गुरुवार, 15 जून 2017

न जाने फेसबुक वो क्यों, छोड़ कर चले गए


न जाने वो फेसबुक क्यों, छोड़ कर चले गए।
दिल अपने दीवाने का क्यों, तोड़ कर चले गए।। दिल खूब बहलता था मेरा देख-देख कर उन्हें, दिल बड़ी बेदर्दी से क्यों, झकझोड़ कर चले गए।।
अब और जीने की कोई अरमान न रही बाकी, खता बताते अपना मुख क्यों, मोड़ कर चले गए।।
ग़मों के सहारे बेखबर जिए जा रहा था जिंदगी, खुशियों से मेरा रिश्ता क्यों, जोड़ कर चले गए।। वो थे तो खूब दिखते थे दोनों ही जहाँ मुझको, रौशनी लेकर आखों को क्यों,फोड़ कर चले गए।।
-प्रेम फ़र्रुखाबादी