शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2009

हित दिखाकर भी लोग अहित कर देते हैं


हित दिखा कर भी लोग अहित कर देते हैं।
        अनादर भी कभी आदर सहित कर देते हैं॥ 

दुश्मनों के रूप कौन जान पाया आज तक
          जिस रूप में भी आते व्यथित कर देते हैं। 

चरित्रवान कोई लाख बनना चाहे दुनिया में     
     ऐसे भी लोग हैं जो आकर पतित कर देते हैं। 

कितना भी सोच समझ कर फैसला कर लो
      फ़िर भी राय लो तो लोग भ्रमित कर देते हैं। 

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना


कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना।
पियूँ नहीं तो कोई बता दे कैसे होगा जीना।
मुझे पी लेने दो,मुझे जी लेने दो
गरेबां चाक हुआ,उसे सी लेने दो
पियूँ नहीं तो कोई बता दे -

तोड़ दिया दिल जिसने मेरा
मोड़ दिया रुख उसने मेरा
लाखों में ही एक थी,दिलवर मस्त हसीना।
पियूँ नहीं तो कोई बता दे---

बहक जाऊँ नहीं होना खफा
पीनेवालों की होती यही अदा
इसी अदा में भाता है,मुझको जीवन जीना।
पियूँ नहीं तो कोई बता दे---

पिऊँ अगर तो पीता रहता
गम को पीकर जीता रहता
जीवन तो पाया मैंने पर,पाई कोई खुशी ना।
पियूँ नहीं तो कोई बता दे---

किससे कहूं दिल का रोना
होगा वही जो होगा होना  
मेंरे संग हुआ जो,हो संग किसी के कभी ना।
पियूँ  नहीं तो कोई बता दे---


गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

चलो आज मिल के कोई गीत गायें


चलो आज मिल के कोई गीत गायें।
      गीत गाकर सभी को ही मीत बनायें।
       चलोआज मिल के कोई गीत गायें।


जीवन की जंग जो लगे हारने 
   अपने आप को जो लगे मारने 
    आज उन्हीं में जीवन की प्रीति जगायें।
        चलो आज मिल के कोई गीत गायें।


आदमी जो सभी से मिल के रहे
    जीवन में सदा वो खिल के रहे
      जीने की सभी को यही रीति सिखाएं।
        चलो आज मिल के कोई गीत गायें।


अपनों से जो कभी रूठते नहीं
      हौसले उनके कभी टूटते नहीं
          रखते जो हौसले वो ही जीत जायें।
            चलो आज मिल के कोई गीत गायें


बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

पाने की चाह में खोया बहुत हूँ मैं


पाने की चाह में खोया बहुत हूँ मैं।
     हंसने की चाह में रोया बहुत हूँ मैं॥ 

सागर में मोती हमें भी मिल जायेगे
  इसी लिए खुदको डुबोया बहुत हूँ मैं॥ 

इंसानियत कहीं बिखर ही न जाये
     प्यार में सबको पिरोया बहुत हूँ मैं॥ 

कैसे कहूँ कैसे सही है उसकी जुदाई
     इन आँखों को भिगोया बहुत हूँ मैं॥ 

महक उठे जहाँ फूलों की खुशबू से
    फूलों को सचमुच बोया बहुत हूँ मैं॥ 

ठुकरा करके वो कहीं न चली जाये
  इस लिए नखरों को ढोया बहुत हूँ मैं॥ 

जो जो जब जब होना सो सो तब तब होना है


जो जो जब जब होना है,सो सो तब तब होना।  
बताओ फिर किस बात पर,नीदें अपनी खोना॥  

जो कुछ भी वो करता ठीक ही तो वो करता 
फिर उसकी करनी में दोष तुम्हें क्यों दिखता 
उसका फैसला माने सही फिर क्यों रोना-धोना।  

चाहे कुछ भी सोच लो, चाहे कुछ भी मान लो
उसके आगे एक चले न,बस इतना ही जान लो
मानव चाहे कुछ समझे,पर है वो एक खिलौना। 

उसकी शरण में खुदको सदा डाल के रखना
जो भी करे उसकी मरजी,सदा मान के रहना  
चिंता अपनी उसको दे दो क्यों चिंता को ढोना।  


सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

लोक सभा


लोक सभा की कार्यवाही 

सदन की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी । लोक सभा स्पीकर ने कहा , मेंबर राम लाल अपना प्रश्न पूंछे । रामलाल– स्पीकर सर, सदन में शोर होने लगा । रामलाल ने फ़िर कहा, मिस्टर स्पीकर सर, सदन में शोर और जोर से होने लगा । स्पीकर ने कहा शान्ति बनाये रखें । 


रामलाल ने अब की बार जोर से बोलते हुए कहा, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मैं मन्त्रजी से पूंछना चाहता हूँ गरीबों के …, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से…, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मंत्री जी से पूंछना चाहता हूँ कि गरीबों के…लिए…। रामलाल चिल्लाते रहे और उनकी आवाज शोर-शराबे में डूबती गई मगर शोर कम नहीं हुआ । बात नहीं सुनी जा रही थी इस पर रामलाल को सदमा सा लगा और टेबल पर धडाम से गिर गए ।एक दम शोर थम गया । 


लोग रामलाल की ओर दौड़ पड़े । किसी ने देखकर कहा , ही इस नो मोर रामलाल इस नो मोर। थोडी देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया । सब एक दूसरे की ओर देखने लगे, सत्ता पक्ष के सदस्य ने दुःख जताते हुए कहा,अब रामलाल हमारे बीच नही रहे । रामलाल एक जुझारू नेता थे वह हमेशा गरीबों के हित के लए संघर्ष करते रहे । इतिहास उन्हें हमेशा याद रखेगा । उनके बताये रास्ते पर आज से हम सब चलेंगे । इतना सुनते ही रामलाल उठ खड़े हुए और कहने लगे मुझे आप सब बोलने नहीं देते । मेरे रास्ते पर खाक चलेंगे । सारा सदन बोल उठा बोलो रामलाल अब बोलो आप कहना क्या चाहते हो? राम लाल बोलो । 


रामलाल बोले । मैं यह पूंछना चाहता हूँ की गरीबों की गरीबी दूर करने के लिए मंत्री जी क्या कर रहे है । सारा सदन एक साथ बोला अरे भाई यह भी कोई मुद्दा है । सदन का बहुमूल्य समय गरीबों के ऊपर बरबाद करना बेवकूफी है । बहुत सारे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए । रामलाल तो लगता पगला गए हैं । 


अगला प्रश्न, एक मेंबर उठकर बोला सर चाँद पर जाने के लिए सरकार की क्या योजना है । सदन की कारवाही आगे बढ़ गई । गरीबों की कमर की तरह रामलाल की बोली भी टूट कर बिखर चुकी थी । सदन में फ़िर शोर हुआ हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है, इसकी हर हालत में रक्षा होनी चाहिए । सदन की कारवाही समाप्त हो चुकी थी । सभी अपने-अपने घर के लिए चल दिए.....



बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

वैलेंटाइन डे


वैलेंटाइन डे

युवक - युवती
कोई हमें न रोको हम वैलेंटाइन डे मना रहे हैं।
जिन्दगी ऐसे भी जी जाती सबको बता रहे हैं॥ 

सभ्यता के पैरोकार
आप सब खाक वैलेंटाइन डे मना रहे है।
शादी के बाद की चोंच पहले लड़ा रहे है॥ 

युवक - युवती
कुछ नया करके ही जीवन आगे बढ़ता है।
घिसा - पिटा जीने को दिल नहीं करता है॥ 

सभ्यता के पैरोकार
क्यों सभ्यता को मिटटी में मिला रहे हो।
बुनियादों की चूरें सरे आम हिला रहे हो॥ 

युवक -युवती
एक बार ही मिलती है जीवन में जवानी।
वो भी क्या जवानी न हो जिसमें रवानी॥ 

सभ्यता के पैरोकार
जवानी तो हम पर भी कभी आई थी।
मगर ऎसी हरकत न कभी दिखायी थी॥ 

युवक -युवती
आपकी जलन को हम समझ पा रहे हैं।
देख कर हमें ख़ुदको नहीं रोक पा रहे है॥ 

सभ्यता के परोकार
मान-मर्यादाओं की खिल्ली उड़ा रहे हो।
हरकतों से पशु-पक्षियों को हरा रहे हो॥ 

युवक -युवती
लाइफ को हम मिल कर इंजॉय करेंगे
जीवन टेंशन को मिल कर बाय करेंगे।
किसी का दिल दुखाना मकसद नहीं है
हद में रहते हैं कभी होते बेहद नहीं है॥ 

सभ्यता के पैरोकार
परदे का जीवन यह परदे में ही रहने दो
अपने एन्जॉयमेंट को हद में ही बहने दो।
किसी एन्जॉयमेंट के हम ख़िलाफ़ नहीं हैं 
हदें तो मंजूर हैं मगर बेहदें माफ़ नहीं हैं॥ 







शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

फ़िल्म गीतकार आनंद बक्षी

मेरे प्रिय फ़िल्म गीतकार - 
             आनंद  बख्शी 

गीतकारों में हैं गीतकार आनंद बख्शी  
गीत लिखते हैं मजेदार आनंद  बख्शी 

गीत प्यार से भर देते हैं
जाने क्या जादू कर देते हैं
मस्ती भरते हैं बेशुमार आनंद  बख्शी 

जो भी सुनते इनके गाने
हो जाते हैं इनके दीवाने
दिल को हरते हैं यार आनंद बख्शी   

फिल्मों में ही लिखते खाली
गीत, ग़ज़ल और कब्बाली
फिल्मों से करते हैं प्यार आनंद बख्शी  

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

कोई अपना नहीं तो खुद अपने बनो


जब दिल से बात करो तो 
लोग दिमाग से सुनते हैं। 
जब दिमाग से बात करो तो 
लोग दिल से सुनते हैं। 
किसी से अपना स्वर मिलाओ तो
किसी से स्वर नहीं मिलते हैं ।  
किसी को अपना भी बनाओ तो 
वो अपने नहीं बनते हैं।
अगर बन भी गए तो आगे 
चल कर मुसीबत बनते है। 


यह दुनिया एक तलाश घर हैं। जब तक तलाश पूरी न हो जाये तलाशते रहो । यह तलाश ही जिन्दगी है। कभी कभी इस तलाश में आदमी जीत भी जाता है मगर हारता जादा है। जीत के अपने अपने तरीके हैं किसी का तरीका किसी दूसरे को जमता नहीं। एक अजीब सी उलझन में आदमी न चाहते हुए उलझ सा जाता है । कोई भी इस जिन्दगी में इस मनोदशा से अछूता नहीं है। जिन्दगी जीने का कोई एक पैमाना नहीं है। शायद इसी का नाम जिन्दगी है। 


जहाँ तक मैं समझता हूँ। इस दुनिया में हजारों नहीं लाखों नहीं बल्कि अनगिनत स्वभाव के लोग है। कभी कभी अपने मन के लोग सारी उम्र नहीं मिलते। समझ में ही नहीं आता कहाँ से शुरू करुँ कहाँ ख़त्म करुँ। कभी कभी सारी दुनिया को समझने के चक्कर में हम इतने उलझ जाते हैं कि ये दुनिया ही बेगानी लगने लगती है। आदमी कभी थक जाता है तो कभी थका दिया जाता है। 


एक कहावत से मैं काफी प्रभावित हूँ। " कि जिन्दगी में खुश रहना बहुत सरल है पर सरल रहना बहुत कठिन है "। शायद जिन्दगी का रहस्य इसी कहावत में छिपा नज़र आता है। जिन्दगी समझने से कभी समझ में नहीं आती क्योकि हम ज्ञान के समुन्दर में इतने उलझ जाते हैं कि जिन्दगी से काफी दूर चले जाते है।अंत में यही दूरी हमारी निराशा का कारन बन जाती है। फिर भी इस कारण को हम समझ के समझना नहीं चाहते हैं । शायद हमारी यही जिद हमारे हर दुःख का कारण बन जाती है।




आज जिगर का टुकडा मुझसे दूर चला


बेटी की विदाई पर 
पिता की भाव भीनी सलाह

आज जिगर का टुकडा, मुझसे दूर चला।
कैसे बतलाऊँ दिल को, करके चूर चला।

मुबारक हो तुझको,नया तेरा जीवन
        चहकता रहे तेरा खुशियों से आँगन। 

सास - ससुर  की सदा सेवा  करना
    खुशियों से उनके जीवन को भरना
         भरेंगे वही तेरा खुशियों  से दामन।

साजन की ख़ुशी ही तेरी खुशी
      सँवरती ही जायेगी यह तेरी जिंदगी 
          सदा होकर रहेगा वो  तेरा साजन।

वहाँ प्यार अपना सभी को लुटाना 
     घुटना कभी न  किसी को घुटाना
       रिश्ता कायम रहेगा सदा तेरा पावन।







छोटी छोटी बातों पर, ध्यान देना चाहिए


छोटी-छोटी बातों पर भी 
                  ध्यान देना चाहिए।
            छोटों को प्यार बड़ों को
                 मान  देना चाहिए।।

संतों के प्रवचन जहाँ    
                  कहीं भी हो रहे हों
अपना समय निकाल कर उन्हें
                 कान  देना चाहिए।।

सुनने को देखने को   
               मिलता है बहुत कुछ 
  जरूरी ग्रहण करें बाकी को
                 छान  देना चाहिए।।

आगे आ कर परोपकारियों 
                  की मदद करते रहें  
उनकी मदद वास्ते अपनी चादर
                   तान देना चाहिए।।

मित्रो, आपका  मन सदैव  
             शुध्द और शांत रहेगा 
अपनी श्रध्दा के  अनुसार कुछ 
                   दान देना चाहिए।।

अपना   कुछ भी   नहीं 
          बिगड़ता  है मेंरे  दोस्तो
 जिससे भी मिलें उसे अपनी 
              मुस्कान देना चाहिए।।