शुक्रवार, 29 मई 2015

मुहब्बत की बात पर खिल जाता चेहरा तुम्हारा



मुहब्बत की
बात पर खिल जाता चेहरा तुम्हारा
जाने क्यों मनमोहक सा हो जाता चेहरा तुम्हारा

मिलन की बात पर सोच में डूब जाया करते हो
गौर से पढ़ने पर नहीं पढ़ा जाता चेहरा तुम्हारा। 

तेरी दूरियों से जीना मेरा बड़ा मुश्किल हो जाये 
दिल से मेरे निकल ही नहीं पाता चेहरा तुम्हारा

दिलवर सासें ही अब तो तुम से जुदा कर पाएं 
आँखों से दूर नहीं ही कर पाता चेहरा तुम्हारा

बुधवार, 27 मई 2015

स्वरचित अन्तरा - सावन का महीना, पवन करे शोर



सावन का महीना, पवन करे शोर 


तेरी मेरी जोड़ी, जग से न्यारी है

जो भी देखे वो ही बोले, जोड़ी प्यारी है. 

मैं जानू ये, तू भी जाने,

पहली नजर में, हुए हम दीवाने
दीवानेपन की हद हमने, तोड़ डारी है.
जो भी देखे वो ही बोले, जोड़ी प्यारी है
तेरी मेरी जोड़ी, जग से न्यारी है

इंतज़ार की हद हो गयी, अब तो गले लगा लो न



इंतज़ार  की  हद  हो गयी, अब  तो गले  लगा लो न।
बेकरार  की रूह  रो  गयी, अब  तो गले  लगा लो न।।



कब मिलोगी कैसे मिलोगी, कुछ भी समझ न आये
तेरी कसम अब बगैर तेरे तो, कुछ भी नज़र न आये
तबियत मेरी बेचैन हो गयी, अब तो गले लगा लो न। 

जांनू तेरे नाम की माला, हरदम जपता ही रहता हूँ
तुझे पाने को ईश्वर से, फरियादें करता ही रहता हूँ
रातों की मेरी नींद खो गयी,अब तो गले लगा लो न।

तेरे ही बस सपने आते, और किसी के आते नहीं हैं
झूठ नहीं सच कहता हूँ, सपने दिल बहलाते नहीं हैं
हाई  बी पी  मेरी  लो गयी, अब तो गले लगा लो न।

आखिर कब तक हम, यूं मिलते रहेंगे


आखिर  कब  तक  हम, यूं मिलते  रहेंगे

ख्वाबों में कब तक हम, यूं  खिलते रहेंगे।

कसमें वादे बहुत हुए अब आगे की सोचो

बतलाओ  कब तक  हम यूं छिलते रहेंगे।

ऐसा न हो उम्र हमारी तय करने में जाए

जानेमन  कब तक हम, यूं झिलते रहेंगे। 

बोल कर  देख लिया बात नहीं बन पायी

होठों को कब  तक  हम,यूं  सिलते रहेंगे।

झूठ नहीं यह सच है खूब है अपनी जोड़ी

बेचैनी से  कब  तक हम,यूं  हिलते रहेंगे।

जनता को नेताओं ने सदा छला है



जनता को नेताओं ने सदा छला है,बताओ कभी किसी ने किया भला है

सेवा की जगह किया करते शासन,करने के नाम पर करते हैं भाषण
नये-नये ढंगों से जनता को बहलाते,फिर भी ये देश के नेता कहलाते
भोली जनता तो अनपढ़ों का पर्याय, सच बताने का है मेरा अभिप्राय
जो अपनी ताकत को नहीं जानता, उसको जहाँ  में कोई  नहीं मानता

जो हमेशा किस्मत का ही सहारा लेते, वो जुल्म ढ़ाने का ही इशारा देते
जुल्म ढाने वाले दुनियां पे कलंक हैं,सहने वाले भी दुनियां पे कलंक है
ज्ञानियों को कौन बना सकता यहाँ,रंग उन पर कौन चढ़ा सकता यहाँ
अज्ञानी तो जहाँ में सदा रोये तड़पे,भड़काने से भी वो कभी नहीं भड़के
समानता ऐसे नहीं मिली है प्यारे,अज्ञानियों की तो नहीं चली है प्यारे
कोसते ही रहोगें खुद को खुदा को,माफ करना अगर मैंने झूठ कहा तो.








स्वरचित अन्तरा पान खाय सैयां हमारो



पान खाय  सैयां हमारो  
सांवली सुरतिया होठ लाल लाल 
पान खाय  सैयां हमारो  

दूर- दूर वो रहता मुझ से
चाहूँ फिर भी मस्ती छने न
कहते बने न हालत मन की
किसी तरह मेरी बात बने न
बात बने न

पान खाय  सैयां हमारो  
सांवली सुरतिया होठ लाल लाल 
पान खाय  सैयां हमारो  
                      -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

तुम जहाँ स्वर्ग वहां


तुम  जहाँ  स्वर्ग  वहां,बाकी  सब धुआं धुआं 

आप   ने   सच   कहा, खिल उठा  रुआं रुआं।
                                       -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

सोमवार, 25 मई 2015

स्वरचित अन्तरा - फिल्म -काली चरण



स्वरचित अन्तरा  - फिल्म -काली चरण 

जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी 
दिल देकर मैं कर बैठी, दिल के दुश्मन से यारी 
तुझको बाहों में भरके, मरी गयी मैं तुझपे मरके 
पत्थर की पूजा करके, हारी मैं हारी 
जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी

हम तुम दोनों मिल जाते तो,मिलती ख़ुशियां सारी
होते पूरे सपने हमारे,मैं हो गयी तेरी दीवानी
होता तू भी दीवाना,दिल मेरा तुझको पुकारे 
तू न माना साजन,दे दी मुझको घुटन
हो, कर ले यकीं मैं खाऊं कसम तुम्हारी।   -स्वरचित अन्तरा-  प्रेम  फ़र्रुखाबादी 

जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी 
दिल देकर मैं कर बैठी, दिल के दुश्मन से यारी 
तुझको बाहों में भरके, मरी गयी मैं तुझपे मरके
पत्थर की पूजा करके, हारी मैं हारी 
जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी       - वर्मा मालिक