रविवार, 28 जून 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - आपकी कसम



ल : पास नहीं आना भूल नहीं जाना
तुमको सौगंध है कि आज मोहब्बत बंद है
पास नहीं आना ...
कि : पहले तो आग भड़काती है
फिर दिल की प्यास तू बुझाती है
तेरी यही अदा तो मुझको पसंद है
ल : अच्छा
कि : हाँ-हाँ
ल : मगर आज मोहब्बत बंद है ...   - आनंद बक्शी 

जब भी मुझे तू दिख जाती है 
नीयत मेरी डिग जाती है 
सच पूंछो आज मेरा  हौसला बुलंद है।  - प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मगर आज मुहब्बत बंद है.…  

अपने पहलू में खो जाने दे 
जो भी होता है  हो जाने दे 
कैसे कहूँ ऐसी आये तुझमें सुगंध है।  - प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मगर आज मुहब्बत बंद है। … 




बुधवार, 24 जून 2015

स्वरचित अन्तरा -ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम


स्वरचित अन्तरा 
फिल्म -आपकी कसम        गीत कार-  -आनंद बक्शी 

ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते

फूल खिलते हैं, लोग मिलते हैं
फूल खिलते हैं, लोग मिलते हैं मगर
पतझड़ में जो फूल मुरझा जाते हैं
वो बहारों के आने से खिलते नहीं
कुछ लोग जो सफ़र में बिछड़ जाते हैं
वो हज़ारों के आने से मिलते नहीं
उम्र भर चाहे कोई पुकारा करे उनका नाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
ज़िन्दगी के सफ़र में ...

कौन अपना है, जग सपना  है 
कौन अपना है, जग सपना  है  सुनो 
भरमाता ही रहता है सारी उमर 
जान कर भी कोई जान पाता नहीं 
किसको अपना कहें किसको गैर कहें 
मान कर भी कोई मान पाता नहीं 
इस तरह जी के, चले जाते है, जो अपने धाम   -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

वो फिर फिर आते, वो फिर फिर आते 
ज़िन्दगी के सफ़र में ...



बुधवार, 17 जून 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - मेरे जीवनसाथी



फिल्म -मेरे जीवनसाथी 

ओ मेरे दिल के चैन
चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिए।     -  मजरूह   सुल्तानपुरी 

कहना जो चाहूँ कैसे कहें वो, 
सोच नहीं पाता हूँ मैं
किसी तरह से भी खुद को,
रोक नहीं पाता  हूँ मैं 
बढ़ रही साँसें, 
कह रही आँखें 
मान जाओ न मुझको मना कीजिये।          -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

ओ मेरे दिल के चैन
चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिए।     -  मजरूह   सुल्तानपुरी