रविवार, 10 अक्तूबर 2010

भरोसा कर देख लिया हर कोई झूठा है


भरोसा कर देख लिया हर कोई झूठा है।
            भरोसे में लेकर मुझे हर कोई लूटा है॥

लोग कहते हैं कुछ मगर करते हैं कुछ
           इसलिए हर किसी से हर कोई रूठा है।

देने की जगह सब लेने पर तुले हुए
          इसी वजह आज रिश्ता हर कोई टूटा है।

अच्छाई की जगह पर बुराई कायम हो गयी
          तभी तो अपनों से हर कोई छूटा है।

मंगलवार, 5 अक्तूबर 2010

तेरी मेरी जोड़ी बड़ा खूब ही जमेगी


तेरी मेरी जोड़ी खूब ही जमेगी
      मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेगी 
जलती है दुनिया तो जलने दे 
    प्रीति परवान यह अपनी चढ़ेगी 
मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेंगी

दुनिया से दूर नई दुनिया बसायेंगे
  तन मन की मीठी ज्योति जलाएंगे
वही करूँगा तू जो भी कहेगी।
         मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेगी

मरते-मरते प्रेमियों ने कहा है
       प्रीति बिना जीना जीना क्या है
प्रीति मिशाल ये अपनी बनेगी
         मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेगी

गुजरेंगे जब हम तुम जहाँ से
          चर्चायें होगी सबकी जुबाँ पे
दाँतों तले ऊँगली उनकी दबेगी 
         मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेगी

एक दूसरे के हम होकर रहेंगे
        एक दूसरे में हम खोकर रहेंगे
रोशन दोंनों की जिन्दगी रहेगी
        मैं भी खुश रहूँगा तू भी रहेगी




शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

मेरी मुहब्बत ने मुझपे क़यामत ही ढाई है


मेरी मुहब्बत ने मुझपे क़यामत ऐसी ढ़ाई है। 
जहाँ भी जाऊँ मिले बस मेरी रुसबाई है॥

वो थे तो था साथ बहारों का मौसम 
        अब वो साथ नहीं साथ मेरी तन्हाई है।

पहले तो खुश किया फिर रुला दिया मुझे
    अब क्या कहूँ खुदा यह तो तेरी खुदाई है।

पा भी न सकूँ छोड़ भी न सकूँ उसे
    मुहब्बत भी तूने क्या खूब ही बनाई है।

सोमवार, 13 सितंबर 2010

बहुत कुछ दिया है, तुमने प्रभु


बहुत कुछ दिया है तुमने प्रभु
     कैसे करूँ मैं शुक्रिया तुम्हारा।
जो भी दिया तूने ही दिया है 
    मेरा नहीं सब कुछ है तुम्हारा।

भव-सागर में था मैं उलझा
      तेरी शरण में आ के सुलझा
तेरी कृपा से पाया किनारा।
     कैसे करूँ मैं शुक्रिया तुम्हारा।

तुझसे ही प्रभु हैं शाम-सवेरे
      जानूँ नहीं कितने रूप हैं तेरे
देखूँ जिधर उधर तेरा नज़ारा।
     कैसे करूँ मैं शुक्रिया तुम्हारा।

अपना तुझको जिसने बनाया
   उसका जीवन तुमने खिलाया
हो गये उसके जिसने पुकारा।
     कैसे करूँ मैं शुक्रिया तुम्हारा।

भक्ति में अपनी रमाये रखना
      कृपा की द्रष्टि बनाये रखना 
तेरा ही बस मुझको सहारा।
     कैसे करूँ मैं शुक्रिया तुम्हारा।



गुरुवार, 9 सितंबर 2010

मस्त हवाओ यह तो बताओ


मस्त हवाओ यह तो बताओ,
महबूब मेरा किस हाल में है।
छूकर उसके बदन को आओ,
महबूब मेरा, किस हाल में है। 
महबूब मेरा, किस हाल में है।

ऐ चाँद सुन, तुझे मेरी कसम,
देखता होगा, तू मेरा हमदम
खुद में ही मुझे उसे दिखाओ,
मस्त हवाओ यह तो बताओ
महबूब मेरा, किस हाल में है

तेरी खुदाई खुदा तू ही जाने,
आखिर करें क्या हम दीवाने
जल्दी से अब,मुझसे मिलाओ,
मस्त हवाओ,यह तो बताओ
महबूब मेरा, किस हाल में है।

शनिवार, 4 सितंबर 2010

तुम्हें हमारा प्यार अगर दिल से मंजूर होता


अगर प्यार मेरा प्रिये तुम्हें दिल से मंजूर होता।
तो बड़ा ही निराला अपना जीवन हुजूर होता॥

दूरियों की आग में इस तरह न सुलग रहे होते 
मिल जाते तो दोनों के दिलों का गम दूर होता।

ये फूल भी शरमा जाते अपनी ख़ुशी देख कर
इस तरह दोनों के चेहरों पे चमकता नूर होता।

अगर वक्त ने डुबोया न होता खुद के गरूर में 
तो आज अफ़सोस न होता न दिल चूर होता।

बुधवार, 18 अगस्त 2010

तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है


लड़का-
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है बड़ा ही प्यारा है
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है
तेरे ही साथ जिऊँगा
तेरे ही साथ मरूँगा 
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है,बड़ा ही प्यारा है 
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है

लड़की -
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है बड़ा ही प्यारा है
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है
तेरे ही साथ जिऊँगी
तेरे ही साथ मरूँगी 
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है,बड़ा ही प्यारा है 
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है 

लड़का-
पल भर की दूरी भी तेरी,करती मुझको बेचैन
न ढंग से दिन ही कटता है न कटती ढंग से रैन
तेरी यह जिन्दगी
है मेरी हर ख़ुशी
तुझमें ही खोया रहूँ,तुझको ही सोचा करुँ
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है,बड़ा ही प्यारा है 
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है

लड़की -
जबसे दिल लगा है तुझसे कुछ कुछ होता है 
तेरी कसम वगैर तेरे दिल पल पल रोता है
कर ले यकीं
ओ मेरे हमनसीं
हाल मेरा तेरे जैसा है,कैसे कहूँ तुझे कैसा है
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है,बड़ा ही प्यारा है 
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है

लड़का-
एक दूजे से दूर नहीं हम रह सकते हैं 

लड़की -
क्या गुजरेगी दिल पे नहीं कह सकते हैं 

दोनों -
फिर आओ साथ साथ रहेंगे हम
न होंगे जुदा कभी मेरे भी हमदम 
तेरा साथ बड़ा ही प्यारा है,बड़ा ही प्यारा है 
जीवन जीने का सहारा है,बड़ा ही प्यारा है






रविवार, 15 अगस्त 2010

गर तुम मुझको मिल गये होते

गर तुम मुझको मिल गये होते।
          फूल दिल में खिल गये होते।

कई जख्म हुये तेरी चाहत में
    करते इनायत तो सिल गये होते। 

कमाल की होती अपनी मुहब्बत
        देखते लोग तो हिल गये होते।

इंतजार में तेरे मुद्दतें हो गयी
    नाजुक दिल कई छिल गये होते।



शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

तू जाता जहाँ जा दीवाने,

तू जाता जहाँ जा दीवाने,
देख मुझे तू मत गा गाने
सिर्फ दो ही मिनट लगेंगे,
होश कर दूँगी तेरे ठिकाने

अबला न समझ मुझे तू
तेरा तबला बजा दूँगी मैं
याद रखेगा सारी उमर,
ऐसी तुझे सजा दूँगी मैं
भूल कर भी किसी को
छेड़ेगा न जाने अनजाने। 
सिर्फ दो ही मिनट लगेंगे,
होश कर दूँगी तेरे ठिकाने। 

हरकतों से तेरी लग रहा,
अच्छे घर का लगता नहीं
अगर होता तो इस तरह,
छेड़कानी तू करता नहीं
जा भाग यहाँ से नहीं तो
नहीं आयेगा कोई बचाने।
सिर्फ दो ही मिनट लगेंगे,
होश कर दूँगी तेरे ठिकाने।

जवानी नहीं तेरे बस में,
जा शादी किसी से कर ले
जा किसी का हो जा ना
हमसफ़र उसको कर ले
गर दुबारा इधर आया तो,
सीधा पहुँचा दूँगी थाने।
सिर्फ दो ही मिनट लगेंगे,
होश कर दूँगी तेरे ठिकाने।







मंगलवार, 3 अगस्त 2010

उनके आने से पहले खिल गयी फूलों से डालियाँ


उनके आने से पहले ही खिल गयी फूलों से डालियाँ।
जैसे डालियों ने पहन रखी हों अपने कानों में बालियाँ।

आसमां पे चढ़ के बोलने लगी है आज शुहरत उनकी
जहाँ जाते वहाँ ही स्वागत में बजने लगतीं हैं तालियाँ।

बेपनाह मुहब्बत करते हैं यारो उनसे ये सारे जहाँ वाले
देखके हुस्नवालों के चेहरों पे खिलने लगती हैं लालियाँ।

हर कोई दौड़ पड़ता है उनको अपना प्यार जताने को
जिस तरह घेर लेती हों किसी को ससुराल में सालियाँ।

बदनामी में भी उनको अपना नाम होता हुआ सा दिखे
बुरा ही नहीं लगता कभी अगर देता कोई भी गालियाँ।

हुस्न भी हो रहा बेकाबू आज कल बाहर झाँकने को
ऐसे-ऐसे कपड़े पहने घूमते हैं होती हैं जिनमें जालियाँ। 

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

तुमसे मेरी आँखें क्या चार हो गयीं


तुमसे मेरी आँखें क्या चार हो गयीं।
      खुशियाँ जीवन में बेशुमार हो गयीं।

मिलते मिलते आखिर मिल ही गये
     जिन्दगीं दोनों की मजेदार हो गयीं।

धरी रह गयीं चालें सारी ज़माने की
    कोशिशें अपनी सफल यार हो गयीं।

मुहब्बत से जियेंगे सदा खुश रहेंगे
      तेरी बाहें मेरे गले की हार हो गयीं।


मंगलवार, 13 जुलाई 2010

आओ एक दूजे को हम तुम मिल के संभालें

आओ एक दूजे को हम तुम मिल के संभालें       
आओ कसम ये खालें,आओ कसम ये खालें। 
प्यार मुहब्बत से मिल कर, प्रीत के गीत गालें
आओ कसम ये खालें,आओ कसम ये खालें॥ 

चाहे कोई कुछ भी कहे, करेंगे अपने मन की।  
मेरी तुझसे तेरी मुझसे, खुशियाँ हैं जीवन की॥ 
रहें प्यार से हँसी ख़ुशी से झगडे की बातें टालें। 
आओ कसम ये खालें, आओ कसम ये खालें॥ 

कहने को कहते रहते , कुछ न कुछ जगवाले
उनके मुँह पर कभी, कोई डाल सका न ताले। 
एक-दूजे की सुने एक-दूजे को ध्यान में डालें 
आओ कसम ये खालें, आओ कसम ये खालें॥ 

हम दो तन और दो जीव हैं देखो जुदा जुदा से
मिलके गुजर जाएँ जीवन अर्ज है यह खुदा से। 
एक-दूजे की खातिर  एक-दूजे के रंग में ढालें
आओ कसम ये खालें, आओ कसम ये खालें॥ 


शनिवार, 10 जुलाई 2010

हित को दिखाके भी लोग अहित कर देते हैं


हित को दिखाके भी लोग अहित कर देते हैं।
       अनादर कभी कभी आदर सहित कर देते हैं।

दुश्मनों के रूप कौन जान पाया आज तलक
       जिस रूप में भी वो आते व्यथित कर देते हैं।

चरित्रवान कोई लाख बनना चाहे दुनिया में
       ऐसे भी लोग जो बहकाके पतित कर देते हैं।

कितना भी सोच समझ कर फैसला कर लो
        फ़िर भी राय लो तो लोग भ्रमित कर देते हैं।

दिल लागने वाले दिल जीत ही लिया करते
        ऐसे मोहित करते वो कि चकित कर देते हैं।

मतलब निकाला चल दिये पराया बना कर
        जीवन देकर भी जीवन से रहित कर देते हैं।




गुरुवार, 8 जुलाई 2010

गुजरा वक्त कभी वापस न आए


गुजरा वक्त कभी वापस न आए
चाहे कोई चीखे और चिल्लाए
गुजरा वक्त कभी वापस न आए
कर के देख ले चाहे कोई उपाए 
गुजरा वक्त कभी वापस न आए 

झड़े फूल कभी खिलते नहीं हैं 
गए लोग कभी मिलते नहीं हैं
चाहे फिर कोई सारी उमर बुलाए
गुजरा वक्त कभी वापस न आए 

मना लो उनको जो रूठे हैं 
मिला लो उनको जो छूटे हैं 
ऐसा न हो फ़िर यह मन पछताए 
गुजरा वक्त कभी वापस न आए 

वक्त कभी भी रुका नहीं है 
किसी के आगे झुका नहीं है 
वक्त का पहिया आगे बढ़ता जाए 
गुजरा वक्त कभी वापस न आए 

प्रेम फर्रुखाबादी 

शनिवार, 26 जून 2010

उसका हर दिल पर जादू चला जरूर होगा

उसका हर दिल पर जादू चला जरूर होगा।
         पाने को हर कोई दिल में जला जरूर होगा।

भला सोचके जो सबका भला सोचता फिरता
       निश्चय ही उसका एक दिन भला जरूर होगा।

खुश वो ही होगा किसी को नज़रों में गिराके
      जो खुद गिर कर कहीं हाथ मला जरूर होगा।

जिन्दगी का मजा अकेले आ ही नहीं सकता
    थोड़ा तो किसी के संग कहीं ढला जरूर होगा।

बिना खुद जले ही भला कौन किसे जला पाया
     जलने से पूर्व वो थोड़ा बहुत जला जरूर होगा।

शुक्रवार, 18 जून 2010

जब से तुम मेरी जिन्दगी में आये


लड़का:
जब से तुम मेरी जिन्दगी में आये
मन मुस्कराए मेरा तन मुस्कराए।
जब से तुम मेरी...

लड़की:
तारीफ मेरी क्यों करते हो इतनी
इतनी नहीं तुम कहते हो जितनी
तारीफ मेरी क्यों...

लड़का:
जाने क्या जादू तुझमें है जाना
देखते देखते हुआ तेरा दीवाना
जितना देखूँ तुझे तू उतना लुभाए।
जब से तुम मेरी...

लड़की:
आता है तुमको खूब बातें बनना
बस भी करो क्या कहेगा जमाना
दिल में तुम्हारे मुहब्बत है कितनी।
तारीफ मेरी क्यों...

लड़का:
कहो सदा के लिए अपना बनालूँ
तुम मानो तो तुम्हारे घर को मनालूँ
तुम्हारे बिना जीना जीना नहीं हाये।
जब से तुम मेरी...

लड़का: लड़की:
भरोसे में लेके भरोसा न तोडना
देखो कभी मुझसे मुँह न मोड़ना
बनकर रहेंगे हम एक दूजे के साये।
जब से तुम मेरी...



ले लो मुझको शरण में मेरी माँ, माँ मेरी प्यारी माँ


मेरी माँ ... प्यारी माँ ...
ले लो मुझको शरण में मेरी माँ , माँ मेरी प्यारी माँ।
ले लो मुझको शरण में मेरी माँ , माँ मेरी प्यारी माँ।

पीछे पड़ा मेरे, सारा जमाना
पागल होकर, होकर दीवाना
मुझको बचालो मुझको छुपालो इस जग से मेरी माँ।
ले लो मुझको शरण में मेरी माँ , माँ मेरी प्यारी माँ।

छोड़ दूँगा अब ये पाप की दुनियां
आऊँगा अब माँ आप की दुनियां
तेरा द्वारा है मेरा गुजारा सचमुच आज से मेरी माँ।
ले लो मुझको शरण में मेरी माँ , माँ मेरी प्यारी माँ।

मेहनत करूँगा मजदूरी करूँगा
कुछ गलत माँ अब न करूँगा
सीधी राहें होंगी अब मेरी राहें खाऊँ कसम मेरी माँ।
ले लो मुझको शरण में मेरी माँ , माँ मेरी प्यारी माँ

शनिवार, 12 जून 2010

हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है


हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है।
चाहा जिसे दूर वो अनचाहा करीब है। 

उसकी झलक को मैं तरस गया हूँ
आँखों से अपनी मैं बरस गया हूँ
हाल मेरे दिल का यारो बड़ा अजीब है।
हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है।

जीने को मन मेरा करता नहीं है
उसके बगैर काम चलता नहीं है
मुझ जैसा न होगा कोई बदनसीब है।
हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है।

उसको मैंने चाहा दिल से चाहा
दिल में बिठा के दिल से सराहा 
फिर भी बन गया रे वो मेरा रकीब है। 
 हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है।

दिल को सकूं कभी मिला ही नहीं
दिल का फूल कभी खिला ही नहीं
प्यार की खुश्बू कभी हुई न नसीब है। 
हाय! मैं क्या करुँ मेरा ऐसा नसीब है।