सोमवार, 20 जनवरी 2020

अब और परेशान मुझे मेरे हमदम न करो


अब और परेशान मुझे मेरे हमदम न करो।
भूल कर भी प्यार को मुझसे कम न करो॥ 

दिलो जान से मैं हाजिर हूँ तुम्हारी खातिर
गुस्सा अब और मेंरे वजीरे-आजम न करो।

आओ भूलें हम मिलके सारे गिले शिकवे
अपना बना लो ख़राब  यह मौसम न करो।

जख्में दिल अब भरने वाले नहीं हैं जल्दी
छोड़ दो  इनको अब इनपे मरहम न करो।

मतलब में मीठे मीठे मगर हो बड़े कडुए 
जाओ अब  नहीं बोलती  मेरा दम न भरो। 

पहले तो प्यार किया फिर दिल तोड़ दिया 
अब कहते हो  कि प्रिये कोई गम न करो। 

ये दुनियां है प्यारे यहाँ दिल टूटते ही रहते 
संभालो अपने आपको आँखें नम न करो। 













गुरुवार, 16 जनवरी 2020

मेरी फिल्मी पैरोडियां


1. पैरोडी female - 

मेरे सपनों की रानीकब आयेगी तू ...

मेरे सपनों के राजा कब आओगे 
तुम 
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ तुम चले आओ -2 

तुमने किया था ,वादा वफ़ा का 
अपना कहा था ,अपना बना के -2 
निकला झूठा तेरा वादा कब आओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ तुम चले आओ

याद सताये, दिल घबराये 
समझ न आये ,क्या मैं करूँ-2 
और कितना मुझे तरसाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ तुम चले आओ

बहक गयी गर , दिल से दिलवर 
फिर मत कहना, क्या हो गया -2 
तब खुद ही खुद को रुलाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ तुम चले आओ

प्रेम फ़र्रुखाबादी

2. पैरोडी
 बड़े दिनों के बाद गली में आज चाँद निकला...

तुम्हें पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
हुआ खुद पर खुद को नाज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला

हाल बड़ा बेहाल था मेरा, 
जीवन जीना मुहाल था मेरा 
गया दिल से ग़मों का राज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला

पूँछ रही थी सखियाँ मेरी, 
तरस रही थी अखियां मेरी 
फिर छिड़ गया दिल का साज़,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला

धूप गयी अब आ गयी छाँव,
पड़ते नहीं हैं जमीं पर पाँव 
मेरे सब कुछ तुम्हीं हो सरताज,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला

प्रेम फ़र्रुखाबादी

3. पैरोडी

कभी राम बनके,कभी श्याम बनके ...

कभी माता बनके, कभी पिता बनके 
चले आना गुरूजी चले आना।
तुम दीपक रूप में आना
तुम दीपक रूप में आना
तम को दूर करने, मुझमें नूर भरने 
चले अना गुरु जी चले आना।

तुम रक्षक रूप में आना
तुम रक्षक रूप में आना
मेरी रक्षा करने, प्यार सच्चा करने 
चले आना गुरु जी चले आना।

तुम आत्म रूप में आना
तुम आत्म रूप में आना
अपनी भक्ति जगाने,अपनी शक्ति दिखाने 
चले आना गुरु जी चले आना।

तुम माझी रूप में आना
तुम माझी रूप में आना
भव से पार करने,मेरा उध्दार करने 
चले आना गुरु जी चले आना।

तुम सपन रूप में आना
तुम सपन रूप में आना
मुझको राह दिखाने, मुझमें चाह जगाने 
चले आना गुरु जी चले आना।

प्रेम फ़र्रुखाबादी

4. पैरोडी

लागा चुनरी में दाग ...

प्यारा सजनी का प्यार भुलाऊं कैसे
भुलाऊं कैसे उसे घर लाऊं कैसे
प्यारा सजनी का प्यार ---

रूठी जब से मोरी सजनियाँ
प्यार से प्यारी मोरी सजनियाँ
जाके ससुराल में उसको मनाऊं कैसे
उसे घर लाऊं कैसे
प्यारा सजनी का प्यार ---

चली गई वो बिना बतलाये
तन तड़पे मन मोरा घबराए
जाके ससुराल में उसको मनाऊं कैसे
उसे घर लाऊं कैसे
प्यारा सजनी का प्यार ---

कभी कभी मेरे मन में उठते उलटे सीधे सवाल
बिन सजनी के सचमुच ही ये जीवन है जंजाल
जाके ससुराल में उसको मनाऊं कैसे
उसे घर लाऊं कैसेप्यारा सजनी का प्यार ---

प्रेम फ़र्रुखाबादी

5.पैरोडी

ऐ हवा मेरे संग संग चल ...

दिलरूबा मेरे अंग-अंग लग 
मदमस्त हुई हुई मैं लगभग 
बोले मुझसे ही मेरा रग-रग 
साथी तू ही मेरा पग-पग। 
दिलरूबा मेरे अंग-अंग लग 
मदमस्त हुई हुई मैं लगभग...

जैसे ही तूने,मुझको छुआ है 
कुछ-कुछ जैसे,मुझको हुआ है-2
दिलरूबा मेरे अंग-अंग लग 
मदमस्त हुई हुई मैं लगभग... 

जन्म जन्म से तू, साथी मेरा 
मैं हूँ दिया तू,बाती मेरा-2
दिलरूबा मेरे अंग-अंग लग 

मदमस्त हुई हुई मैं लगभग... 

तेरे बिना मैं,जी न सकूँगी 
गम जिंदगी के,पी न सकूँगी-2
दिलरूबा मेरे अंग-अंग लग 

मदमस्त हुई हुई मैं लगभग ...

प्रेम फ़र्रुखाबादी

6.पैरोडी

मेरे रस्के कमर...

दिल से मुस्काके तू, दिल पर छा गया -2
मस्ती तन-मन में मेरे छा ने लगी -2
हाल ऐसा हुआ, दिल ने दिल को छुआ-2
कली दिल की खिली,दिल मेरा झूम उठा 
मेरे प्यारे दिलवर-2 हुआ ऐसा असर 
हुई दिल को खुशी,दिल मेरा झूम उठा।

हम कहें और क्या, हम सुनें और क्या 
मिल गयी जिंदगी,दिल मेरा झूम उठा 
मेरे प्यारे दिलवर, हुआ ऐसा असर 
हुई दिल को खुशी, दिल मेरा झूम उठा।

खाली खाली पड़ी थी,यह दिल की जमीं-2
दूर कोसों थी मुझसे, दिल की खुशी -2
जो तू मुझको मिला, फूल दिल का खिला-2
आ गयी ताजगी,दिल मेरा झूम उठा 
मेरे प्यारे दिलवर, हुआ ऐसा असर 
हुई दिल को खुशी, दिल मेरा झूम उठा।

अब कहूँ किस तरह, मस्त हुई इस तरह 
आस ऐसी जगी, दिल मेरा झूम उठा 
मेरे प्यारे दिलवर, हुआ ऐसा असर 
हुई दिल को खुशी, दिल मेरा झूम उठा
प्यार से देख कर, दिल को फेंक कर 
जिंदगी महक उठी,दिल मेरा झूम उठा।

प्रेम फ़र्रुखाबादी



मंगलवार, 14 जनवरी 2020

मेरे गीत

1.
बड़ी आशा लेकर मैं आया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी
बड़ी देर से ही आ पाया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी 
कुछ भी तो नहीं ठीक चल रहा आज मेंरे घर पे 
कैसे कहूँ कितना घबराया हूँ,तेरे दर पे माँ भवानी 


आपस में सब लड़ रहे हैं,एक दूजे पर चढ़ रहे हैं 
खुदको नहीं दोषी माने,दोष दूसरों पर मढ़ रहे हैं
समझाने अगर बैठूं तो,एक नई कहानी गढ़ रहे हैं
राह पर ला के सबको ही, दुःख हर ले माँ भवानी 
बड़ी आशा लेकर मैं आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी 


जीवन में कोई रस नहीं,कुछ भी तो मेरे बस नहीं 
जतन किये फिर भी पकड में,आयी कोई नस नहीं 
अपनी धुन में डूबे हैं सब, होते टस से मस नहीं है
बदल जाय सोच सभी की ऐसा वर दे माँ भवानी 
बड़ी आशा लेकर मैं आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी


तेरी शरण ही मेरा सहारा,दिल ने मेरे तुझे पुकारा
तेरे सिवा दुखियों का, कोई दिखता नहीं किनारा
देकर तूने अपनी शक्ति से अपने भक्तों को संवारा
अपने किसी चमत्कार से किरपा कर दे माँ भवानी
बड़ी आशा लेकर मैं आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी


2.
छोड़ें अपने बैर को,माँगें सबकी खैर को
आओ मिलकर, हमदम, हमदम, हमदम 
सोचें समझें,सोचें समझें,सोचें समझें,हम 
खुशियाँ  लुटाके, अपना लेंगे,सब के गम
छोड़ें अपने बैर को…


बेहतर से बेहतर, हम काम करेंगे
काम से ही अपने, हम नाम करेंगे
देखेंगे,एक दूजे में ना,कोई  ख़म।         
खुशियाँ लुटाके,अपनालेंगे,सबके गम
छोड़ें अपने बैर को…


आपस में हम सब,मिल के रहेंगे 
फ़ूलों की तरह हम,खिल के रहेंगे   
चाहे,लगाना पड़े,कितना भी,दम।
खुशियाँ लुटाके,अपनालेंगे,सबके गम
छोड़ें अपने बैर को..


बैठ कर अकेले हम,ध्यान करेंगे  
नारी का समाज में,सम्मान करेंगे 
इंसानियत का,मिलके,निभा देंगे,धरम।
खुशियाँ लुटाके,अपना लेंगे,सबके गम 
छोड़ें अपने बैर को...     


      -प्रेम फर्रुखाबादी 
3.. 
जैसे चाहो वैसे तुम जियो जिन्दगी
पर याद रहे न हो कोई तुमसे दुखी 
अपने  तरह जो रखे सबका ख्याल
रखने लगे हर  कोई उसका ख्याल
आने लग जाती हर तरफ से ख़ुशी।


मस्त रहो मस्ती दो कहते हैं सभी
प्यार करो सबसे  नफरत न कभी
छोड़ दो घुटन को फैलाओ ताजगी।   
जैसे चाहो वैसे तुम जियो जिन्दगी 
पर याद रहे न हो कोई तुझसे दुखी।


4. 
प्यार  भरे मेरे  दीवाने, दिल को  तोड़ कर
ऐसे कैसे  जा सकते हो, मुझको छोड़ कर


कसमें खायीं थीं तुमने, साथ निभाने की  
उलझी बातों की बातों से, बात बनाने की 
भूले सब कसमें अपनी ,मुख को मोड़ कर। 


याद करो अपनी, पहली पहली मुलाकातें 
करते थे तुम मुझपे ,  प्यार भरी बरसातें 
मिल कर  जियेंगे यूँ  ही, रिश्ता जोड़ कर।


चार दिनों में लगा कि, जैसे युग हो बीता
थकते नहीं थे कहके डिअर डार्लिंग रीता   
तुमने तो रख दिया , मुझको झिंझोड़ कर।
              
5.
मँहगाई !
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई
जीते जी ही खा लेगी मँहगाई 
बेबस हुआ है शासन ही सारा
लुटेरों ने लूट है मचाई।
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई।


भला कोई खरीदे क्या खाये
कुछ भी तो समझ में न आये 
हर मुख से निकल रही आई।
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई।


कहीं मिलती नहीं असली चीजें
हर तरफ ही मिलें नकली चीजें
हर नीयत में खोट है समाई।
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई।


दया करुणा कर गयी किनारा 
छोड़ कर इंसानियत बेसहारा 
मच रही हर तरफ हाय- हाय।
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई।


6.
तेरे दर की माँ सीढ़ियाँ जो चढ़ गया 
जीवन में आगे ही आगे वो बढ़ गया 
मैं भी तेरी सीढियां यही सोच कर चढ़ा हूँ 
सुनले मेरी फ़रियाद तेरे सामने खड़ा हूँ 
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी, 
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी


करुँ तेरा गुणगान, करो मेरा कल्याण
करुँ तेरा गुणगान, करो मेरा कल्याण
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी। 


हर लो माँ सब दुःख मेरे 
आ के पड़ा हूँ दर पर तेरे
तेरा ही अब मुझको सहारा
हरो मेरा व्यवधान, हरो मेरा व्यवधान।
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी। 


जीवन से मैं ऊब गया हूँ
भवसागर में डूब गया हूँ 
नीचे ही गिरता जाता हूँ
करो मेरा उत्थान, करो मेरा उत्थान।
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी। 


कुछ भी मुझको भाये ना
कुछ भी समझ में आये ना
अज्ञानी हूँ मैं इस जग में
हरो मेरा अज्ञान ,हरो मेरा अज्ञान।
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी। 


हर किसी ने मुझको लूटा 
लगता है  हर रिश्ता झूठा 
झूठ नहीं मैं सच कहता हूँ
रिश्ता तेरा महान,रिश्ता तेरा महान।
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी। 


               -प्रेम फर्रुखाबादी 
7.
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो
तड़प तड़प कर आखिर मुझे क्यों तड़पाते हो 


ऐसे भी कोई किसी को प्यार करता है
कभी इकरार तो कभी इंकार करता है
खाम खां किसी को बताओ क्यों उकसाते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो 


कभी पास आ कर तो देखो हमदम मेरे
आखिर क्यों बेरुखी दिखाते हमदम मेरे
इस सोये हुए दिल को भला क्यों धड़काते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो


कहते बनता नहीं जो हुआ हाल हमारा
बिना तेरे अब तो होता नहीं मेरा गुजारा
प्यार मुझसे इतना करके भी क्यों कतराते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो


 8.
अरे देखता है क्या छूकर मुझे देख
देख कर मजा न आयेगा तुझे शेख


हुस्न का मज़ा मुफ्त में लेने चला
पहले मेरा फिर कर अपना भला
पास आना तो कर जरा ढीली जेब 


एक से बढ़ कर एक यहाँ आये
तुमसे बढ़ कर रंग यहाँ जमाये
मिट जाएगा न निकाल अपनी तेग


लगता इश्क का तुझे ज्ञान नहीं
कहाँ तू खड़ा है तुझे ध्यान नहीं
इश्क छोड़ दे बैठ कर खा यह सेब      


9.
तेरी मुहब्बत ने मुझे जिन्दगी दी है।
जिन्दगी मेरी बड़ी खूबसूरत की है॥


होश संभाले हुए बढ़ रहा था आगे  
जिन्दगी क्या है तड़ रहा था जागे 
बड़ी मदमस्त मुझे तूने बेखुदी दी है।


मुझे मालूम न था जिन्दगी क्या है
मिल कर तुझसे आज पता चला है
जो कभी नहीं मिली तूने ख़ुशी दी है।


मेरे हर सवाल का जवाब मिला है 
क्या कहूँ पा के दिल यह खिला है 
धूप सी जिन्दगी में तूने चाँदनी दी है।


10.
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार।
हम सब आये तेरे द्वार, हम सब आये तेरे द्वार।
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार।


अपनी भक्ति के रस में हम को रसमय कर दो 
जीवन सारा सफल हो जाये ऐसा कोई वर दो
हम याद रखेंगे उपकार, हम याद रखेंगे उपकार 
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार।


देख लिया जीवन जी के तुझको बिन याद किये
पल भर भी सुख पाया नहीं है वाद-विवाद किये
खुद में उलझे रहे बेकार, खुद में उलझे रहे बेकार
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार।


इस जीवन का मतलब क्या हम जान नहीं पाए
अपने हित में ही डूबे रहे हम परहित न कर पाए
पाया न जीवन आधार, पाया न जीवन आधार।
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार।


बड़ी-बड़ी आशाएँ लेकर हम तेरी शरण में आये
तेरी शरण में रहने वालों के देखे चेहरे मुसकाये
मैया अनुपम तेरा प्यार,मैया अनुपम तेरा प्यार।
जय अम्बे जगदम्बे, कर दो हम सब का उद्धार। 


11.
अंजानो से कभी दिल न लगाना
     हो सके तो प्यारे खुदको बचाना
पता नहीं कब क्या हो जाये 
          क्या हो जाये अपना ठिकाना 


पहले पहले तो ये पास में आयें
      पास आके अपना खास बनायें
खास बना के फिर डालें ये दाना
    हो सके तो प्यारे खुदको बचाना


झूठी कसमें ये खायें खिलाएँ
        जाने क्या क्या ख्वाब दिखाएँ
इनकी बातों में कभी नहीं आना
    हो सके तो प्यारे खुदको बचाना


मतलब में बड़े ये शातिर होते
          बातों में भी बड़े माहिर होते
होता काम इनका अपना बनाना
     हो सके तो प्यारे खुदको बचाना


12.
अन्ना हजारे झुकना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।
टेकना अपने घुटना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा॥ 


नेताओं की चालों में आकर, लिपट नहीं जाना
मांगे मनवाये बिना ही खुद में सिमट नहीं जाना
मीठी बातों में घुलना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।


भ्रष्ट नेताओं ने सारा ही, देश बेच कर खा लिया
कहते बने न कुछ भी,एक ऐसे मोड़ पर ला दिया
दूर रहना इनसे जुड़ना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।


आपको बरगलाने की बहुत, कोशिश की जाएगी
तुम्ही कहो बिना तुम्हारे ये,जनता कैसे जी पायेगी
बिल्कुल हिलना डुलना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।


करोड़ों लोगों में ईश्वर ने, तुम को इसके लिए चुना
तुम्हारी आवाज पर ये,जनसैलाब उमड़ा कई गुना
इनके तराजू में तुलना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।


तुम्हारे इरादों के आगे,सरकार जरूर जान जाएगी
जैसा चाहते हो तुम वैसे, बात आपकी मान जाएगी
आगे बढ़ना अब रुकना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।


13.
जब भी किसी से बोलो, बोलो प्यार की बोली।
प्यार की बोली ही प्यारी, समझो मेंरे हमजोली॥


मिल जुल कर जीना ही होता है जीवन जीना
रंग से रंग गर न मिलें बताओ कैसी वो होली॥


नफरत से नफरत मुहब्बत से मुहब्बत ही फैले 
टेड़ों को दुनियाँ टेड़ी लगे भोलों को लगे भोली॥


मेल जहाँ भी होता है स्वर्ग वहाँ पर ही होता है 
जो भी जिएँ खुशी से भरे खुशी से उनकी झोली॥


बोल जिनके होते लुभाने सब होते उनके दीवाने
ऐसा तो वही करें जिसने बोली तोली फिर बोली॥


14.
यह दुनियाँ भगवान की है,भगवान ही इसे चलाता है 
प्यार वो अपना हम पर दिन-रात ही लुटाता है
यह दुनियाँ भगवान की है...


उसने हम पर अपना, बड़ा ही करम किया है 
देकर हमको मात-पिता जग में जनम दिया है 
वो ही सब कुछ जाने वो ही भाग्य विधाता है।
यह दुनियाँ भगवान की है...


छोड़ दिए सुख दुःख उसने हम सबके ही आगे 
दोनों पड़े हैं पीछे हमारे हम फिरते हैं भागे-भागे 
क्या पाना क्या खोना है वो ही सबका ज्ञाता है।
यह दुनियाँ भगवान की है…


उसकी शरण सुखदायी सुख की अनुभूति कराये 
बाकी सब दुखदायी यहाँ कुछ भी समझ न आये 
उसका हमसे हमारा उससे जन्मों का यह नाता है। 
यह दुनियाँ भगवान की है…


-प्रेम फर्रुखाबादी

बुधवार, 8 जनवरी 2020

मेरी ग़ज़ल भाग 2



36 .
यूँ ही हम मिलते रहे तो,
              एक दूजे के हो जायेंगे।
मिल के भी न होंगे जुदा,
             एक दूजे में खो जायेंगे॥ 


देख के अपनी प्रेम कहानी 
     हो जाएगी दुनिया ही दीवानी। 
याद रखेगा सारा जहाँ ये 
          प्रीति हम ऐसी बो जायेंगे॥ 


खुल के होगीं अपनी मुलाकातें  
       दिल से होंगी दिल की बातें। 
बातों से गर थक गये तो,
          मिल कर हम सो जायेंगे॥ 


प्यार बिना यहाँ कौन जिया 
           तड़प तड़प तड़पा लिया।  
सुन कर अपनी प्रेम कहानी 
          वो प्यार करेंगे जो आएँगे॥ 
37 .
भुलाये नहीं भूलते हैं वो दिन बचपन के।
   बरसता था प्यार आखों से छन-छन के॥ 


मुझको अपने प्यार पर बड़ा ही गरूर था
घूरते थे खूब दर्पण में खुदको तन-तन के॥ 


ढूँढ ही लेते थे मिलने का कोई बहाना 
   बड़े गुलाम थे हम दिल की धड़कन के॥


सोचता हूँ तो फिर सोचते ही रह जाता हूँ 
     हाय कितने प्यारे थे दिन वो जीवन के॥ 


38 .
जब से दी है तूने अपनी मुहब्बत थोड़ी।
      तेरे वास्ते ही मैंने यह दुनिया ही छोड़ी॥


मैं कितना खुश हूँ यह मत पूछो मुझसे
    लाखों में एक अपनी जम रही है जोड़ी॥


उसे ही लग जाये बद्दुआ एक-दूसरे की
  जिसने भी यह मुहब्बत बीच में ही तोड़ी॥


तू माने या न माने मगर सच है यही 
   यह चुनरिया तो मैंने तेरे नाम की ओढ़ी॥


एक दूजे पर यूँ ही हम मरते जायेंगे
          भले ही आयें राहों में रोड़ा या रोड़ी॥ 


39 .
बड़ी आशा लेकर आया तेरे दर पे माँ भवानी
कुछ भी तो ठीक नहीं है मेरे घर पे माँ भवानी 


भक्ति से शांति मिलती कह गए हैं लोग ज्ञानी
मिले शांति मुझको भी ऐसा वर दे माँ भवानी 


किया आज से अर्पण तुझको जीवन ये सारा 
खिल जाए यह जीवन कुछ कर दे माँ भवानी 


सारा जीवन गुजर गया धन दौलत ही कमाते  
फिर भी घर नहीं है मेरा मुझे घर दे माँ भवानी


रही तमन्ना यही मेरी मैं उडूं असमानों में तक 
कैसे उडूं हौसलों के मुझको पर दे माँ भवानी


जीते जीते ऊब गया हूँ  हुई ख़ुशी न हासिल 
मेरे भी जीवन में खुशी अब भर दे माँ भवानी


 तुझपे मुझे सच्चा भरोसा कहता है मेरा मन
जीवन का हर कष्ट मेराअब हर ले माँ भवानी


40 .
वो मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। 
           खुदको बेक़रार कर रहे होंगे॥ 


मेरे ख्यालों में डूब-डूब कर 
         ऐसे-वैसे इजहार कर रहे होंगे॥


ये मिलन याद बन कर रहेगा 
          तेज़ अपनी धार कर रहे होंगे॥ 


अब और क्या-क्या बतलाएं
        हदें वो सारी पार कर रहे होंगे॥  


41. 
वफ़ादारी का दरवाजा हुआ बंद है। 
                 बना हुआ हर कोई जयचंद है॥ 


आज कल तंग हैं जिनसे भाभियाँ 
                   या वो सास या फिर नन्द है॥ 


कविता वही है सराहनीय आज कल 
              जिनमें बिंधा हुआ कोई छंद है॥ 


शरीर यह अपना कुछ भी नहीं 
                   आत्मा की कैद का फंद है॥ 


समझाने से भी जो न समझे
                  वो मूर्ख है या अक्लमंद है॥ 


जहाँ में वो ही जी सकता 
              रहे हौसला जिस का बुलंद है॥ 


मान मिले न मिले दाम मिले 
          लालची हो ही जाता रजामंद है॥  


गुलाम नहीं कोई तो बना डालो 
          गुलाम आज सभी की पसंद है॥ 


42 .
गुजर गया यह जीवन मेरा रोते-रोते। 
   अनचाहे रिश्तों का बोझा ढ़ोते-ढ़ोते।। 


पीछे पड़ गयी मेरे यह दुनिया दीवानी
  कब तलक छुडाऊँ पीछा सोते-सोते।।


फलते देखे पाप दिन दूने रात चौगुने
 फल पाए न पुण्य मर गया बोते-बोते।।


कई मिले हैं लोग यहाँ पर मन के मैले 
   लग जाएंगी सदियां इन्हें धोते-धोते।। 


43 .
दिल लगा के दिल हटाना नहीं चाहिए। 
        किसी का दिल दुखाना नहीं चाहिए॥ 


प्रेम जो करे आपसे उससे प्रेम करो 
       ऐसे प्रेम से मुँह फिराना नहीं चाहिए॥ 


अग़र चाहने पर भी कोई न चाहे 
    ऐसे लोगों से दिल लगाना नहीं चाहिए॥ 


मान दे अगर कोई गाना गा दीजिए 
  मान बिन गाना कभी गाना नहीं चाहिए॥ 


प्रेम में प्रेम से प्रेम पा ही जाओगे 
 प्रेम में कभी भी लडखडाना नहीं चाहिए॥ 


44 .                
दिल  चुरा कर  नज़र चुराना, ठीक नहीं होता। 
अपना बना कर फिर सताना, ठीक नहीं होता। 


निभा  सको जितने  उतने, वादे करना सीखो 
वादा  करके मुकर  जाना, ठीक नहीं  होता।


दूर  रहना ही था तो  क्यों, नज़दीक में आये 
नज़दीक आकर  दूर जाना, ठीक  नहीं होता।  


हँसा-हँसा कर दुनियां को, प्रेम पुण्य  कमाओ 
 रुला रुला कर  पाप कमाना,ठीक नहीं होता। 

मतलब  में ही बस पीछे भागे वैसे भागे दूर
सच  पूंछो तो ऐसा दीवाना ठीक नहीं होता ।


45 . 
जो नहीं हो वो ही, सब को बताते क्यों हो।
         खुद की नज़र में खुद को, गिराते क्यों हो॥ 


जो मिलना होगा, मिल जायेगा वक्त पर।
         वक्त से पहले आखिर, छटपटाते क्यों हो॥ 


असफल तुम ही नहीं, बहुत हुए हैं जहाँ में
        असफलता ,पर  दुःख को, मनाते क्यों हो॥ 


हार जीत सुख- दु ख, ये राही हैं जीवन के
        इन से हौसला लो खुद को, रुलाते क्यों हो॥


तुम्हारे सिवा, तुम्हारे साथ, कोई नहीं प्रेम 
        लड़िये जंग खुद को, बेदम बनाते क्यों हो॥ 


-प्रेम फर्रुखाबादी                                   


46 . 
शायरी तो आती नहीं पर  शायर बनना चाहता हूँ 
आशिकी तो आती नहीं आशिक बनना चाहता हूँ


किस को दिल दूं जाकर किस से दिल लूं जाकर, 
दीवानगी तो आती नहीं दीवाना बनना चाहता हूँ॥ 


हाय  ढूँढूं कहाँ मैं उसको दिल मेरा चाहे जिसको,
    मस्ती तो आती नहीं मस्ताना बनना चाहता हूँ॥ 


चाहत में जल जाऊँगा जल करके मिट जाऊँगा,  
  तड़पन तो आती नहीं परवाना बनना चाहता हूँ॥ 


                                    -प्रेम फर्रुखाबादी
47.
सोच से बनता अमीर आदमी,सोच से बनता गरीब ।
जैसी जिसकी सोच यहाँ, वैसा उसका बनता नसीब।


बताओ कैसे सतायेंगे उसको ,दुःख भला दुनिया के
प्यार मुहब्बत से रहता है,जो भी अपनों के करीब।


जिस थाली में खाए ,उस में ही छेद करे वो जालिम 
काम तो रकीबों का करे, और बनता फिरता हबीब।


दौड़ दौड़ कर फिरे बनाता ,जो सब के बिगडे काम 
इस दुनिया का नहीं है,जाने किस दुनिया का जीव।


48.
दस्तान ए दिल ग़र सुनाते तो किसे सुनाते। 
कोई अपना न था बुलाते तो किसे बुलाते॥ 


गमों के सिवा जिंदगी में कुछ भी तो नहीं
गमों से भला हम दुखाते तो किसे दुखाते। 


धरे के धरे रहे गये अरमान सब प्यार भरे 
प्यार अपना अगर लुटाते तो किसे लुटाते। 


मस्त बहारें आ के मस्त करके चली गयीं 
साथ-साथ अपने घुमाते तो किसे घुमाते। 


49.
कुछ लोग अपने घर में होते हुए भी बेघर होते हैं। 
यह तो वही जाने वो कहाँ बैठते कहाँ पर सोते हैं॥ 


प्यार से वो देखते भी तो भला कैसे अपने पति को
पति से ज्यादा तो प्यारे उनको उनके जेवर होते हैं।  


मजाल क्या कोई उनके हुश्न की तारीफ भी कर दे
उन्हें देखो तो बड़ा ही कमाल के उनके तेवर होते हैं।  


देखने वाले तो देख ही लेते हैं किसी न किसी तरह 
दीदारे हुश्न को आशिक सचमुच ही बड़े बेडर होते हैं।


50.
तेरी सदा पर सदा,देता चला जाऊँगा। 
हर मोड़ पर वफ़ा, देता चला जाऊँगा॥ 


तुझे हर ख़ुशी नसीब हो मेरे दिलवर
दिल से ऐसी दुआ, देता चला जाऊँगा॥ 


धूप में कहीं कुम्हला न जाये रूप तेरा 
रूप पर ऐसी घटा देता चला जाऊँगा॥ 


हर हालात में जीती रहो अपनी जिंदगी
जीने की हर अदा, देता चला जाऊँगा॥ 


51.
बढ़ गये हैं आपस में इतने बैर। 
जी रहे सब एक-दूजे के बगैर॥ 


जिसे भी देखिये बदहवास लगे 
किसे अपना कहे तो किसे गैर।


हर कोई अपनी ही धुन में यहाँ
कोई डूबा रहा तो कोई रहा तैर।


कौन करे परवाह यहाँ किसकी
कौन पूछे किसको दो पल ठैर।


देख रहा है हर कोई घर में टीवी
बैठ गया सिकोड़ के अपने पैर।


तन-मन से दुखी हैं सबके सब
निकलता नहीं करने कोई सैर।


उलझा है हर कोई चिंताओं में
पूँछे नहीं कोई किसी की खैर।


52.
ऐ मेरे नादान दिल तू समझता क्यों नहीं।        
 जैसे चलती दुनिया वैसे तू चलता क्यों नहीं।


गल गयी दाल पूरी अच्छी तरह से मगर       
         रह कर दाल में भी तू गलता क्यों नहीं।


हर कोई छल कर तुझसे आगे बढ़ गया     
          छले जाने पर भी तू छलता क्यों नहीं।


बात मेरी समझने की कभी कोशिश कर
      सभी फल गये मगर तू फलता क्यों नहीं।  


53.
वो हैं बहुत दूर मगर दिल के बहुत पास-पास है। 
ये खुशनसीबी दोनों की दोनों ही साथ-साथ है॥ 


उसकी खासियत एक नहीं कहो तो कई गिना दूँ 
मैं उसके लिए खास हूँऔर वो मेंरे लिए खास हैं। 


मेरे ख्यालों पर तो चलता है बस उसी का राज 
उसके राज से ही बजे जिन्दगी का हर साज है।  


उससे ही मेरा कल था उससे ही मेरा कल होगा
उसी की बदौलत ही तो फूलता-फलता आज है।  


मैं उसकी सजनी और वो मेरा साजन सलोना 
उसकी खुश्बू से ही महकता मेरा आंगन होगा। 


एक दूजे के प्यार में दिल से डूबते चले जायेंगे
मस्ती में मुस्कराता हुआ ऐसा मेरा जीवन होगा। 
54.
छोड़ कर मुझको इस तरह क्यों चल दिये यार।
कुछ कहा सुना भी नहीं क्यों निकल लिये यार॥


साथ जियेंगे साथ मरेंगे यह अरमान था हमारा
आखिर बात क्या हुई राह क्यों बदल लिये यार।  


कैसे सहूँगा गम तेरी जुदाई का जहाँ में अकेले
मेरी ख्वाहिश को कहो यूं क्यों मसल दिये यार। 


एक बार तो कहते कि अब तुम से जी भर गया
कहा कुछ किया कुछ ऐसा क्यों छल किये यार। 


55.
जब से आप मुझमें समाने लग गये।
तब से रात-दिन मुसकाने लग गये।


भा गये एक दूजे को हम दिलों जां से
दिलों में हंसीं सपने सजाने लग गये।


यह हम जानते हैं और तुम जानते हो
पास आने में कितने ज़माने लग गये।


एक-दूजे को शुक्रिया कहना ही होगा
सही बिल्कुल अपने निशाने लग गये।


अपने चर्चे तो आम हो गये हैं जहाँ में
एक दूजे को सब लोग बताने लग गये।


56.
सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा।
उसकी चाह में आँसू अपने बहाता रहा।


पर वो नहीं मिला उसे नहीं मिलना था
बस उसको याद कर के पगलाता रहा।


मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।


प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।


लोगों ने कहा ऐसी दीवानगी को छोड़ो
उनकी नहीं मानी अपनी चलाता रहा।


अपनी बातों से मैंने सबको बना दिया
पता चला कि खुद को ही बनाता रहा।


57.
कहीं मेरी जिन्दगी न यूँ ही गुजर जाये।
सोच सोच कर मुझको यही डर सताये।


दूर तक मुझे कोई अपना नहीं दिखता
कोई दिखे तो यह जिन्दगी सँवर जाये।


बड़े-बड़े अरमान हैं इस दीवाने दिल के
हाय कहीं ये मेरी धड़कन न ठहर जाये।


मन नहीं करता है तन्हा अब जीने को
आखिर यह मन जाये तो किधर जाये।


डूबे हुए हैं सब अपनी अपनी मस्ती में
किसको फ़िक्र कोई जिए या मर जाये।


58.
देखो मैं बेवफा नहीं हूँ यकीन कर लो ना।
    मुहब्बत से जिन्दगी को हँसीन कर लो ना॥


कब तक यूँ ही धोखे खाते रहोगे यार तुम
       थोड़ा अपने आप को जहीन कर लो ना॥


ये जिन्दगी क्या है गर समझना चाहो तुम
   अपनी सोच समझ को महीन कर लो ना॥


बनजारों की तरह जीना भी कोई जीना
       अपने नाम कहीं जरा जमीन कर लो ना॥ 
59.
मेरी तरह मिलने की कभी फरियाद कर।
जैसे मैं करता वैसे तू भी कभी याद कर॥


बताओ कब तक सहनी पड़ेगी ये जुदाई,
मुलाकात कर इस से कभी आज़ाद कर॥


मुझे उलझाकर क्यों खुद भी उलझ गये
छोड़ के गिले शिकवे कभी आबाद कर॥


पिछले शुभ कर्मों का फल है जिन्दगी ये
शाद रख प्रिये इसे न कभी नाशाद कर॥ 


60.
तुम क्यों हुए मुझ पर फ़िदा,
                      यह तुम जानो।
फूल क्यों तेरे दिल का खिला,
                       यह तुम जानो॥ 


शिकायत भरी नज़रों से मुझे 
                        देखते रहते हो, 
करते रहते क्यों सबसे गिला
                       यह तुम जानो॥ 


61.
चलता आजकल कोई रूल नहीं। 
इसीलिए व्यवस्था अनुकूल नहीं॥  


भूल कोई अपनी भूल नहीँ माने 
काम भी करे कोई माकूल नहीं।  


है परेशान हर कोई हर किसी से 
क्योंकि सुविधायें कहीं मूल नहीं। 


सुनने से पहले ही हो जाते गरम 
बोलो जिससे भी वही कूल नहीं।   


62..
पाने की चाह में खोया बहुत।
        हंसने की चाह में रोया बहुत॥ 


सागर में मोती मिल ही जायेंगे 
    इसी लिए खुद को डुबोया बहुत॥ 


इंसानियत कहीं बिखर न जाये
       प्यार में सब को पिरोया बहुत॥ 


उसकी जुदाई अब सही न जाए 
   याद में आँखों को भिगोया बहुत॥ 


महके जहां फूलों की खुशबू से
     फूलों को जीवन में बोया बहुत॥ 


ठुकरा कर कहीं वो चले न जायें 
  इस लिए उनके नखरे ढोया बहुत॥ 


63.
उन्हीं से उन्हीं का,
           शिकवा करने चला हूँ।  
आज खुद ही अपनी ,
                मौत मरने चला हूँ॥  


कहते हैं कहने से,
               मन हलका हो जाये  
कह नहीं पाया शायद 
             इसी लिए मैं जला हूँ।


पीट कर वक्त ने,
               मुझे पत्ता बना दिया
जैसे ढ़ाला वक्त ने,
                  वैसे ही मैं ढ़ला हूँ। 


क्या-क्या रंग नहीं 
               दिखलाये जिंदगी ने 
ठोकरें खा-खा कर 
                दिन-रात मैं पला हूँ।  


मत पूँछिये कि खाक 
             कहाँ कहाँ नहीं छानी 
तब कहीं ज़ाकर मैं 
              इतना फूला-फला हूँ। 
64.
कर लो यकींन मुझ पर
           प्यार मेरा झूठा नहीं है।  
इतना सताया फिर भी देखो 
         ऐतबार मेरा टूटा नहीं है॥  


कसम तेरी तू क्या जाने 
        हाय कितना तुझे मैं चाहूँ। 
 हर पल तेरी याद आये 
            कोई पल छूटा नहीं है॥ 


एक दिन वो आएगा जब 
     तुम महसूस करोगी मुझको। 
मुझको पता है मेरा मुकद्दर 
           अब तक रूठा नहीं है॥ 


जब तक सांस रहेगी मेरी 
        चाहा तुम्हें चाहते ही रहेंगे। 
देखे तो लाखों हसीं पर 
       तुझसा कोई सूझा नहीं है॥  


तुम ही मेरी पहली चाहत 
           कैसे मैं भूल जाऊँ तुम्हें।    
 प्यार मेरा है एक फुलवारी 
            प्यार मेरा बूटा नहीं है॥ 


                 -प्रेम फर्रुखाबादी 


65. 
प्यार का ऐसा असर हुआ। 
      तन मन धन नज़र सब हुआ॥ 


न होश रहा खुदका न जग का
     प्यार में तेरे यूँ तर- बतर हुआ॥ 


पता ही न चला मुझे प्यार में 
      कब रात हुई कब सहर हुआ॥ 


प्यार का नशा एक ऐसा नशा  
      न जाने कब मैं खंडहर हुआ॥ 


किसी को यहाँ पर मिलन तो 
    किसी को हासिल जहर हुआ॥ 


अब आपको क्या बताएं हम
    दिल मदहोश इस कदर हुआ॥