मंगलवार, 30 जून 2009

अपने आप से अपना मुख क्यों मोड़ने लगे हो



अपने आपसे अपना मुख  क्यों  मोड़ने लगे हो।
दुनिया का दुःख  जीवन  में क्यों भोगने लगे हो॥ 

कम  से कम  जो  बोले  लगता  वही  है  प्यारा
यह  जान  कर  भी ज्यादा  क्यों  बोलने लगे हो॥

देखो रिश्तों को कभी भी गहराई से मत देखिए 
गहराई से देख के रिश्तों को क्यों तोड़ने लगे हो॥

ख़ुद ही इन्सां गिरता है  और  ख़ुद  ही उठता है
फ़िर दोष  दूसरों  पर  क्यों  भाई थोपने लगे हो॥

अपने ही हाथों  में  होता अपना  भाग्य बनाना
कहो फिर अपने आप को  क्यों  कोसने लगे हो॥

राज की बातें राज  बना  के रखना सीखो यारो
गैरों से अपनी बातों  को  क्यों  खोलने  लगे हो॥

नए मीत बने तो उनको भी  अपने गले लगाओ
नए की खातिर पुराने  को  क्यों  छोड़ने लगे हो॥

अगर  चाहने पर  भी  कोई  तुम  को नहीं चाहे 
भला ऐसे लोगों से खुदको  क्यों जोड़ने लगे हो॥

सोच समझ के ही हरदम अपना विवेक लगाओ
बिन सोचे समझे ही ख़ुदको क्यों झोंकने लगे हो॥ 










शनिवार, 27 जून 2009

दोस्तो दोस्ती का खूब मज़ा लीजिये



दोस्तो दोस्ती का खूब मज़ा लीजिये।
            एक प्यारा साथी कोई बना लीजिये॥ 

जो अपनी कहे और वो तुम्हारी सुने
            उस को दिल में अपने बसा लीजिये॥ 

काटे कटती नहीं यह तनहा जिंदगी
           दिल अपना किसी से मिला लीजिये॥ 

यूँ कोई किसी का जल्दी होता नहीं
            बात बनेगी दिल आगे बढा लीजिये॥ 

दो कदम पहले आगे बढाओ तो जरा
           फ़िर पता दीजिये और पता लीजिये॥ 

जिंदगी की खुशी तुम्हें मिल जायेगी
          प्यार से अपनी जिंदगी सजा लीजिये॥ 

शुक्रवार, 26 जून 2009

कर लो यकीं मुझ पर जानम


करलो यकीं मुझ पर जानम प्यार हमारा झूठा नहीं।
 इतना सताया तुमने फ़िर भी दिल हमारा टूटा नहीं॥

कसम तुम्हारी तुम क्या जानो कितना तुम को चाहें
 जिस पल याद नहीं आई ऐसा पल कोई छूटा नहीं॥

एक दिन आएगा जब तुम महसूस करोगी मुझको
  मुझे पता मेरा मुकद्दर अब तक मुझसे रूठा नहीं॥

जब तक साँस रहेगी मेरी तब तक तुमको चाहेंगे
  यूँ तो देखे हैं लाखों मगर तुझसा कोई सूझा नहीं॥

तुम हो मेरी पहली चाहत तुम को कैसे भूल जायें
  प्यार की तुम फुलवारी सिर्फ़ प्यार का बूटा नहीं॥

बुधवार, 24 जून 2009

हम रुसवा हो गए


उनकी झलक भी न मिली, हम रुसवा हो गए।
  खूब उड़ी मुहब्बत की खिल्ली, हम रुसवा हो गए॥ 

सोचा था जियेंगे मिल के मुहब्बत भरी जिंदगी 
    लग गयी ऐसी मुँह में चिल्ली, हम रुसवा हो गए॥ 

बड़ा अरमान था करूंगा देश सेवा नेता बन कर
       पहुँचे भी नहीं पाए दिल्ली, हम रुसवा हो गए॥ 

हौसला लेकर मैं उतरा था मुहब्बत की क्रिकेट में
      शुरूआत में ही उड़ गिल्ली, हम रुसवा हो गए॥ 

अपनी ही धुन में थे हम मस्त बेखबर दुनिया से
    जाने कहाँ से आ गई बिल्ली, हम रुसवा हो गए॥  

दिल की बेचैनी को आख़िर कहाँ कहने जायें हम
   किसी तरह न मिली तसल्ली, हम रुसवा हो गए॥

मंगलवार, 23 जून 2009

परदेश से जब आयेंगे मेरे साजना



परदेश से जब आयेंगे मेरे साजना
           रूठ जाऊंगी करूँगी उनसे बात ना
जो भी कहो,कहूँगी,दूर से ही कहो
          रखने  दूँगी बदन पर उन्हें हाथ ना॥

पूछूँगी क्यों इतना तरसाया मुझे
               काहे पागल सजना बनाया मुझे
तुमने तो मुझको भुला ही दिया
               काहे सताया इतना रुलाया मुझे
आदतें ये तुम्हारी आयी रास ना॥ 

हाय तुम क्या जानो कैसे रही हूँ
               जीवित भी हूँ कि या मर गयी हूँ
तुम बड़े बेरहम हो बेदर्दी पिया
                बस मैं ही यह जानूँ जैसे रही हूँ 
लगता आयी तुम्हें मेरी याद ना॥ 


गुरुवार, 18 जून 2009

इंसानियत का फ़र्ज़ निभाते चलो


इंसानियत का फ़र्ज़ निभाते चलो।
        भटके हुओं को राह दिखाते चलो॥ 

धन दौलत कौन साथ लेकर गया
         ज्यादा हो गरीबों को उठाते चलो॥ 


दुबारा जीवन तो अब मिलना नहीं
        हो सके तो प्यारे मित्र बनाते चलो॥ 


रोते को हँसाना पुण्य से कम नहीं
         ऐसा पुण्य 
दिन-रात कमाते चलो॥ 


बुधवार, 10 जून 2009

नौकरी से छुट्टी ले आना बालमा


नौकरी से छुट्टी ले आना बालमा
        कर के कोई सा बहाना बालमा
         नौकरी से छुट्टी ले आना बालमा।  


नौकरी में तुम तो ऐसे डूबे
        हाय कैसे कहें हम कैसे ऊबे
ऐसा किस काम का है कमाना बालमा।

रूप और जवानी फ़िर न आए
       तुम को भला यह कौन बताये
देखो फ़िर न मिले यह खजाना बालमा।

गुजरूँ जिधर से हर कोई देखे
      अँखियों से दिल अपना वो फेके
   मेरे पीछे पड़ा है यह जमाना बालमा।


करवट बदल बदल कर जागूँ
       जल्दी से आओ तुमसे यह मांगू

 बीता जाए मौसम यह सुहाना बालमा।

फिसल न जाए कहीं पैर हमारो
जल्दी से आ के मुझको संभालो
  फ़िर दोषी न मुझको ठहराना बालमा।


सोमवार, 8 जून 2009

प्रभु मेरे तेरी जय जय कार



प्रभु मेरे तेरी जय-जयकार,प्रभु मेरे तेरी जय-जयकार,
तेरी महिमा है अपरम्पार 
तेरी शरण में आकर पाया- 2 खुशियों का संसार
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार।

शरण तुम्हारी जबसे आया,सचमुच ही मैंने जीवन पाया
फूल खिला मेरे जीवन का,तूने सुन ली मेरी पुकार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार

विश्वास हमारा तुझमें हुआ है,वास तुम्हारा मुझमें हुआ है 
परमानन्द मुझे मिलने लगा है,हुआ जीवन मेरा साकार। 
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार

जीवन की मुझे राह दिखायी जीने की मुझमें चाह जगायी
मारे खुशी के गदगद हूँ, आयी जीवन में मेरे बहार।

प्रभु मेरे तेरी जय जयकार 

जीवन मेरा सफल हुआ है,भक्ति में तेरी सबल हुआ है
थकता नहीं गुन गाकर तेरे, किया तूने मुझपे उपकार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार

ऐसे ही कृपा बनाये रखना,राह यूँ ही दिखाये रखना 
रमा रहूँ तेरी भक्ति में, बना रहे तू जीवन आधार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार

कभी न छूटे संगत तेरी, पूरी हो हर मन्नत मेरी
सदा ही तेरा ध्यान धरूँगा, मेरी विनती करो स्वीकार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार

बड़ी ही पावन तेरी भावना,पूरी होने लगी है कामना
तेरी कृपा से उठने लगे,मेरे मन में सुन्दर सुविचार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार 

दुख के बादल छटने लगे सुख के सागर भरने लगे
शैतानों ने कर रखा था , जीवन जीना मेरा दुश्वार।
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार 

तेरी महिमा का पार नहीं, तेरे जैसा कोई प्यार नहीं 
तेरी दया से मैं ही नहीं,मेरा धन्य हुआ परिवार। 
प्रभु मेरे तेरी जय जयकार


शनिवार, 6 जून 2009

चालीस पार हो गए तो अखरस बतरस लीजिये


चालीस पार हो गए तो अखरस बतरस लीजिये।
         जियो और जीने दो जीवन का रस लीजिये।

गर जल्दी जाना हो तुम्हें यह दुनिया छोड़कर
    सुबह-शाम जब चाहे सिगरट का कस लीजिये।

जो जीने न दे तुमको किसी भी तरह से 
           फिर मत सोचो कैसे भी उसे डस लीजिये।

मोहब्बत से लोग जहाँ मिल जुल कर रहते हों
     उनके बीच जाकर प्यारे एक दम बस लीजिये।

जीवन की आपाधापी में क्यों आग बबूला होना 
         जो भी मन का मिले उसी संग हँस लीजिये।

गुरुवार, 4 जून 2009

नफ़रत करने की तो वो सारी हदें तोड़ दिए



नफ़रत करने की तो वो सारी हदें ही तोड़ दिए।
     अपना रुख मोड़ के मेरा जीवन ही मोड़ दिए॥ 


भूल कर भी कोई किसी का इतना बुरा न चाहे
    अपनों की खातिर अपनी आँख ही फोड़ लिए॥ 


ऐसे लोग जहाँ कहीं भी देखे मुझे समझ न आये 
 बड़े प्यार से मैंने उनसे अपने हाथ ही जोड़ लिए॥ 


सभी अपने मन के मिलें ऐसा हो ही नहीं सकता
 मन के तो मैंने अपनाए बे-मन के वहीं छोड़ दिए॥

सोमवार, 1 जून 2009

ईशु मसीह की प्रार्थना


ईशु मसीह की प्रार्थना 
मैंने बहुत पहले लिखी थी 
जो आपके सामने प्रस्तुत है।

यहोवा यहोवा यहोवा
           समाया तन-मन में तू यहोवा-2

तेरी व्यवस्था पे चल के
                 मेरा जीवन बदलने लगा है
टेड़ी मेढ़ी राहों से निकल के
                सीधी राहों पे चलने लगा है
सीधी राहों पे चलने लगा है
                        यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन-मन में तू यहोवा...

भरोसा किया मैंने तुझपे
                  किया जीवन ये तेरे हवाले
हजारों ही नहीं तूने लाखों
                  भक्तों के जीवन हैं संभाले
भक्तों के जीवन हैं संभाले
                        यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन-मन में तू यहोवा...

कर दो कृपा इतनी मुझपे
                      संगत न कभी तेरी छूटे
तेरा ही रिश्ता है सांचा
                  बाकी रिश्ते लगें सारे झूठे
बाकी लगें रिश्ते सारे झूठे
                        यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन-मन में तू यहोवा..