शनिवार, 26 दिसंबर 2009

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही


उन बिन काटे न कटी जागी मैं सारी रात 
वो जो होते साथ तो बन जाती मेरी बात 

हाय ! हाय!  हाय! 
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
सुलझे न सुलझी ये उलझन मेरी य उलझन मेरी 
मार कर अपने मन को तरसती रही तरसती रही 
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही

अकेले में जीना जीना है क्या-2
जीना नहीं यह जीना है सजा-2
कहते बने न यह मन की व्यथा 
मन की व्यथा ही है मेरी कथा-2
मैं ही जानूँ मुझे कैसा लगा 
तन-मन से ही धड़कती रही,बहकती रही
पिया मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही

हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ अब तुम्हें उस तरह -२
कोशिश में कमी कोई रखी नहीं 
कोशिश तो की मैंने हर एक तरह-2 
समझ से परे थी बेचैनी मेरी-2
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही

आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर को भी मैं सो न सकी -२
पगला गयी हूँ मैं उनके बिना 
मारी गयी हो जैसे मेरी मती-2
हालत बेकाबू मेरी होती गयी 
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही

अब आये अब करती रही -२
दरवाजे को ही तकती रही- २
कुछ भी समझ में आया नहीं 
बस खुद को ही छलती रही-2 
धक धक दिल मेरा करता रहा
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही

जैसा हुआ कभी वैसा न हो-२ 
तंग कोई मेरे जैसा न हो-२
अब क्या कहें क्या न कहें  
संग किसी के ऐसा न हो-2
अगन की चुभन घुटन से भरी
मन ही मन में सिकुड़ती रही,उखड़ती रही
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही
रात भर मैं करवट बदलती रही,मचलती रही




बुधवार, 9 दिसंबर 2009

जय हो पाट बाबा की (जबलपुर वाले)


मन की खुशियाँ मिलें, पाट बाबा के दरबार में।
मन की कलियाँ खिलें, पाट बाबा के दरबार में।


सच्चे मन से जिसने जो माँगा
बाबा ने वो उसको दिया है
दुःख सारे ही लेकर उसके
सुख - सागर को दिया है
दुखिया सुखिया बनें
, पाट बाबा के दरबार में।


भक्तों का हरदम ही यहाँ पर
खूब ताँता लगा रहता है
बड़ा ही दयालू है यह बाबा
हर कोई यह कहता है
आओ मिलके चलें, पाट बाबा के दरबार में।


बाबा के चरणों में हरदम
जिसका ध्यान लगा है
उस पर कृपा हुई बाबा की
सोया भाग जगा है
अर्जी सबकी लगें, पाट बाबा के दरबार में।



शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

मैया मैहर वाली


मैया मैहर वाली ,मुझपे महर करो
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।

विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा

समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।


काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो

द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

छोड़ दिया रे उसने मुझको जाने क्या सोचकर


छोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
तोड़ दिया रे, उसने दिलको,जाने क्या सोचकर।

ख्वाबों में बस वो ही वो, मुझको दिखती है
ख्यालों में बस वो ही वो
, हरदम खिलती है
मोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।

दिल ही दिल में दिल उससे, बातें करता है
मन चाहे ढंग से उससे, मुलाकातें करता है
जोड़ दिया रे, गम से मुझको, जाने क्या सोचकर।

उसके बगैर जीने की, सोच नहीं सकता हूँ
किसी तरह मैं खुदको, रोक नहीं सकता हूँ
झिंझोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।

गुरुवार, 26 नवंबर 2009

जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ


इस गीत की रेकार्डिंग भी हो चुकी है
मन की जिन्दगी, किसको मिली यहाँ
जिसको मिली यहाँ,खुश वो भी नहीं यहाँ

जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
कभी खुदका गम
कभी जग का गम
पीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

एक नहीं कई एक मिलेंगे
दिल को दुखाने वाले
झुकने वाले नहीं मिलेंगे
मिलेंगे झुकाने वाले
चाक गरेबां हो जाए तो
सींते चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

साथ नहीं कोई देता है
देखो प्यारे यहाँ
कहने को सब साथी हैं
देखो सारे यहाँ
जितनी साँसे मिली हैं प्यारे
खींचे चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

उतना इकठ्ठा करो कि
जिससे जिन्दगी पलती रहे
प्यार- मोहब्बत से मिलके
जिन्दगी चलती रहे
रीते ही हम आये हैं
रीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले
जाएँ

रविवार, 22 नवंबर 2009

जैसे ही मैंने देखा तुझे, दिल यह मचल गया



जैसे ही देखा तुझक़ो 
दिल मेरा मचल गया।
पल में ही दीवाना 
दिल मेरा बहल गया।

पूरी हुई दिल की, 
जो भी आस थी
बस तेरी ही तेरी, 
मुझको तलाश थी
बेकाबू था दिल मेरा 
तुझसे ही संभल गया।

होती है  दीवाने  की  
कोई न कोई अरमां
होती है परवाने की 
कोई न कोई शमां
पाकर तुझे दिल का 
ही अरमां निकल गया।






शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

गर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते


गर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते
लोगों को रुलाते भी तब भी वो न रोते।
ये कमीशन खाने के लिए खूब उकसाते
परसेंट से खाते हैं और सबको खिलाते।

जब इच्छा होती तब अपने दफ्तर जाते
जब इच्छा होती तब वो अपने घर आते।
ये
कभी डरते नहीं मगर सभी को डराते 
हाँ हजूरी करते नहीं हर किसी से कराते।

हमेशा ही सबको अपना रुतबा दिखाते
गर कोई न देखे तो 
उसे सबक सिखाते।

सरकारी अफसरों के तो मजे ही मजे हैं
क्योंकि मजे करने में बिल्कुल 
ही मजे हैं।


जिम्मेदारी लेते बहुत कम पर देते जादा
ये अफसर नहीं 
हैं आज के ये महाराजा।

प्रजातंत्र में अफसरों को पूरी आजादी है
कानून को तोड़ने मरोड़ने के ये आदी हैं।

जो भी इन के मन भाता ये वही करते हैं
फायदे की बातों पे ही ध्यान 
को धरते हैं।

कहते हैं कि जनता समस्याएं नेता जाने
वो  
ही जाते जनता के आगे हाथ फैलाने।


अफसर जनता के सामने कभी न जायें
फिर उनके लिए 
वो तकलीफ क्यों उठायें।

उनका सहारा उनकी किस्मत उनका खुदा
सीनियर अफसरों ने 
ये  विदाई में कहा है।


सरकारी धन खाने में ये अफसर माहिर हैं
ओखली के भीतर चोट के मगर  बाहिर हैं।
इनसे पंगा लेना मतलब 
आ बैल मुझे मार

बस जपा करें मंत्र जय हो प्रजातंत्र सरकार। 

बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

जैसा बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे


जैसा बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे।
दिल में ग़र होगा प्यार तो ही बाँटोगे॥

हुनर है तभी कुछ कर पाओगे वरना
उमर भर किसी के तलवे ही चाटोगे।

पहले ख़ुद सुधर जाओ फ़िर सुधारो
सुधरे बिना किसी को कैसे सुधारोगे।

दुश्मन दोस्त कौन समझना मुश्किल
ज्ञान बिना दुश्मन दोस्त कैसे छांटोगे।

अगर दुश्मनी निभाने से फुर्सत मिले
तब ही दिल से दिल की दूरी पाटोगे।




रविवार, 18 अक्तूबर 2009

ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा


ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा
तेरी हरकतों से हो न,जीना मुश्किल मेरा

दिल मेरे, सुन जरा, मत हो,यूँ फ़िदा।

जिसको भी तू देखे,हो जाए क्यों दीवाना
हाय,तेरी खातिर मुझको,पड़ता घबराना
मान जा मेरा कहना,सच कहता हूँ वरना
कहीं तेरी वजह 
न हो जाए कोई लफडा। 
दिल मेरे, सुन जरा, मत हो यूँ फ़िदा।

समझा समझा के मैं,तुझको थक गया हूँ
तेरी कसम मैं तो,बिल्कुल ही पक गया हूँ
क्या हैं तेरे इरादे,तू मुझको यह बतला दे
बहुत सता लिया तूने,अब और न सता।
 

दिल मेरे, सुन जरा, मत हो,यूँ फ़िदा












शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

दिल से जो होता है, जग में सभी का

पैरोडी

है दुनियां उसी की जमाना उसी का...


दिल से जो होता है, जग में  सभी का।

उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का॥


भला जो करेगा, भला उसका होगा 

उसके  पीछे  पीछे, हर  कोई  होगा 

आदमी वही करे जो,भला आदमी का।

उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का।


गैरों के दुःख को, जो अपना बना ले

प्यार  से  बढ़  कर, गले  से लगा ले

करे  दूर दुःख जो, हर एक  दुखी का।

उसको ही कहते हैं,फ़रिश्ता जमीं का।


जो नफ़रत मिटा के,मुहब्बत सिखा दे

मुहब्बत से सबको, मुहब्बत सिखा दे 

चखा  दे  मज़ा  जो, इस  जिंदगी का।

उसको ही कहते हैं, फ़रिश्ता जमीं का।








मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में


इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में
तेरी खुश्बू सी लगे मेरी सांसों में॥ 

खाने को खाया है मीठा तो बहुत 

उतना कहाँ जितना तेरी बातों में

दिन तो गुजर ही जाते जैसे-तैसे
पर खले जुदाई तेरी मेरी रातों में

कुछ भी नहीं सुहाता है बगैर तेरे 
लेकर देखूं तसवीर तेरी हाथों में

लगा हुआ है पहरा चारों तरफ़ से 
जीता मैं ज्यों जीभ मेरी दाँतों में। 

तेरे जैसा नहीं होगा जादूगर कोई
दिल मेरा गया तेरी मुला
कातों में













रविवार, 4 अक्तूबर 2009

उनसे दो बातें क्या करली उनका दम घुटने लगा


उनसे दो बातें क्या कर ली 

उनका तो दम ही घुटने लगा ।
पल 
भर में ही उन्हें लगा कि 
जैसे सब कुछ ही लुटने लगा ।

तारीफ तो इस लिए की जाती 

कि आत्मीयता बनी रहे आपस में
इसका मतलब यह नहीं कि 
जमाना 
उसके आगे तन-मन से झुकने लगा।

वो बहुत ही खूबसूरत हैं शायद 

किसी ने उनसे यह कह दिया
फ़िर क्या था फ़िर तो चाँद 
बदली में जा के छुपने लगा।

एक से एक पड़े 
हैं खूबसूरत 
चेहरे इस खूबसूरत जहाँ में
हाय जाने क्यों हर कोई शख्श 
बेताबी से उनकी ओर मुड़ने लगा।

शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

जब जब मैंने सच बोला तो अपनों से हम दूर हुए


जब जब मैंने सच बोला अपनों से हम दूर हुए।
अपनों से जो सपने देखे सपने वो सब चूर हुए॥ 

जब भी जिसकी पड़ी जरूरत ले गए वो घर से
मुझको जरूरत पड़ी तो भोलेपन से मजबूर हुए।

साथ में बैठना उठना था जब थे हालात के मारे
फिरने लगे वो मुझसे ज्यों दौलत से भरपूर हुए।

एक दूजे के बिना दोनों कभी दूर नहीं रह पाए 
नज़रों से मुझे गिरा दिया जब से वो मशहूर हुए।

हम न करते तारीफ तो पता ही नहीं चल पाता
ज्यों ही पता लगा हम से दुनिया की वो हूर हुए। 


रविवार, 27 सितंबर 2009

फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी


फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी

बना के क्यों बिगाडा रे, .....

दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया  रे दीवाना
ओ दीवाने ओ दीवाने -२
मुझको रिझा के,अपना बना के,
बनाया रे  दीवाना ओ दीवाने  ओ दीवाने

दिल में मेरे दिलवर बन के, दिल से लगाया मुझको
प्यार अगर ये  झूठा था तो, क्यों बहलाया दिल को
कसमें खिला के, ख़ुद भी खा के,
दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया  रे दीवाना
ओ दीवाने  ओ दीवाने-2

गुरुवार, 24 सितंबर 2009

विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान


विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
शाम सवेरे मैं पूजा करूँगा धरूँगा तेरा ध्यान॥

मूरख ज्ञानी बन जाता है
जाये जहाँ आदर पाता है
मुझको भी मिले सम्मान।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

अंधकार से मुझको उबारो
भवसागर से मुझको तारो
मेरा भी करो कल्याण।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

तेरी शरण में जो भी आया
जो भी माँगा वो ही पाया
दो मुझको भी वरदान।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

सोमवार, 21 सितंबर 2009

जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया



जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया । आज मैं यह दोहा आप के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह २४//१९७६ की बात है जब मैंने पहली बार कवि सम्मलेन देखा व सुना था । इस दोहे ने मेरा जीवन ही बदल दिया । भानु प्रताप बुंदेला जी ने यह दोहा सुनाया था।

एक पनिहारिन कुए पर पानी भरने जाती है और दोहा वहीं से शुरू होता है

पानी ऐंचत झुकी कुआ में,

झलके अंग अनोखे।
मानो जमुना जी में हों,

गुम्बद ताजमहल के ।

आप सब भी इस दोहे का आनंद लें.धन्यवाद !!



रविवार, 20 सितंबर 2009

आओ हम डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें


आओ हम डांस करें मिलके ख़ुदको एडवांस करें।
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।

आँखों में आँखों डालो, दिलवर दिल को उछालो
मस्ती में मौज मना लो, बांहों में बांहों को डालो
बिन तेरे क्या है जीना, सुन सुन ओ मेरी हंसीना
होगा इन आँखों से पीना, होगा इन बांहों में जीना
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।

देखो छेड़ो न मुझको, कुछ कुछ होता है मुझको
क्या कुछ होता है तुझको, बांहों में ले लो मुझको
बदन यह गोरा गोरा,देखो पगलाये यह मन मोरा
चूमें हम थोड़ा थोड़ा, मिलके झूमें थोड़ा थोडा़
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।

देखो सब झूम रहे हैं, एक दूजे को चूम रहे है
मस्ती में कूक रहे हैं, पर हम क्यों चूक रहे हैं
तुझसा ना कोई मिला,मिला तो दिल यह खिला
दिल में ना कोई गिला, मस्ती में पी और पिला
मौसम हँसीनहै दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।

मेरे सपनों के राजा, थोडा और करीब आ जा
मस्ती में मुझ पर छा जा, मुझसे अब दूर ना जा
होंगे न हम कभी जुदा, तुझसे आने लगा मजा
भायी हर तेरी अदा, चाहे मिले अब कोई सजा
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।

मुझको संभालो मैं गयी, देखो पागल दीवानी हुई
कुछ भी अब दिखता नहीं, मन मारे चुकता नहीं
मेरे सपनों की रानी, हाय तेरी यह मस्त जवानी
होने लगी पानी पानी, हाय छाने लगी रवानी
मौसम हँसीन है दिल भी रंगीन है आओ रोमांस करें।






हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की


हाय तेरे रूप ने हालत मेरी ख़राब की।
जानलेवा हर अदा लगे तेरे शबाव की॥ 

देखा कर यूँ मुझे प्यार से जाने जिगर
जिन्दगी ये मेरी तो तुमने लाजवाब की।

तरासा था मैंने जिसे कभी ख्वाबों में
 बस वही तुम तमन्ना हो मेरे ख्वाब की।

जब से मैंने पी ली तेरी इन आँखों से
 जरूरत क्या अब पड़ी मुझे शराब की।

जिन्दगी यूँ ही कट जाये मेरी मस्ती में
 बस बनी रहे यूँ ही इनायत जनाब की।


शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

पाकर मन का मोहना


पा कर मन का मोहना कैसे हो खुदको रोकना
कौन सोच में डूबे तुम प्यार में खुदको झोकना

जब से देखा है उसको होश नहीं है अब मुझको
सच कहूँ ऐसे में मुझे भाये न किसी का टोकना। 

ख़ुद में ही मैं लगी डूबने ख़ुदको ही मैं लगी ढूँढने
डूबी गयी गहरी प्यार में भाये न किसी से बोलना।

उसकी शरण में जब से गई उसकी हो के रह गई
भाने लगा अब तो मन को साथ में उसके डोलना।

वही दर्द दें वो ही दवा करें


वो ही दर्द दें  वही दवा करें।  
आये कोई  बताए क्या करें॥ 

तारीफ  अपनी न भाये उन्हें 
फिर रोज ही क्यों सजा करें।  

सिर्फ मेरे  ही होकर रहे वो 
मेरी लिए दिल  से दुआ करें।   

बार-बार ही  कहा उनसे मैंने 
आप खूबसूरत  हैं छुपा करें।  

-प्रेम फर्रुखाबादी

गुरुवार, 17 सितंबर 2009

ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है


ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है।
जो नहीं आयेगा उसका इंतज़ार क्यों होता है।

जिसने यूँ ही तड़पने के लिए छोड़ दिया मुझे
ऐसे दिलवर पर तुझको ऐतबार क्यों होता है।

वफ़ा शब्द का जिनको मायने तक पता नहीं
जाने वफादारों में उनका शुमार क्यों होता है।

मैंने तो दिलो जान से उनसे वफ़ा निभाई थी
मुझ सा वफादार फ़िर नागवार क्यों होता है।

शनिवार, 12 सितंबर 2009

दोस्त दिल की मजबूरी मेरी भूल बन कर रह गयी


दोस्त दिल की मजबूरी मेरी भूल बन कर रह गयी। 
देखते ही देखते सपनों की दुनियाँ धम से ढह गयी॥ 

उनकी सोच थी कुछ और मेरी सोच थी कुछ और
सोच से सोच टकरायी दोनों की जिन्दगी बह गयी।

बिना फैसलों के दुनियाँ में कुछ हासिल नहीं होता
यह मेरी किस्मत मुझसे रुला रुला करके कह गयी।

अक्सर दिल बहला लेता हूँ उसके हसीं ख्यालों से
मैं नहीं सह पाया उसकी जुदाई मगर वो सह गयी।

बुधवार, 9 सितंबर 2009

कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है


कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है।

जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है॥

अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त
जीना उसका जीना जो रोशनी बाँटता है।

दुष्ट तो
 किसी की भी ले सकता है जान 
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है।

किसी को रुलाये वो बात 
किस काम की 
उसको सराहो जो सबको हँसी बाँटता है।

बुझदिल लोग ही जिया करते हैं उदासी में
दिलदार 
वो जो सबको ताजगी बाँटता है।

रविवार, 6 सितंबर 2009

माँ की लोरी प्यारी बेटी के लिए

चंदा की चाँदनी जैसी, मेरे घर में तू आयी है
साथ में अपने सारे जहाँ की, खुशियाँ लायी है

मारे खुशी के झूमें, मेरा सारा तन-मन
तुझको पा के ऐसे लगे, धन्य हुआ मेरा जीवन
सूने जीवन में आ के तूने,आशा की ज्योति जलायी है

मेरे मन-मन्दिर में तू , एक प्यारी सी मूरत है
तेरी सूरत में तो मुझको, दिखती अपनी सूरत है
देखके तेरा रूप सलोना, दिल की कली मुसकायी है

जीवन जीवन मेरा पा के तुझसी गुड़िया 
मैं तो कहूँ सबको मिले, तुझसी प्यारी गुड़िया
तेरे आने से जीवन में, खुशहाली सी छायी है

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

ये गोरे गोरे गाल तेरे लिए


ये गोरे-गोरे गाल तेरे लिए
ये काले-काले बाल तेरे लिए

तू है मेरा और मैं हूँ तेरी
ये प्यारे सारा माल लिए

ये गोरे-गोरे गाल तेरे लिए 

तेरे लिए मैं खुदको सजाती हूँ
जैसा तू चाहे वैसा बनाती हूँ
तेरी मस्ती में ही मदमाती हूँ
ये मस्ती भरी चाल तेरे लिए

ये गोरे-गोरे गाल तेरे लिए 

तुझसे ही मेरी खुशियाँ जांना
तुझसे ही मेरी दुनियाँ जांना
मैं 
 हूँ दीवानी तू है दीवाना
दीवानी बेहाल तेरे लिए

ये गोरे-गोरे गाल तेरे लिए 

मेरे दिल का तू है शहजादा
मैं तेरी रानी तू मेरा राजा
आ जा मेरे दिल में समाजा

दूँगी खुदको उछाल तेरे लिए
ये गोरे-गोरे गाल तेरे लिए 





मंगलवार, 1 सितंबर 2009

जीवन में तुमसे ही हैं फूल झरे


जीवन में तुमसे ही हैं फूल झरे।
सूरत तेरी आँखों से टारे न टरे॥

कहाँ छुप गए कह कर मिलेंगे 
दिल कब से तेरा इंतज़ार करे।

साथ तेरे जो देखे हैं ख्वाब मैंने
ऐसा न हो रह जायें धरे के धरे।

बिन तेरे कैसे होगा जीना मेरा
तेरे बगैर जिन्दगी तारे न तरे।

दुनिया मेरी रंगीन है तुमसे ही
जिन्दगी लगे ही न तुमसे परे।

मेरे सामने ही रहा करो जानम
तेरी दूरियों से दिल बहुत डरे।

सोमवार, 31 अगस्त 2009

प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं


प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं।
या फ़िर वो मुझसे अब ऊब गए हैं॥

क्या सोचा था और क्या हो गया
लगता फैसला करके चूक गए हैं।

और कहीं दिल भी तो नहीं लगता
उनकी खातिर तन मन टूट गए हैं।

अब क्या प्यार नसीब होगा उनका
यह सोच के ग़मों में हम डूब गए हैं।

कुछ भी कहना अब मुमकिन नहीं
या तो हम लुटे हैं या वो लूट गए हैं।

शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

मुझे चढ़ गयो प्यार का बुखार


मुझे चढ़ गयो प्यार का बुखार,
उतारो  करो जल्दी बलमा
देखो अब और न करो बेकरार,
उतारो करो जल्दी बलमा।

हीर   के राँझे   को लाओ
लैला के  मजनूँ को  लाओ
जाओ जाओ जल्दी जाओ
अब न बिल्कुल देर लगाओ
देखो  देर न  करो सरकार,
उतारो   करो जल्दी बलमा।

तड़प तड़प के मरि न जाऊं
ऐसे  में कुछ  करि न जाऊं
किसी  तरह में चैन न पाऊँ
कहाँ तक मैं ख़ुदको तडपाऊँ 
यूँ  ही खड़े  न रहो लाचार,
उतारो   करो जल्दी  बलमा।

तन-मन मेरा जलने लगा है
मति मेरी  यह हरने लगा है
सोच-सोच कर डरने लगा है
अपने आप ही मरने लगा है
मेरा जीना ही हुआ है दुश्वार 
उतारो   करो जल्दी बलमा।