शनिवार, 26 दिसंबर 2009

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।


अकेले में जीना भी जीना है क्या-2
जीना नहीं है यह जीना है सजा-2
तन - मन से मैं
तरसती रही, बहकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।


हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें उस तरह -२
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर भी मैं सो ना सकी -२
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

अब आये अब आये करती रही -२
बस दरवाजे को ही मैं तकती रही- २
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

संग किसी के भी ऐसा ना हो-२
तंग कोई भी मेरे जैसा ना हो -२
मन ही मन में सिकुड़ती रही, उखड़ती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

बुधवार, 9 दिसंबर 2009

जय हो पाट बाबा की (जबलपुर वाले)


मन की खुशियाँ मिलें, पाट बाबा के दरबार में।
मन की कलियाँ खिलें, पाट बाबा के दरबार में।


सच्चे मन से जिसने जो माँगा
बाबा ने वो उसको दिया है
दुःख सारे ही लेकर उसके
सुख - सागर को दिया है
दुखिया सुखिया बनें
, पाट बाबा के दरबार में।

भक्तों का हरदम ही यहाँ पर
खूब ताँता लगा रहता है
बड़ा ही दयालू है यह बाबा
हर कोई यह कहता है
आओ मिलके चलें, पाट बाबा के दरबार में।


बाबा के चरणों में हरदम
जिसका ध्यान लगा है
उस पर कृपा हुई बाबा की
सोया भाग जगा है
अर्जी सबकी लगें, पाट बाबा के दरबार में।



शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

मैया मैहर वाली

मैया मैहर वाली ,मुझपे महर करो
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।

विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा

समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।


काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो

द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

छोड़ दिया रे उसने मुझको जाने क्या सोचकर


छोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
तोड़ दिया रे, उसने दिलको,जाने क्या सोचकर।

ख्वाबों में बस वो ही वो, मुझको दिखती है
ख्यालों में बस वो ही वो
, हरदम खिलती है
मोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।

दिल ही दिल में दिल उससे, बातें करता है
मन चाहे ढंग से उससे, मुलाकातें करता है
जोड़ दिया रे, गम से मुझको, जाने क्या सोचकर।

उसके बगैर जीने की, सोच नहीं सकता हूँ
किसी तरह मैं खुदको, रोक नहीं सकता हूँ
झिंझोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।

गुरुवार, 26 नवंबर 2009

जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ


इस गीत की रेकार्डिंग भी हो चुकी है

मन की जिन्दगी, किसको मिली यहाँ
जिसको मिली यहाँ,खुश वो भी नहीं यहाँ

जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
कभी खुदका गम
कभी जग का गम
पीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

एक नहीं कई एक मिलेंगे
दिल को दुखाने वाले
झुकने वाले नहीं मिलेंगे
मिलेंगे झुकाने वाले
चाक गरेबां हो जाए तो
सींते चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

साथ नहीं कोई देता है
देखो प्यारे यहाँ
कहने को सब साथी हैं
देखो सारे यहाँ
जितनी साँसे मिली हैं प्यारे
खींचे चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

उतना इकठ्ठा करो कि
जिससे जिन्दगी पलती रहे
प्यार- मोहब्बत से मिलके
जिन्दगी चलती रहे
रीते ही हम आये हैं
रीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ

रविवार, 22 नवंबर 2009

जैसे ही मैंने देखा तुझे, दिल यह मचल गया


जैसे ही मैंने देखा तुझे, दिल यह मचल गया
पल भर में दिल यह मेरा, दिलवर बहल गया

पूरी हुई दिल की, जो भी अरमान थी
बस तेरी ही तेरी, मुझको तलाश थी
बेकाबू दिल यह मेरा, तुझसे संभल गया

दीवाने की कोई कोई, होती है अरमां
परवाने की कोई कोई, होती है शमां
पाके तुझे दिल का मेरे, अरमां निकल गया

शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

अगर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते


अगर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर होते
लोगों को रुलाते तो तब भी वो नहीं रोते।
ये कमीशन खाने के लिए खूब उकसाते हैं
परसेंट से खाते हैं और सबको खिलाते हैं

जब इच्छा होती है तो अपने दफ्तर जाते हैं
जब इच्छा होती है तो वो अपने घर आते हैं
ये कभी किसी से डरते नहीं सबको डराते हैं
हाँ हजूरी करते नहीं हैं बल्कि बस कराते हैं

हमेशा ही सबको अपना ये रुतबा दिखाते हैं
गर कोई देखे तो उसको सबक सिखाते हैं
सरकारी अफसरों के तो भइया बस मजे हैं
क्योंकि मजे करने में तो ये बिल्कुल मजे हैं

जिम्मेदारी लेते हैं बहुत कम पर देते जादा हैं
ये अफसर नहीं हैं बस ये तो आज के राजा हैं
प्रजातंत्र में अफसरों को पुरी-पूरी आजादी है
कानून को तोड़ने मरोड़ने के ये खूब आदी हैं।

जो भी इनके मन को भाता है ये वही करते हैं
फायदे की बातों पर ही अपना ध्यान धरते हैं
कहते हैं कि जनता समस्याएं नेता लोग जाने
ही जाते जनता के आगे अपना हाथ फैलाने

अफसर लोग जनता के सामने कभी जायें
तो उनके लिए वो भला तकलीफ क्यों उठायें
उनका सहारा उनकी किस्मत उनका खुदा है
सीनियर अफसरों ने अपनी विदाई में कहा है

सरकारी धन को खाने में ये अफसर माहिर हैं
ओखली के भीतर रहते मगर चोट के बाहिर हैं
इनसे पंगा लेने का मतलब बैल मुझे मार
बस जपते रहिये मंत्र जय हो प्रजातंत्र सरकार!


बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

जैसा भी बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे


जैसा भी बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे।
दिल में गर प्यार होगा तो ही बाँटोगे।

हुनर है तभी कुछ कर पाओगे वरना
उमर भर किसी के तलवे ही चाटोगे।

पहले ख़ुद तो सुधर जाओ फ़िर सुधारो
सुधरे बिना किसी को कैसे सुधारोगे।

दुश्मन दोस्त कौन समझना मुश्किल
ज्ञान बिन दुश्मन दोस्त कैसे छांटोगे।

अगर दुश्मनी निभाने से फुर्सत मिले
तब ही दिल से दिल की दूरी पाटोगे।

रविवार, 18 अक्तूबर 2009

ओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा


दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा।
तेरी हरकतों से हो न, जीना मुश्किल मेरा।

दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा

जिसको भी तू देखे, हो जाए क्यों दीवाना
हाय ,तेरी खातिर मुझको, पड़ता घबराना
मान जा मेरा कहना
सच कहता हूँ वरना
कहीं तेरी वजह से, हो जाए कोई लफडा।
दिल मेरे, सुन जरा, मत हो यूँ फ़िदा

समझा समझा कर मैं, तुझको थक गया हूँ
तेरी कसम मैं तो, बिल्कुल ही पक गया हूँ
क्या हैं तेरे इरादे
मुझको ये बतादे
बहुत सता लिया मुझको, अब और सता
दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा


शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

दिल से जो होता है जग में सभी का


दिल से जो होता है जग में सभी का
उसको ही कहते हैं फ़रिश्ता जमीं का

भलाई का फल भला ही मिलेगा
उसके पीछे पीछे हर कोई चलेगा
आदमी वो ही भला करे आदमी का
उसको ही कहते फ़रिश्ता जमीं का

गैरों के दुःख को जो अपना बनाले
प्यार से बढ़ के जो गले से लगाले
करे दूर दुःख जो हर एक दुखी का
उसको ही कहते फ़रिश्ता जमीं का


नफ़रत मिटाके मुहब्बत सिखादें 
मुहब्बत से सबको जीना सिखा दे 
चखा दे मज़ा जो इस जिंदगी का 
उसको ही कहते हैं फ़रिश्ता जमीं का


मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में


इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में
तेरी खुश्बू सी लगे मेरी सांसों में

खाने को खाया मीठा बहुत मगर
उतना नहीं जितना तेरी बातों में

दिन तो गुजर जाते हैं जैसे तैसे
पर जुदाई खले मुझे तेरी रातों में

कुछ भी सुहाता नहीं है तेरे बगैर
देखूँ तस्वीर लेकर तेरी हाथों में

लगा हुआ पहरा चारों तरफ़ से
जी रही जैसे जीभ मेरी दाँतों में

तुझसा जादूगर हीं होगा कोई
दिल ले गया दो ही मुलाकातों में

रविवार, 4 अक्तूबर 2009

उनसे दो बातें क्या करली उनका दम घुटने लगा


उनसे दो बातें क्या करली उनका दम घुटने लगा ।
उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका सब कुछ लुटने लगा ।

तारीफ इसलिए की जाती कि आत्मीयता बनी रहे
इसका मतलब यह नहीं कि जमाना झुकने लगा।

वो बहुत खूबसूरत हैं किसी ने उनसे जो कह दिया
फ़िर क्या फ़िर तो चाँद बदली में जाके छुपने लगा।

एक से एक पड़े खूबसूरत चेहरे खूबसूरत जहाँ में
जाने हर कोई शख्श उनकी तरफ़ क्यों मुड़ने लगा।

शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

जब जब मैंने सच बोला तो अपनों से हम दूर हुए


जब जब मैंने सच बोला तो अपनों से हम दूर हुए।
अपनों से जो सपने देखे थे सपने वो सब चूर हुए।

जब भी जिसकी पड़ी जरूरत ले गए वो मेरे घर से
मुझको जरूरत पड़ी तो भोलेपन से वो मजबूर हुए।

साथ बैठना उठाना था जब थे हम हालात के मारे
मुझसे फिरने लगे हैं ज्यों दौलत से वो भरपूर हुए।

एक दूजे के बिना कभी दूर नहीं रह पाए हम दोनों
मुझको नज़रों से गिरा दिया जब से वो मशहूर हुए।

हम न करते तारीफ तो उन्हें पता नहीं चल पाता
पता लगा जब हम से तो दुनिया की वो हूर हुए ।



रविवार, 27 सितंबर 2009

फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी


फ़िल्म - ज़ंजीर के गाने की पैरोडी

बनाके क्यों बिगाडा रे, बिगाडा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले -२

दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया  रे  दीवाना
ओ दीवाने  ओ दीवाने -२
मुझको रिझाके,अपना बनाके,
बनाया रे  दीवाना  ओ दीवाने  ओ दीवाने

दिल में मेरे दिलवर बनके, दिल से लगाया मुझको
प्यार अगर ये  झूठा था तो, क्यों बहलाया दिल को
कसमें खिलाके, ख़ुद भी खाके,
दीवाना क्यों बनाया रे, बनाया  रे  दीवाना
ओ दीवाने  ओ दीवाने -२


गुरुवार, 24 सितंबर 2009

विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान


विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
शाम सवेरे पूजा करूँगा धरूँगा तेरा ध्यान

मूरख ज्ञानी ज्ञानी बन जाता है
जाये जहाँ वहाँ आदर पाता है
मुझको भी मिले सम्मान
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

अंधकार से मुझको उबारो
भवसागर से मुझको तारो
मेरा भी करो कल्याण
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

तेरी शरण में जो भी आया
जो भी माँगा वो ही पाया
दो मुझको भी वरदान
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।

सोमवार, 21 सितंबर 2009

जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया

जिस दोहे ने मुझे कवि बनाया । आज मैं यह दोहा आप के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह २४//१९७६ की बात है जब मैंने पहली बार कवि सम्मलेन देखा व सुना था । इस दोहे ने मेरा जीवन ही बदल दिया । भानु प्रताप बुंदेला जी ने यह दोहा सुनाया था।

एक पनिहारिन कुए पर पानी भरने जाती है और दोहा वहीं से शुरू होता है

पानी ऐंचत झुकी कुआ में , झलके अंग अनोखे ।
मानो जमुना जी में हों, गुम्बद ताजमहल के ।


आप सब भी इस दोहे का आनंद लें .धन्यबाद!!

रविवार, 20 सितंबर 2009

आओ हम डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें


आओ हम
डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

आँखों में आँखों डालो दिलवर दिल को उछालो
मस्ती में मौज मना लो बांहों में
बांहें को डालो
जीवन तेरे बिना क्या जीना सुन
मेरी हंसीना
होगा इन आँखों से पीना होगा इन बांहों में जीना
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

देखो छेडो मुझको कुछ कुछ होता है मुझको
क्या कुछ होता है तुझको बांहों में ले लो मुझको
बदन यह गोरा
गोरा देखो पगलाये है मन मोरा
चूमें हम थोड़ा थोड़ा मिलके झूमें हम थोड़ा थोडा
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

देखो सब झूम रहे हैं एक दूजे को सब चूम रहे है
मस्ती में सब कूक रहे हैं पर हम क्यों चूक रहे हैं
तुझसा ना कोई मिला,मिला तो दिल मेरा खिला
दिल में ना कोई गिला मस्ती में पी और पिला
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

मेरे सपनों के राजा थोडा सा और करीब जा
मस्ती में मुझ पर छा जा मुझसे अब दूर ना जा
होंगे हम कभी जुदा तुझसे आने लगा है मजा
भायी है हर तेरी अदा चाहे मिले अब कोई सजा
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

मुझको संभालो मैं गयी देखो पागल दीवानी हुई
कुछ भी अब दिखता नहीं मन मारे चुकता नहीं
मेरे सपनों की रान हाय तेरी यह मस्त जवानी
होने लगी
ये पानी पानी छाने लगी मुझपे रवानी
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें

हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की


हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की
ऐसी है मस्ती दिलवर तेरे शबाव की

प्यार से तुमने मुझे देख जाने जिगर
मेरी जिन्दगी ही तुमने लाजवाब की

जिसे मैंने तरासा था ख्वाबों में कभी
वो ही तमन्ना हो तुम मेरे ख्वाब की

जब से मैंने पी ली तेरी इन आँखों से
मुझे जरूरत क्या पड़ी अब शराब की

जिन्दगी यूँ ही कट जायेगी मस्ती में
बस मुझपे यूँ इनायत रहे जनाब की



शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

पा कर मन का मोहना


पा कर मन का मोहना
कैसे हो खुदको रोकना
कौन सोच में डूबा रे मन
प्यार में खुदको झोकना

जब से देखा है मैंने उसको
होश नहीं बिल्कुल मुझको
सच कहूँ ऐसे में किसी का
भाये ना मुझको टोकना

ख़ुद में ही मैं लगी हूँ डूबने
ख़ुदको ही मैं लगी हूँ ढूँढने
डूबती जाऊँ यूँ ही प्यार में
भाये ना किसी से बोलना

उसकी शरण जब से गई हूँ
उसी की हो के मैं रह गई हूँ
भाने लगा अब तो मन को
साथ लेकर उसको डोलना

वो ही दर्द दें वो ही दवा करें


वो ही दर्द दें वो ही दवा करें
कोई बतलाये हम क्या करें

उन्हें तारीफ अच्छी लगे
मालूम नहीं क्यों सजा करें

सिर्फ़ मेरे ही हो कर रहें
वो
आप सब मिलके दुआ करें

एक बार उनसे मैंने ये कहा
खूबसूरत हो थोड़ा छुपा करें

गुरुवार, 17 सितंबर 2009

ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है


मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है
जो नहीं आयेगा उसका इंतज़ार क्यों होता है

जिसने यूँ ही तड़पने के लिए छोड़ दिया मुझे
ऐसे दिलवर पर तुझको ऐतबार क्यों होता है

वफ़ा शब्द का जिनको मायने तक पता नहीं
जाने वफादारों में उनका शुमार क्यों होता है

मैंने तो दिलो जान से उनसे वफ़ा निभाई थी
मुझ सा वफादार फ़िर नागवार क्यों होता है

शनिवार, 12 सितंबर 2009

दोस्त दिल की मजबूरी भूल बनके रह गयी


दोस्त दिल की मजबूरी भूल बनके रह गयी
देखते देखते सपनों दुनिया धम से ढह गयी

उनकी सोच थी कुछ और मेरी थी कुछ और
इसी सोच में दोनों की जिन्दगी बह गयी

बिना फैसलों के कुछ भी हासिल नहीं होता
मेरी किस्मत मुझसे रुला करके कह गयी

दिल बहला लेता अब भी उसके ख्यालों से
मैं नहीं सह पाया हूँ जुदाई पर वो सह गयी

बुधवार, 9 सितंबर 2009

कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है


कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है।

जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है

अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त
उसका जीना जीना जो रोशनी बाँटता है

किसी की कभी भी जान ले सकता है दुष्ट
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है

किसी को रुलादे ऐसा गम किस काम का
उसको सराहो जो सब को हँसी बाँटता है

बुझदिल लोग जिया करते हैं उदासियों में
दिलदार वही जो सबको ताजगी बाँटता है

रविवार, 6 सितंबर 2009

माँ की लोरी प्यारी बेटी के लिए


चंदा की चाँदनी जैसी
मेरे घर में तू आयी है
साथ में अपने सारे जहाँ की
भरके खुशियाँ लायी है।

मारे खुशी के लगा झूमने
मेरा सारा तन मन
तुझको पाकर लगता है
धन्य हुआ मेरा जीवन
मेरे जीवन में आके तूने
आशा की ज्योति जलायी है।

मेरे मन मन्दिर में तू
एक प्यारी सी मूरत है
तेरी सूरत में मुझको
दिखती अपनी सूरत है
देखके तेरा रूप सलोना
दिल की कली मुसकायी है।

धन्य हुआ है जीवन मेरा
पाके तुझसी गुड़िया
मैं तो कहूँ सबको ही मिले
तुझसी प्यारी गुड़िया
तेरे आने से मेरे सूने घर में
खुशहाली सी छायी है।

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

ये गोरे गोरे गाल तेरे लिए


ये गोरे गोरे गाल तेरे लिए
ये काले काले बाल तेरे लिए
तू है मेरा और मैं हूँ तेरी
ये प्यारे सारा माल लिए

तेरे लिए मैं खुदको सजाती
जैसा तू चाहे वैसा बनाती
तेरी मस्ती में मदमाती
ये मस्ती भरी चाल तेरे लिए

तुझसे मेरी खुशियाँ जाना
तुझसे मेरी दुनिया जाना
मैं
दीवानी तू है दीवाना
हूँ दीवानी बेहाल तेरे लिए

मेरे दिल का तू शहजादा
मैं तेरी रानी तू मेरा राजा
आजा मेरे दिल में समाजा
दूँगी खुदको उछाल तेरे लिए

मंगलवार, 1 सितंबर 2009

जीवन में तुमसे ही हैं फूल झरे

जीवन में तुमसे ही हैं फूल झरे
सूरत तेरी आँखों से टारे टरे

कहाँ छुप गए कहके मिलन की
दिल कब से तेरा इंतज़ार करे

साथ तेरे जो देखे हैं ख्वाब मैंने
ऐसा हो रह जायें धरे के धरे

तेरे बिना कैसे होगा जीना मेरा
तेरे बगैर जिन्दगी तारे तरे

दुनिया मेरी रंगीन है तुमसे ही
जिन्दगी लगे ही तुमसे परे

मेरे सामने ही रहा करो जानम
तेरी दूरियों से दिल बहुत डरे

सोमवार, 31 अगस्त 2009

प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं


प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं
या फ़िर वो मुझसे अब ऊब गए हैं

क्या सोचा था और ये क्या हो गया
लगता फैसला कर के चूक गए हैं

और कहीं दिल भी तो नहीं लगता
उनकी खातिर तन मन टूट गए हैं

अब क्या प्यार नसीब होगा उनका
यह सोच के ग़मों में हम डूब गए हैं

कुछ भी कहना अब मुमकिन नहीं
या तो हम लुटे हैं या वो लूट गए हैं

शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

मुझे चढ़ गयो प्यार का बुखार

मुझे चढ़ गयो प्यार का बुखार
उतारो करो जल्दी बलमा
देखो अब और करो बेकरार
उतारो करो जल्दी बलमा।

हीर के राँझे को लाओ
लैला के मजनूँ को लाओ
जाओ जाओ जल्दी जाओ
अब बिल्कुल देर लगाओ
देखो देर करो सरकार
उतारो करो जल्दी बलमा

तड़प तड़प के मरि जाऊं
ऐसे में कुछ करि जाऊं
किसी तरह में चैन पाऊँ
कहाँ तक ख़ुद को तडपाऊँ
खड़े यूँ ही रहो लाचार
उतारो करो जल्दी बलमा

तन मन मेरा जलने लगा है
मति मेरी यह हरने लगा है
सोच सोच कर डरने लगा है
अपने आप ही मरने लगा है
जीना मेरा हुआ है दुश्वार
उतारो करो जल्दी बलमा


गुरुवार, 27 अगस्त 2009

कोई मुझको यह बतादे कैसे उनको हम मनायें


कोई मुझको यह बतादे कैसे उनको हम मनायें
पहले की तरह दिलवर कैसे उनको हम बनायें

वफ़ा ही वफ़ा है दिल में नहीं वेवफा हूँ बिल्कुल
पर क्या करुँ यकीं यह कैसे उनको हम दिलायें

दिल चीर के कभी भी देख लें वो नजदीक आकर
प्यार ही है इस दिल में कैसे उनको हम दिखायें

जीना नहीं है जीना फ़िर भी जीने को जी रहा हूँ
हालत क्या हो गयी यह कैसे उनको हम बतायें

मंगलवार, 25 अगस्त 2009

तेरे लिए मैं लाया हूँ प्यार भरा यह दिल

तेरे लिए मैं लाया हूँ प्यार भरा यह दिल
क्या करुँ मैं जिस से तू हो जाए हासिल

गोरा गोरा बदन तुम्हारा मुझे लुभाए रे
जितना देखूँ उतना पागल मुझे बनाये रे
चार चाँद लगाये मुखपे काला काला तिल

तुझको पाना ही मेरा अरमान जाने जाना
तेरा मेरा यह रिश्ता लगता सदियों पुराना
तुझको पा के जीवन मुझको जाएगा मिल

प्यार की मस्ती में होगी प्यारी मुलाकातें
एक दूजे की बाँहों में गुजरेंगी अपनी रातें
प्यार की खुश्बू में यह दिल जाएगा खिल

सोमवार, 24 अगस्त 2009

मेरे भोले बाबा सुन लो, मन की पुकार को


मेरे भोले बाबा सुन लो, मन की पुकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को

ठुकराया है दुनिया ने, देकर खूब भरोसा
अब न खाने वाला, इस दुनिया से धोखा
करो कृपा न भूलूँ मैं, तेरे इस उपकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

जीवन बन गया भोले, सचमुच एक पहेली
जाने कब सुलझेगी, मेरे जीवन की पहेली
राह दिखाना भोले, अपने भक्त लाचार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।

तेरे सिवा न कोई है, जिसको कहूँ मैं अपना
लगता
होगा पूरा न , जो भी देखा है सपना
तुम्ही जानो कैसे, मिलेगा चैन बेकरार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।


रविवार, 23 अगस्त 2009

सैयां उसके बावरे, उस से लिपटत रोज


सैयां उसके बावरे, उस से लिपटत रोज।
लिपटके जाने कौन सी करते रहते खोज॥
करते रहते खोज खोज न पाए हैं कुछ भी।
तन टूटा और मन टूटा हो गए हैं भुस भी॥
कहे प्रेम कविराय जियो और जीने दो ना।
परमेश्वर पिता का सुबह-
शाम रस लो ना॥

शुक्रवार, 21 अगस्त 2009

जलवा हुश्न जवानी का मुझको दिखाके जा ना।


जलवा हुश्न जवानी का मुझको दिखाके जा ना।
मोह लिया है तुमने मुझको मुसकराके
जा ना।

तुझसे जो मिलता जन्नत में भी वो सकून नहीं
मेरी हो जाओ रखेंगे दिल में तुझे सजाके
जा ना।

जीवन के तर्कों से मुझे कुछ भी लेना देना नहीं
मैंने अपने ख्यालों में ये तुझको समाके
जा ना।

होश नहीं है मुझको हाय जब से तुझको देखा है
होश में लादो जब चाहे मुझे पास बुलाके
जा ना।

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

हम हैं आलसी राम


हम हैं आलसी राम
कोई कहे कुछ करने को तो करते नहीं हम काम
बिन करे ही मन का हो जाए सोचूँ यही दिल थाम
हँसीनों से घिरा रहूँ और चलते रहें जाम पर जाम
देखके हमें हर कोई पहिचाने हो ऐसा हमारा नाम
रहने को घर ऐसा मिले जिसे कहते हों सब धाम
खुशियाँ चूमें कदम हमारे चाहे सुबह हो चाहे शाम

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

जब से मिला है तेरा प्यार तब से खिला मेरा संसार


जब से मिला है तेरा प्यार तब से खिला मेरा संसार
तेरी कसम तेरे प्यार में मिलने लगा है चैनो करार

दीवाना तूने मुझको बनाया अपने इस रूप का गोरी
सदा रहे यूँ ही छायी तुझपे दिलवर यह मस्त बहार

लगती हो तुम मुझको कोई ख्वाब किसी शायर का
तुझको देख-देख मचलती है मेरी तबियत बार-बार

भला तारीफ करुँ मैं तेरी कैसे मुझे शब्द नहीं मिलते
तारीफ से तुम हो बहुत परे मेरी हम दम जाने-बहार

ऊपर से नीचे तक तुम बस लगती मुझको रेशम सी
तुझे अपने अंग लगाये रखूँ मैं करे अंग-अंग पुकार

खुल गई है मेरी किस्मत तुझको पाकर मेरे दिलवर
मुझको प्यारा लगने लगा सचमुच सारा यह संसार

रविवार, 16 अगस्त 2009

कोई पी रहा दोस्तों में कोई पी रहा अकेले में


कोई पी रहा दोस्तों में कोई पी रहा अकेले में
ढूँढ रहा हर कोई साथी दुनिया के इस मेले में।
एक न एक दिन सकूं उसे जरूर मिल जाएगा
पर उसे सकूं नहीं मिलता दुनिया के झमेले में।

किसी तरह आनंद न आये तो कोई क्या करे
हर किसी की जुबान पर यही सवाल रहता है।
कहीं भी कोई हँसी न उडादे उसके जज्बात की
यही सोचकर वो अक्सर चुपचाप सा रहता है।

आजकल मुहब्बत दिलों से मिटती जा रही है
दुनिया अपने आप में ही सिमटती जा रही है।
किसी को भी परवाह नहीं है किसी की जहाँ में
पता नहीं ये दुनिया
कहाँ भटकती जा रही है।

ग़मों से ही खुशियों की पहचान हुआ करती है
खुशियों से ही ग़मों की पहचान हुआ करती है।
बहुत कम ही लोग समझते हैं इस दुनिया में
जिन्दगी चार दिन की महमान हुआ करती है।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

खुश हो के दूसरों का खुश जीवन किया करो


खुश हो के दूसरों का खुश जीवन किया करो
खाओ पियो पल दो पल प्रहसन किया करो

सही और ग़लत का फैसला अगर हो पाय
तो अकेले बैठकर मन में मंथन किया करो

आप कितने अच्छे हो कितने बुरे हो दोस्त
अपने ही कर्मों का सामने दर्पण किया करो

इतना कमा कर आखिर कहाँ ले के जाओगे
थोड़ा बहुत असहायों में अर्पण किया करो

लोग तुमसे बात करने को व्याकुल हो जाए
कुछ आप ख़ुद में पैदा आकर्षण किया करो

भूल से बहक जाओ अपनी भावनाओं में
अपने आप पर भी थोड़ा शासन किया करो

क्यों सिकुड़ कर जी रहे हो आप जिंदगी को
दौलत भी फुर्सत भी तो देशाटन किया करो

यह मन पवित्रता से दयालुता से भर जाएगा
जो भूखे सोते उनको दान राशन किया करो

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें


जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें
बनके दीपक बाती रौशन जीवन की शमा करें

रहकर अकेले जीवन सचमुच जिया नहीं जाए
आओ प्यार में रच बस एक दूजे को जवां करें

आख़िर हम इंसान हैं गलती हो ही जाया करती
क्यों छोड़ शिकवे गिले एक दूजे को क्षमा करें

आज कमाकर आज गंवाया यह भी कोई जीना
बुरे समय के लिए भी जीवन में थोड़ा जमा करें

कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा ही जाता
बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें

अकड़ में रहके सुखमय जीवन जिया नहीं जाए
मुहब्बत बढेगी आपस में एक दूजे को नमा करें


बुधवार, 12 अगस्त 2009

मेरी आँखों की नीदों को उड़ाके वो गए


मेरी आँखों की नीदों को उड़ाके वो गए
रिश्ता दिल से दिल का जुडाके वो गए

सब कुछ ठीक ही चल रहा था अब तक
जाने किस बात पे मुँह फुलाके वो गए

रूठ भी गए तो मना लेंगे उन्हें प्यार से
हाय झटक मेरी बहियाँ छुडाके वो गए

सोचा गुजार देंगे जीवन यह साथ-साथ
झुकना तो दूर मुझको झुकाके वो गए

मन का दुःख अब किस से कहने जायें
कसम से तन-मन मेरा दुखाके वो गए

मंगलवार, 11 अगस्त 2009

ज़रा- ज़रा सी बात पर अपने रूठने लगे


ज़रा- ज़रा सी बात पर अपने रूठने लगे।
इसी वजह से आजकल रिश्ते टूटने लगे।

कैसे निभें रिश्ते बताओ दूर तक भला
अपनत्व के सागर दिलों में सूखने लगे।

कैसे निकलें घर से माँ बहिन- बेटियाँ
गली-गली में गुंडे मवाली घूमने लगे।

बढ़ रहे अपराध दिनोंदिन समाज में
गुनाह करके लोग बेगुनाह छूटने लगे।

जल्दी से हर कोई बनना चाहता अमीर
जिसको मिलता मौका जहाँ लूटने लगे।

रविवार, 9 अगस्त 2009

बंसी बजैया कृष्ण कन्हैया


बंसी बजैया, कृष्ण कन्हैया
आयी हूँ ,तेरे दरबार में
हाँ, आयी हूँ, तेरे दरबार में
कोई नहीं सिवा, तेरे कन्हैया
मेरा इस संसार में
हाँ, मेरा इस संसार में।


तेरी शरण में सुख मिलता है
तन खिलता है, मन खिलता है।
है मुझको भरोसा, तू सुन लेगा
विनती मेरी, एक पुकार में
हाँ, विनती मेरी,एक पुकार में।


मतलब की है, दुनिया सारी
दुनिया जीती है, पर मैं हारी
सुध बुध अपनी, भूल गई मैं
पागल होकर, तेरे प्यार में
हाँ, पागल होकर ,तेरे प्यार में।


बंसी बजैया, कृष्ण कन्हैया
आयी हूँ ,तेरे दरबार में
हाँ, आयी हूँ, तेरे दरबार में
कोई नहीं सिवा, तेरे कन्हैया
मेरा इस संसार में
हाँ, मेरा इस संसार में।




शनिवार, 8 अगस्त 2009

तुम्हारे जितना मुझे कोई भाता नहीं है


तुम्हारे जितना मुझे कोई भाता नहीं है।
तुम्हारे सिवाय नज़र कोई आता नहीं है।

लगता है तुमने भी मुझको दिल दे दिया
वरना यूँ देख के कोई मुस्कराता नहीं है।

मेरी किस्मत मेरे साथ जरूर रही होगी
ऐसे आसानी से प्यार कोई पाता नहीं है।

मुझे बड़ा सकूं मिलता है तेरे ख्यालों में
यूँ ही दिल गीत कोई गुनगुनाता नहीं है।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

हिंदुस्तान के वीर सैनिक


सीमाओं की है रक्षा तुमसे
तुमसे यह हिंदुस्तान है
हिंदुस्तान के वीर सैनिको
तुमपे हमको अभिमान है

घरवार छोड़ सीमाओं पर
बैठे हो आँखें लगाये
उसे मिटादो जो भी दुश्मन
सीमाएं लाँघ के आए
तुमसे देश का गौरव है
तुमसे देश की शान हैं

देशवासियों की खातिर
सीमाओं पर कष्ट उठाते हो
अपनी नीदें खो करके
हमको बेखौफ सुलाते हो
तुम सब के लिए हमारे
दिलों में बड़ा सम्मान है

तुम्हारी बहादुरी के आगे
दुश्मन टिक नहीं सकता
तुम्हारी पकड़ छुडा करके
दुश्मन भाग नहीं सकता
धन्य तुम्हारा है देश प्रेम
धन्य तुम्हारा बलिदान है

हिंदुस्तान के वीर सैनिक
दुनिया में नम्बर एक हैं
तुम्हारी वीरता की गाथाएं
एक नहीं कई अनेक हैं
कभी मुडके पीछे देखो
ऐसी तुम्हारी पहिचान है

धन्य हैं वो माँएं जिन्होंने
तुम सा वीर जवान जनां
मातृभूमि की रक्षा खातिर
कर देते हो खुदको फ़ना
देशवासियों के काम आए
जीवन तुम्हारा महान है


गुरुवार, 6 अगस्त 2009

अपराध की दुनिया दुनिया दल दल


अपराध की दुनिया दुनिया दल दल
फंस जाए जो भी वो पाए न निकल
सोचने बैठे कभी तो सोचता ही रहे
किसी तरह न सूझे कोई उसको हल।

पता नहीं जाने कब क्या हो जाए
मारने को निकले ख़ुद मर जाए
मौत मडलाये सिर पर हर एक पल।

छुप छुप जीना भी कोई जीना है
ऐसे जीवन ने सुख चैन छीना है
आज का भरोसा नहीं क्या होगा कल।

पीछा न छोडे कर्मों का लेखा जोखा
काटता वो ही इन्सां जो भी वो बोता
भोगना ही पड़ता यहाँ कर्मों का फल।

बुधवार, 5 अगस्त 2009

मेरे भइया प्यारे भइया बहिन को क्यों भुला दिया


मेरे भइया प्यारे भइया बहिन को क्यों भुला दिया।
खता हुई है क्या मुझसे जो खुदको यों जुदा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

मात-पिता की हम हैं दो ही संताने
मैं जानू यह भइया और तू भी जाने
मैंने तो माना मगर यह तू नहीं माने
एक खून थे हम और तुम गैर मुझे क्यों बना दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

शायद भाभी ने कुछ कह दिया होगा
मेरे खिलाफ तुमको भर दिया होगा
अपने पक्ष में तुमको कर लिया होगा
जीते जी ही तुमने अपनी बहिन को क्यों रुला दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

जब से हुई हूँ मैं घर से पराई भइया
याद न मेरी तुम्हें कभी आयी भइया
जाने कौन सी घड़ी की मैं जाई भइया
ख़ुद न सोचा तुमने कुछ भी भाभी का क्यों कहा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

भाई और बहिन की दीवार है भाभी
होती ऐसी सचमुच बेकार है भाभी
भइया की सुख दुःख संसार है भाभी
भइया मेरा बुरा नहीं पर भाभी ने ही मुझे छुडा दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

आखिर तुम क्या चाहते हो बतलाओ हमें

आतंकबादी
आखिर तुम क्या चाहते हो बतलाओ हमें
तुमको किसने भड़काया है बतलाओ हमें

जिस थाली में खाओ उसी में ही छेद करो
यह पाठ किसने पढाया है बतलाओ हमें

कसूरबारों को मारो तो जाने हम भी तुम्हें
बेकसूरों ने क्या बिगाडा है बतलाओ हमें

तुम चाहे पचास मारो चाहे फ़िर सौ मारो
अब तक भला क्या पाया है बतलाओ हमें

आग लगादी है तुमने इस प्यारे वतन में
क्यों तरस ही नहीं खाया है बतलाओ हमें

एक दिन तुम ख़ुद भी मर जाओगे ऐसे ही
क्यों व्यर्थ जीवन गंवाया है बतलाओ हमें


मंगलवार, 4 अगस्त 2009

एक - दूसरे के साथ चले हैं हम दोनों


एक - दूसरे के साथ चले हैं हम दोनों ।
मस्ती में मस्ती से खिले हैं हम दोनों ।

लाख लगाले ये दुनिया पहरा फ़िर भी
जब भी चाहा तब ही मिले हैं हम दोनों ।

रंग गए तन से मन से मिलके होली में
रंग एक दूसरे को खूब मले हैं हम दोनों।

सफल हुआ है जीवन अपना धरती पर
प्यार से मिलकर फूले फले हैं हम दोनों।

सोमवार, 3 अगस्त 2009

काका जी का रोज़ पढ़े जो भी कुंडलिया छंद


काका जी का रोज़ पढ़े जो भी कुंडलिया छंद।
वो चिंता न बिल्कुल करे बस हो जाए निद्वंद।
बस हो जाए निद्वंद करे खुशियों का अनुभव
फ़िर जो भी काम करे काम हो जाये सम्भव।
कहे प्रेम कविराय लगाओ खूब भइया ठहाका
खुशियों के दाता हैं भारत के हाथरसी काका।

दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है


दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है
दिल को तडपती है जब तेरी याद आती है

छाया हुआ है अँधेरा दिखता नहीं है सवेरा
तबियत घबराती है जब तेरी याद आती है

दिल है भारी भारी झूठ नहीं कसम तुम्हारी
दिल को तरसाती है जब तेरी याद आती है

देख रहा हूँ तेरी राहें फैला कर अपनी बाहें
साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है

रविवार, 2 अगस्त 2009

दिल जल रहा मगर धुआं नहीं यारो


दिल जल रहा मगर धुआं नहीं यारो।
दिल से बना कोई अपना नहीं यारो।

अकेला हूँ अकेला ही सही मैं फ़िर भी
जी लूँगा गर कोई महरबाँ नहीं यारो।

लुटने को लुट रहे हैं बहुत दुनिया में
पर मुझसा लुटा कोई यहाँ नहीं यारो।

सकूँ की तलाश में भटका हूँ उमर भर
जहाँ पे ढूँढा वहाँ पे मिला नहीं यारो।

आरजू थी कि कोई हमसफ़र मिलता
भटकता रहा मैं कहाँ कहाँ नहीं यारो।

शनिवार, 1 अगस्त 2009

भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है


भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है।
इसीलिए सभी को यहाँ पर कष्ट ही कष्ट है।

आजकल कोई भी किसी की सुनता ही नहीं
क्योंकि हरकोई अपने आप में हुआ मस्त है।

हमेशा सत्य ही जीतता यह किताबों में पढ़ा
मगर आज तो झूठ जीते यह हो रहा पुष्ट है।

हर कोई तो सितमगर है यहाँ अपने आप में
सितम करके इन्सां कितना बन गया दुष्ट है।

समा गई अशांति आज हर दिलो दिमाग में
जिससे भी बोलिये उसमें झलकता स्पष्ट है।

कोई अगर किसी से निभाए तो कैसे निभाए
बिना बात के ही हर कोई हर किसी से रुष्ट है।


वो सामने से गुजरते हैं मुझको देखते हुए


वो सामने से गुजरते हैं मुझको देखते हुए ।
नज़रों ही नज़रों में अपना दिल फेकते हुए।

मेरी समझ में तो कभी कुछ भी नहीं आया
जाने उन्हें क्या मिलता मुझको छेड़ते हुए।

बात करना चाहो तो बात ही नहीं करते वो
अब मुझे भी मज़ा आने लगा उन्हें हेरते हुए।

हिम्मत जुटा के एक दिन मैंने कह ही दिया
आओ हम तुम जिन्दगी गुजारते खेलते हुए।

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता है वो बोल पड़े
पाने से बेहतर लगे पाने को पापड़ बेलते हुए।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

जैसे वो भूले हमें वैसे ही मैं भी भूल गई


जैसे वो भूले हमें वैसे ही मैं भी भूल गई
पर जब से सावन आयो मन तरसत है।
ठंडी - ठंडी हवा चले तन पर फुहार पड़े
पिया से मिलन की मेरी बड़ी हसरत है।
जब जब चमके हाय बादलों में बिजली
बिजली की कड़क संग दिल धडकत है।
बदन पर पानी गिरे गिरते ही जल जाए
दैया ऐसे आग मेरे अंग-अंग दहकत है।

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

ऊधौ उठि जाउ तुम अब हमारे सामने से


ऊधौ उठि जाउ तुम अब हमारे सामने से
ऐसी बातें करत तुम को नहीं शरम आवे।
हमारे तो हिय में कन्हैया की मूरत बसी है
ब्रह्म उपासना बताउ हमें कौन जतन भावे।
गोपियाँ तो ऊधौ से खूब खिसियाती जाती
पर ऊधौ ज्ञान गठरी अपनी खोलत जावे।
कहे प्रेम बोली मिलि गोपियाँ सब ऊधौ से
अंधी तो तब जाने जब भरि बाँहों में आवे।

कोई नहीं है हमारा यहाँ


कोई नहीं है हमारा यहाँ ,
है
मतलबी यह सारा जहाँ।

जिसको हमने अपना बनाया,
समझा
उसने पराया यहाँ।

कहने को सब रिश्ते नाते,
होते
तब तक जब तक खाते

मानो या मानो कोई यह,खाब्बुओं का है मारा जहाँ।
बेदर्दों की यह दुनिया है,
दुनिया
भी क्या यह दुनिया है

जब भी देखा आजमाकर के,
मिलता
नहीं है सहारा यहाँ।

अपनी होगी दुनिया कभी,
चाहे
मिटादो अपनी जिन्दगी

कहते कुछ भी बनता नहीं है,
जीवन
बड़ा ही बेचारा यहाँ