गुरुवार, 13 अगस्त 2009

जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें


जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें
बनके दीपक बाती रौशन जीवन की शमा करें

रहकर अकेले जीवन सचमुच जिया नहीं जाए
आओ प्यार में रच बस एक दूजे को जवां करें

आख़िर हम इंसान हैं गलती हो ही जाया करती
क्यों छोड़ शिकवे गिले एक दूजे को क्षमा करें

आज कमाकर आज गंवाया यह भी कोई जीना
बुरे समय के लिए भी जीवन में थोड़ा जमा करें

कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा ही जाता
बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें

अकड़ में रहके सुखमय जीवन जिया नहीं जाए
मुहब्बत बढेगी आपस में एक दूजे को नमा करें


10 टिप्‍पणियां:

  1. कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा आ ही जाता
    बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें।
    बिलकुल सही कहा अक्सर हम छोटी 2 बातों मे जीने के कुछ अच्छे पल खो देते हैं सुन्दर रचना आभार्

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  2. bahut hi mudde ki baat ko lafzon me dhaala hai
    premji, aapka andaaz sabko pasand aanewala hai

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  3. कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा आ ही जाता
    बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें।
    अच्छी सीख अच्छी नसीहत दी. बहुत सुन्दर

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  4. आख़िर हम इंसान हैं गलती हो ही जाया करती
    क्यों न छोडके शिकवे गिले एक दूजे क्षमा करें।

    ACHHE RACHNA AUR YE PANKTIYAAN TO LAJAWAAB HAIN....KAASH SAB AISAA KAR PAATE....

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  5. बहुत अच्छी रचना है बधाई।

    कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा आ ही जाता
    बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें।

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  6. अत्यन्त सुंदर! श्री कृष्ण जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  7. आप सभी ब्लोगर मित्रों का मेरा हौसला बढाने के लिए दिल से धन्यबाद!!

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