वही दर्द दें वो ही दवा करें
वो ही दर्द दें वही दवा करें।
आये कोई बताए क्या करें॥
तारीफ अपनी न भाये उन्हें
फिर रोज ही क्यों सजा करें।
सिर्फ मेरे ही होकर रहे वो
मेरी लिए दिल से दुआ करें।
बार-बार ही कहा उनसे मैंने
आप खूबसूरत हैं छुपा करें।
-प्रेम फर्रुखाबादी
गुरुवार, 17 सितंबर 2009
ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है
ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है।
जो नहीं आयेगा उसका इंतज़ार क्यों होता है।
जिसने यूँ ही तड़पने के लिए छोड़ दिया मुझे
ऐसे दिलवर पर तुझको ऐतबार क्यों होता है।
वफ़ा शब्द का जिनको मायने तक पता नहीं
जाने वफादारों में उनका शुमार क्यों होता है।
मैंने तो दिलो जान से उनसे वफ़ा निभाई थी
मुझ सा वफादार फ़िर नागवार क्यों होता है।
शनिवार, 12 सितंबर 2009
दोस्त दिल की मजबूरी मेरी भूल बन कर रह गयी
दोस्त दिल की मजबूरी मेरी भूल बन के रह गयी।
देखते ही देखते सपनों की दुनियाँ धम से ढह गयी॥
उनकी सोच थी कुछ और मेरी सोच थी कुछ और
सोच से सोच टकरायी दोनों की जिन्दगी बह गयी।
बिना फैसलों के दुनियाँ में कुछ हासिल नहीं होता
यह मेरी किस्मत मुझसे रुला रुला करके कह गयी।
अक्सर दिल बहला लेता हूँ उसके हसीं ख्यालों से
मैं नहीं सह पाया उसकी जुदाई मगर वो सह गयी।
बुधवार, 9 सितंबर 2009
कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है
कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है।
जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है॥
अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त
जीना उसका जीना जो रोशनी बाँटता है।
दुष्ट तो किसी की भी ले सकता है जान
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है।
किसी को रुलाये वो बात किस काम की
उसको सराहो जो सबको हँसी बाँटता है।
बुझदिल लोग ही जिया करते हैं उदासी में
दिलदार वो जो सबको ताजगी बाँटता है।
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