सोमवार, 24 सितंबर 2018

बोली



क्भी लगे यह फूल सी,
कभी लगे यह शूल।
बोली का सब खेल है,
यह मत प्यारे भूल।।   

यूँ ही कुछ भी मत बोलो,
जब बोलो हितकर बोलो। 
जो हित कर बोली बोले,
यह दुनियां उसकी हो ले।। 

बोली से ही प्यार बढे,
बोली से ही रार बढे।  
बोली से ही मित्र बने,
बोली से ही शत्रु बने।।   

बोली से ही रिश्ते खिलते,
बोली से ही रस्ते मिलते।
बोली से ही सुख मिलता,
बोली से ही दुःख मिलता।।   

बोली से ही सम्मान मिले,
बोली से ही अपमान मिले। 
बोली से ही मसले सुलझें,
बोली से ही मसले उलझें।।  

बोली से ही व्यवहार चले,
बोली से ही व्यापार चले । 
बोली से ही परिवार चले,
बोली से ही संसार चले।।
  
बोली से ही प्राण भरे,
बोली से ही प्राण हरें।   
कहता हर कोई संत है,
बोली की महिमा अनंत।। 

यूँ ही कुछ भी मत बोलो,
जब बोलो हितकर बोलो। 
जो हित कर बोली बोले,
यह दुनियां उसको हो ले।। 
   

दोनों को दोनों की जरूरत है साहिब


दोनों को दोनों की जरूरत है साहिब।
जिंदगी तभी बड़ी खूबसूरत है साहिब।।

मंदिर तब तलक कोई मंदिर नहीं होता
जब तक न उसमें कोई मूरत है साहिब ।।

तनहा जी के देख लो मना कौन करता।
तनहा जीने की न कोई सूरत है साहिब।। 



बुधवार, 6 जून 2018

मेरी जिंदगी में कोई नहीं


मेरी जिंदगी में कोई नहीं।
फिर भी कभी रोई नहीं।। 

डोरे कइयों ने डाले मगर 
किसी में कभी खोई नहीं। 

खड़ी रही सच के साथ 
झूठ की फसल बोई नहीं। 

हलकी रही मन से  सदा 
बोझ मन पर  ढ़ोई नहीं। 

जागती रही मैं अक्ल से 
भूल से कभी सोई नहीं। 

      - प्रेम फर्रुखाबादी 

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

सत्य और असत्य के युध्द हमेशा ही चले हैं


सत्य और असत्य के युध्द हमेशा ही चले हैं

पालक हैं हम सब हमारी बदौलत ही पले हैं।

जीना चाहे हर कोई अपनी जिंदगी को यहाँ

मगर जीने के वास्ते सब सब को ही छले हैं।

हम ही हम जियेंगे यहाँ और दूजा कोई नहीं

इसी भाव के संग इंसान इंसान से ही जले हैं। 

ज्ञान की धार को तेज़ ही करते रहना चाहिए

जीवन का हर दुःख अक्सर ज्ञान से ही टले हैं।

नीचे गिरा दिया करती हैं जरूरतें इंसान को 

मगर जरूरतों में  सब सब के साथ ही ढले हैं।

लोभ लालच से तो सदा दूर ही रहना चाहिए 

इस में गिर कर हर इंसान खुद को ही दले हैं।

बस यही भावना हित कर जियो और जीने दो 

इंसान से इंसान यहाँ इसी भाव से ही फले हैं।

हर कोई इंसान बुरा नहीं हुआ करता है मित्र 

जो दूसरे का हित चाहें होते बस वही भले हैं। 



तुम्हें पाया तो पाया सब आज...



तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
हुआ खुद पर खुद को नाज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

हाल बड़ा बेहाल था मेरा, 
जीवन जीना मुहाल था मेरा 
गया दिल से ग़मों का राज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

पूँछ रही थी सखियाँ मेरी, 
तरस रही थी अखियां मेरी 
फिर छिड़ गया दिल का साज़,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

धूप गयी अब आ गयी छाँव,
पड़ते नहीं हैं जमीं पर पाँव 
मेरे सब कुछ तुम्हीं हो सरताज,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

प्रेम फ़र्रुखाबादी 

पैरोडी female - मेरे सपनो की रानी कब आएगी तू



पैरोडी female - 
मेरे  सपनों की रानी कब आएगी तू 

मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम  
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ -2 

तुमने किया था ,वादा वफ़ा का 
अपना कहा था ,अपना बना के -2 
निकला झूठा तेरा वादा कब आओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

याद सताये, दिल घबराये  
समझ न आये ,क्या मैं  करूँ-2 
और कितना मुझे तरसाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

बहक गयी गर , दिल से दिलवर 
फिर मत कहना, क्या हो गया -2 
तब खुद ही खुद को रुलाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

प्रेम फ़र्रुखाबादी 








मंगलवार, 2 जनवरी 2018

चूड़ी पहनन को सखी, इक दिन गयी बजार


चूड़ी पहनन को सखी, इक दिन गयी बजार। 
मसलते - मसलते हाथ, मस्त हुआ मनिहार॥ 
मस्त हुआ मनिहार,मस्त तो मैं भी कम न थी। 
कुछ कहने की सखी,  दोनों में ही दम न थी॥ 
कहे प्रेम कविराय, तन मन मिल कर झंनाये। 
बड़ी मुश्किल से तब , खुद को संभाल पाये॥ 
                              

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

दिल से कितने दीवाने गए


प्यार में दिल से कितने ही दीवाने गए.
मूर्ख  ही नहीं जाने कितने ही सयाने गए.
किसी से मुस्करा क्या लिया पल भर जो 
बड़ी दूर तक फिर कितने ही अफ़साने गए.

ठोकर खायी जब किसी के प्यार में तो,
पता नहीं जाने कितने ही मयखाने गए.
लाख समझाने पर भी न समझता कोई 
हाय प्यार में चोट कितने ही खाने गए.

दीवाने माने नहीं किसी की अपने आगे 
समझदार उन्हें कितने ही समझाने गए.
दिल का मामला यारो बस दिल ही जाने
दिल के खेल में कितने ही पहचाने गए.

गर दे दिया भरोसा किसी ने प्यार में तो 
जा कर पर प्यार कितने ही बरसाने गए
लैला मजनूँ  की बातें  तो करते हैं सभी 
वैसा नाम भला कितने ही लिखवाने गए.

बहुत दम भरते  हैं लोग प्यार  में दम का
मगर बेदम होकर कितने ही तहखाने गए.
मिटने की सिर्फ बातें ही बातें किया करते 
मिटने की खातिर कितने ही परवाने गए. 





जहां चाह वहीं पर राह है प्यारे




जहाँ चाह वहीं पर राह है प्यारे
दिल में क्यों फिर दाह है प्यारे।

जो कर के दिखायें कमाल कोई
होती उन्हीं की वाह वाह है प्यारे

जिसने सीखा ही नहीं हुनर कोई

निकलती उन्हीं की आह है प्यारे

कहा मान लो कभी अपनों का भी

वरना होती जिंदगी तबाह है प्यारे

बहुत ताकत हुआ करती
प्यार में

प्यार सब से बड़ी पनाह है प्यारे

संभाल सको तो संभालो खुदको
जिंदगी तो बड़ी ही अथाह है प्यारे

जो समझ लिया इस जिंदगी को

वही तो यहाँ पर शहंशाह है प्यारे।



कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ


कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ
होगा वही जो किस्मत में लिखा हुआ

भले ही पकाये कोई कहीं भी रख कर
फल तो वही पका है जो पेड़ से चुआ।