बुधवार, 6 जून 2018

मेरी जिंदगी में कोई नहीं


मेरी जिंदगी में कोई नहीं।
फिर भी कभी रोई नहीं।। 

डोरे तो कइयों डाले मगर 
कभी किसी में खोई नहीं। 

खड़ी रही सच के साथ 
झूठ की फसल बोई नहीं। 

हलकी रही सदा मन से 
मन पर बोझ ढ़ोई नहीं। 

जागती रही मैं अक्ल से 
भूल से कभी सोई नहीं। 

      - प्रेम फर्रुखाबादी 

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

सत्य और असत्य के युध्द हमेशा ही चले हैं


सत्य और असत्य के युध्द हमेशा ही चले हैं
पालक हैं हम सब हमारी बदौलत ही पले हैं।

जीना चाहे हर कोई अपनी जिंदगी को यहाँ
मगर जीने के वास्ते सब सब को ही छले हैं।

हम ही हम जियेंगे यहाँ और दूजा कोई नहीं
इसी भाव के संग इंसान इंसान से ही जले हैं। 

ज्ञान की धार को तेज़ ही करते रहना चाहिए
जीवन का हर दुःख अक्सर ज्ञान से ही टले हैं।

नीचे गिरा दिया करती हैं जरूरतें इंसान को 
मगर जरूरतों में  सब सब के साथ ही ढले हैं।

लोभ लालच से तो सदा दूर ही रहना चाहिए 
इस में गिर कर हर इंसान खुद को ही दले हैं।

बस यही भावना हित कर जियो और जीने दो 
इंसान से इंसान यहाँ इसी भाव से ही फले हैं।

हर कोई इंसान बुरा नहीं हुआ करता है मित्र 
जो दूसरे का हित चाहें होते बस वही भले हैं। 



तुम्हें पाया तो पाया सब आज...



तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
हुआ खुद पर खुद को नाज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

हाल बड़ा बेहाल था मेरा, 
जीवन जीना मुहाल था मेरा 
गया दिल से ग़मों का राज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

पूँछ रही थी सखियाँ मेरी, 
तरस रही थी अखियां मेरी 
फिर छिड़ गया दिल का साज़,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

धूप गयी अब आ गयी छाँव,
पड़ते नहीं हैं जमीं पर पाँव 
मेरे सब कुछ तुम्हीं हो सरताज,
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 
तुम्हें  पाया तो पाया सब आज, 
ख़ुशी से मेरा दिल उछला 

प्रेम फ़र्रुखाबादी 

पैरोडी female - मेरे सपनो की रानी कब आएगी तू



पैरोडी female - 
मेरे  सपनों की रानी कब आएगी तू 

मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम  
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ -2 

तुमने किया था ,वादा वफ़ा का 
अपना कहा था ,अपना बना के -2 
निकला झूठा तेरा वादा कब आओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

याद सताये, दिल घबराये  
समझ न आये ,क्या मैं  करूँ-2 
और कितना मुझे तरसाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

बहक गयी गर , दिल से दिलवर 
फिर मत कहना, क्या हो गया -2 
तब खुद ही खुद को रुलाओगे तुम 
मेरे सपनों के राजा कब आओगे तुम
करने मुझे तरोताज़ा कब आओगे तुम 
बैठी खोले दरवाज़ा कब आओगे तुम 
चले आओ  तुम चले आओ

प्रेम फ़र्रुखाबादी 








मंगलवार, 2 जनवरी 2018

चूड़ी पहनन को सखी, इक दिन गयी बजार


चूड़ी पहनन को सखी, इक दिन गयी बजार। 
मसलते - मसलते हाथ, मस्त हुआ मनिहार॥ 
मस्त हुआ मनिहार,मस्त तो मैं भी कम न थी। 
कुछ कहने की सखी,  दोनों में ही दम न थी॥ 
कहे प्रेम कविराय, तन मन मिल कर झंनाये। 
बड़ी मुश्किल से तब , खुद को संभाल पाये॥ 
                              

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

जहां चाह वहीं पर राह है प्यारे




जहाँ चाह वहीं पर राह है प्यारे
दिल में क्यों फिर दाह है प्यारे।

जो कर के दिखायें कमाल कोई
होती उन्हीं की वाह वाह है प्यारे

जिसने सीखा ही नहीं हुनर कोई

निकलती उन्हीं की आह है प्यारे

कहा मान लो कभी अपनों का भी
वरना होती जिंदगी तबाह है प्यारे

बहुत ताकत हुआ करती
प्यार में
प्यार सब से बड़ी पनाह है प्यारे

संभाल सको तो संभालो खुदको
जिंदगी तो बड़ी ही अथाह है प्यारे

जो समझ लिया इस जिंदगी को

वही तो यहाँ पर शहंशाह है प्यारे।



कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ

कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ ।
होगा वही जो किस्मत में लिखा हुआ ।।
भले ही पकाये कोई कहीं भी रख कर
फल तो वही पका है जो पेड़ से चुआ।।  

दिल चाहे वो मुझे मिल जाए


दिल चाहे वो मुझे मिल जाए
तो जिंदगी फूल सी खिल जाए।

प्यारा दोनों का मेल होगा

न्यारा दोनों का खेल होगा
देखे तो सारा जमाना हिल जाए।

तन्हा और  जिया न जाय

गम को और पिया न जाय
इनायत हो जख्में दिल सिल जाए।

कोशिश तो अपनी जारी रहेगी

दिल को वो बड़ी प्यारी रहेगी
भले ही कोशिश में दिल छिल जाए। 

शनिवार, 2 सितंबर 2017

मन को बस में राखिये,करिये अपना काम


मन को बस में राखिये,करिये अपना काम।
भोजन कर आराम से, भजिये सीता राम।।
भजिये  सीता राम, जीवन  खुशहाल होगा।
तन-मन हमेशा ही,एक सुर मयताल होगा।।
कहे प्रेम कविराय,सन्देश यही जन-जन को।
करिये अपना काम,राखिये बस में मन को।।
                                               -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

बुधवार, 19 जुलाई 2017

उसकी हर बात मैंने कबूल की


उसकी हर बात मैंने कबूल की,
शायद यही मैंने बड़ी भूल की
जिंदगी उसकी मैं गुलाब करता रहा,
मगर मेरी जिंदगी उसने बबूल की।

दिल की कली कोई खिली नहीं,

जैसी चाही जिंदगी वैसी मिली नहीं
आसान नहीं है दुनियां झेल पाना,
झेली बहुत मगर मुझसे झिली नहीं।

जीवन के सुख दुःख से यही लगे ,

स्वर्ग भी यहीं है नर्क भी यहीं है
भले कोई मेरी बात माने या माने,
जो कुछ भी है वो सब कुछ यहीं है।  
                            -प्रेम फर्रुखाबादी