गुरुवार, 28 जनवरी 2010

इस दुनिया में छोड़ जाओ प्यारे ऐसे अपने निशां


इस दुनियां में छोड़के जाओ ऐसे अपने निशां।
जिन पर चलके खुश हो दुनियां का हर इन्सां॥ 

प्यार की प्यारे फसल उगाओ चारों दिशाओं में
प्यार ही प्यार लहराये कुछ भी नजर आये ना।

देखो महापुरुषों के हैं जीवन त्याग से भरे हुए
मानवता की खातिर कर गये जीवन को कुर्बां।

वो जीवन क्या जीवन जिसे याद करे न कोई
जीवन वो जीवन जिसे याद करे सारा ये जहाँ।

एक दिन जाना होगा सबको छोड़ के ये दुनियां
जाना है तो ऐसे जाओ बन हर दिल के महमां।

बुधवार, 20 जनवरी 2010

हम तुम कितने पागल थे अब तक मुझको याद है


वो प्यार तेरा मस्ती भरा अब तक मुझको याद है।
हम तुम कितने पागल थे अब तक मुझको याद है॥

एक दूजे के हुए थे हम पहली ही मुलाकात में
चाहत का वो हसीं लम्हा अब तक मुझको याद है।

आँखों में मस्ती छायी थी और दिल भी धड़के थे
हाये वो दिल की धड़कन अब तक मुझको याद है।

एक दूजे को देखे बिना हमें चैंन नहीं आता था
बेताबी का दौर सनम वो अब तक मुझको याद है। 

रविवार, 17 जनवरी 2010

लाखों में हँसीं जानम चेहरा यह तुम्हारा


लाखों में हँसीं जानम चेहरा यह तुम्हारा।
तभी तो दिल ने तुझको दिल में उतारा।

मौसम की तो तुम्हें दाद ही देनी चाहिए
प्यार से
जिसने तुम्हारा रूप ये निखारा।

पहली ही नज़र में मैं तो होश गवां बैठा
पता ही नहीं चला दिल तुझपे कब हारा।

हर अदा तुम्हारी लुभाती है दिल को प्रिये
लगता यह अंदाज़ तेरा सबसे ही न्यारा

ख्वाहिश है दिल की ये रहूँ तेरे आस पास

इस तरह तूने मुझे दिलो-दिमाग से मारा

शनिवार, 9 जनवरी 2010

दूरी तेरी अब सही नहीं जाती

दूरी तेरी अब सही नहीं जाती।
बात दिल की कही नहीं जाती॥ 
समझ सको तो समझ जाओ न 
देखो मुझे अब और तरसाओ न॥

जो भी देखता पागल कहता है
चाह में मुझे घायल समझता है।
जो भी समझे समझे ये जमाना
मुश्किल बड़ा बिन तेरे जी पाना।

किसी से लेता कोई भी सलाह
न सुनता न करता कोई परवाह। 
दिल की बात को दबाये रहता हूँ
दिल ही जानता कैसे सहता हूँ।

न जाने तुम क्यों खफा हो गए
कहो प्रिये क्यों बेवफा हो गए।
मेरा कसूर बताओ कम से कम
कहीं निकल ना जाये मेरा दम।

बहुत हो चुका मान भी जाओ
हालत दिल की जान भी जाओ।
माफ़ करने वाले बहुत बड़े होते 
माफ़ी देने से वो छोटे नहीं होते।

दूरी तेरी अब सही नहीं जाती।
बात दिल की कही नहीं जाती॥ 
समझ सको तो समझ जाओ न 
देखो मुझे अब और तरसाओ न॥