रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।
अकेले में जीना भी जीना है क्या-2
जीना नहीं है यह जीना है सजा-2
तन - मन से मैं तरसती रही, बहकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।
हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें उस तरह -२
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।
आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर भी मैं सो ना सकी -२
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।
अब आये अब आये करती रही -२
दरवाजे को ही मैं तकती रही- २
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।
संग ना हो किसी के मेरे जैसा-२
तंग ना हो कोई भी मेरे जैसा-२
मन ही मन में सखी जलती रही, बुझती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।
Saturday 26 December 2009
Wednesday 9 December 2009
जय हो पाट बाबा की (जबलपुर वाले)
मन की खुशियाँ मिलें, पाट बाबा के दरबार में।
मन की कलियाँ खिलें, पाट बाबा के दरबार में।
सच्चे मन से जिसने जो माँगा
बाबा ने वो उसको दिया है
दुःख सारे ही लेकर उसके
सुख - सागर को दिया है
दुखिया सारे सुखिया बनें, पाट बाबा के दरबार में।
भक्तों का हरदम ही यहाँ पर
खूब ताँता लगा रहता है
बड़ा ही दयालू है यह बाबा
हर कोई यह कहता है
आओ सब मिलके चलें, पाट बाबा के दरबार में।
बाबा की है महिमा निराली
सुनलो भक्तो कान लगा
कृपा हुई जिस पर बाबा की
उसका सोता भाग जगा
अर्जी यहाँ सबकी लगें, पाट बाबा के दरबार में।
Friday 4 December 2009
मैया मैहर वाली
मैया मैहर वाली ,मुझपे महर करो
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।
विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा
समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।
काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो।
द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।
विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा
समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।
काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो।
द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।
Friday 27 November 2009
छोड़ दिया रे उसने मुझको जाने क्या सोचकर
छोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
तोड़ दिया रे, उसने दिलको,जाने क्या सोचकर।
ख्वाबों में बस वो ही वो, मुझको दिखती है
ख्यालों में बस वो ही वो , हरदम खिलती है
मोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
दिल ही दिल में दिल उससे, बातें करता है
मन चाहे ढंग से उससे, मुलाकातें करता है
जोड़ दिया रे, गम से मुझको, जाने क्या सोचकर।
उसके बगैर जीने की, सोच नहीं सकता हूँ
किसी तरह मैं खुदको, रोक नहीं सकता हूँ
झिंझोड़ दिया रे, उसने मुझको, जाने क्या सोचकर।
Thursday 26 November 2009
जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
इस गीत की रेकार्डिंग भी हो चुकी है
मन की जिन्दगी, किसको मिली यहाँ
जिसको मिली यहाँ,खुश वो भी नहीं यहाँ
जैसी मिले जिन्दगी, जीते चले जाएँ
कभी खुदका गम
कभी जग का गम
पीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
एक नहीं कई एक मिलेंगे
दिल को दुखाने वाले
झुकने वाले नहीं मिलेंगे
मिलेंगे झुकाने वाले
चाक गरेबां हो जाए तो
सींते चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
साथ नहीं कोई देता है
देखो प्यारे यहाँ
कहने को सब साथी हैं
देखो सारे यहाँ
जितनी साँसे मिली हैं प्यारे
खींचे चले जायें...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
उतना इकठ्ठा करो कि
जिससे जिन्दगी पलती रहे
प्यार- मोहब्बत से मिलके
जिन्दगी चलती रहे
रीते ही हम आये हैं
रीते चले जायें ...
जैसी मिले जिन्दगी,जीते चले जाएँ
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