Saturday 31 October 2009
अगर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते
अगर हिन्दोस्तान में भ्रष्ट अफसर न होते
लोगों को रुलाते तो तब भी वो नहीं रोते।
ये कमीशन खाने के लिए खूब उकसाते हैं
परसेंट से खाते हैं और सबको खिलाते हैं ।
जब इच्छा होती है तो अपने दफ्तर जाते हैं
जब इच्छा होती है तो वो अपने घर आते हैं।
ये कभी किसी से डरते नहीं सबको डराते हैं
हाँ हजूरी करते नहीं हैं बल्कि बस कराते हैं।
हमेशा ही सबको अपना ये रुतबा दिखाते हैं
गर कोई न देखे तो उसको सबक सिखाते हैं।
सरकारी अफसरों के तो भइया बस मजे हैं
क्योंकि मजे करने में तो ये बिल्कुल मजे हैं।
जिम्मेदारी लेते हैं बहुत कम पर देते जादा हैं
ये अफसर नहीं हैं बस ये तो आज के राजा हैं।
प्रजातंत्र में अफसरों को पुरी-पूरी आजादी है
कानून को तोड़ने मरोड़ने के ये खूब आदी हैं।
जो भी इनके मन को भाता है ये वही करते हैं
फायदे की बातों पर ही अपना ध्यान धरते हैं।
कहते हैं कि जनता समस्याएं नेता लोग जाने
वही जाते जनता के आगे अपना हाथ फैलाने।
अफसर लोग जनता के सामने कभी न जायें
तो उनके लिए वो भला तकलीफ क्यों उठायें।
उनका सहारा उनकी किस्मत उनका खुदा है
सीनियर अफसरों ने अपनी विदाई में कहा है।
सरकारी धन को खाने में ये अफसर माहिर हैं
ओखली के भीतर रहते मगर चोट के बाहिर हैं।
इनसे पंगा लेने का मतलब आ बैल मुझे मार
बस जपते रहिये मंत्र जय हो प्रजातंत्र सरकार!
Wednesday 21 October 2009
जैसा भी बोओगे दोस्त वैसा ही काटोगे।
दिल में गर प्यार होगा तो ही बाँटोगे।
हुनर है तभी कुछ कर पाओगे वरना
उमर भर किसी के तलवे ही चाटोगे।
पहले ख़ुद तो सुधर जाओ फ़िर सुधारो
सुधरे बिना किसी को कैसे सुधारोगे।
दुश्मन दोस्त कौन समझना मुश्किल
ज्ञान बिन दुश्मन दोस्त कैसे छांटोगे।
अगर दुश्मनी निभाने से फुर्सत मिले
तब ही दिल से दिल की दूरी पाटोगे।
Sunday 18 October 2009
ओओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा
ओओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा।
तेरी हरकतों से हो न, जीना मुश्किल मेरा।
ओओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा।
जिसको भी तू देखे, हो जाए क्यों दीवाना
हाय ,तेरी खातिर मुझको, पड़ता घबराना
मान जा मेरा कहना
सच कहता हूँ वरना
कहीं तेरी वजह से, हो न जाए कोई लफडा।
ओओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो यूँ फ़िदा।
समझा समझा कर मैं, तुझको थक गया हूँ
तेरी कसम मैं तो, बिल्कुल ही पक गया हूँ
क्या हैं तेरे इरादे
मुझको ये बतादे
बहुत सता लिया मुझको, अब और न सता।
ओओ दिल मेरे, सुन जरा, मत हो, यूँ फ़िदा।
Friday 16 October 2009
दिल से जो होता है जग में सभी का
उसको ही कहते हैं फ़रिश्ता जमीं का
भलाई का फल भला ही मिलेगा
उसके पीछे पीछे हर कोई चलेगा
आदमी वो ही भला करे आदमी का
उसको ही कहते फ़रिश्ता जमीं का
गैरों के दुःख को जो अपना बनाले
प्यार से बढ़ के जो गले से लगाले
करे दूर दुःख जो हर एक दुखी का
उसको ही कहते फ़रिश्ता जमीं का
Tuesday 13 October 2009
इस तरह तुम बसे मेरी आँखों में ।
तेरी खुश्बू सी लगे मेरी सांसों में ।
खाने को खाया मीठा बहुत मगर
उतना नहीं जितना तेरी बातों में।
दिन तो गुजर जाते हैं जैसे तैसे
पर जुदाई खले मुझे तेरी रातों में।
कुछ भी सुहाता नहीं है तेरे बगैर
देखूँ तस्वीर लेकर तेरी हाथों में ।
लगा हुआ पहरा चारों तरफ़ से
जी रही जैसे जीभ मेरी दाँतों में।
तुझसा जादूगर नहीं होगा कोई
दिल ले गया दो ही मुलाकातों में।
Sunday 4 October 2009
उनसे दो बातें क्या करली उनका दम घुटने लगा ।
उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका सब कुछ लुटने लगा ।
तारीफ इसलिए की जाती कि आत्मीयता बनी रहे
इसका मतलब यह नहीं कि जमाना झुकने लगा।
वो बहुत खूबसूरत हैं किसी ने उनसे जो कह दिया
फ़िर क्या फ़िर तो चाँद बदली में जाके छुपने लगा।
एक से एक पड़े खूबसूरत चेहरे खूबसूरत जहाँ में
जाने हर कोई शख्श उनकी तरफ़ क्यों मुड़ने लगा।
Saturday 3 October 2009
जब जब मैंने सच बोला तो अपनों से हम दूर हुए।
अपनों से जो सपने देखे थे सपने वो सब चूर हुए।
जब भी जिसकी पड़ी जरूरत ले गए वो मेरे घर से
मुझको जरूरत पड़ी तो भोलेपन से वो मजबूर हुए।
साथ बैठना उठाना था जब थे हम हालात के मारे
मुझसे फिरने लगे हैं ज्यों दौलत से वो भरपूर हुए।
एक दूजे के बिना कभी दूर नहीं रह पाए हम दोनों
मुझको नज़रों से गिरा दिया जब से वो मशहूर हुए।
हम न करते तारीफ तो उन्हें पता नहीं चल पाता
पता लगा जब हम से तो दुनिया की वो हूर हुए ।
Sunday 27 September 2009
बनाके क्यों बिगाडा रे, बिगाडा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले -२
मुस्काके क्यों बनाया रे,
प्यार मेरा मंजूर नहीं था तो,
दिल में मेरे दिलवर बनके,
मुझको रिझाके,अपना बनाके,
कौन करेगा प्यार किसी से,
दिलवर का हक़ उसको नहीं,
कसमें खिलाके, ख़ुद भी खाके,
Thursday 24 September 2009
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
शाम सवेरे पूजा करूँगा धरूँगा तेरा ध्यान।
मूरख ज्ञानी ज्ञानी बन जाता है
जाये जहाँ वहाँ आदर पाता है
मुझको भी मिले सम्मान ।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
अंधकार से मुझको उबारो
भवसागर से मुझको तारो
मेरा भी करो कल्याण ।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
तेरी शरण में जो भी आया
जो भी माँगा वो ही पाया
दो मुझको भी वरदान ।
विद्या देवी सरस्वती माता दे दो मुझको ज्ञान।
Monday 21 September 2009
एक पनिहारिन कुए पर पानी भरने जाती है और दोहा वहीं से शुरू होता है ।
पानी ऐंचत झुकी कुआ में , झलके अंग अनोखे ।
मानो जमुना जी में हों, गुम्बद ताजमहल के ।
आप सब भी इस दोहे का आनंद लें .धन्यबाद!!
Sunday 20 September 2009
आओ हम डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें
आओ हम डांस करें मिल के ख़ुदको एडवांस करें।
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
आँखों में आँखों डालो दिलवर दिल को उछालो
मस्ती में मौज मना लो बांहों में बांहें को डालो
जीवन तेरे बिना क्या जीना सुन ओ मेरी हंसीना
होगा इन आँखों से पीना होगा इन बांहों में जीना
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
देखो छेडो न मुझको कुछ कुछ होता है मुझको
क्या कुछ होता है तुझको बांहों में ले लो मुझको
बदन यह गोरा गोरा देखो पगलाये है मन मोरा
चूमें हम थोड़ा थोड़ा मिलके झूमें हम थोड़ा थोडा
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
देखो सब झूम रहे हैं एक दूजे को सब चूम रहे है
मस्ती में सब कूक रहे हैं पर हम क्यों चूक रहे हैं
तुझसा ना कोई मिला,मिला तो दिल मेरा खिला
दिल में ना कोई गिला मस्ती में पी और पिला
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
मेरे सपनों के राजा थोडा सा और करीब आ जा
मस्ती में मुझ पर छा जा मुझसे अब दूर ना जा
होंगे न हम कभी जुदा तुझसे आने लगा है मजा
भायी है हर तेरी अदा चाहे मिले अब कोई सजा
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
मुझको संभालो मैं गयी देखो पागल दीवानी हुई
कुछ भी अब दिखता नहीं मन मारे चुकता नहीं
मेरे सपनों की रानी हाय तेरी यह मस्त जवानी
होने लगी ये पानी पानी छाने लगी मुझपे रवानी
मौसम हँसीन दिल भी रंगीन आओ रोमांस करें।
हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की
हाय तेरे रूप ने मेरी हालत ख़राब की।
ऐसी है मस्ती दिलवर तेरे शबाव की।
प्यार से तुमने मुझे देख जाने जिगर
मेरी जिन्दगी ही तुमने लाजवाब की।
जिसे मैंने तरासा था ख्वाबों में कभी
वो ही तमन्ना हो तुम मेरे ख्वाब की।
जब से मैंने पी ली तेरी इन आँखों से
मुझे जरूरत क्या पड़ी अब शराब की।
जिन्दगी यूँ ही कट जायेगी मस्ती में
बस मुझपे यूँ इनायत रहे जनाब की।
Friday 18 September 2009
पा कर मन का मोहना
पा कर मन का मोहना
कैसे हो खुदको रोकना
कौन सोच में डूबा रे मन
प्यार में खुदको झोकना।
जब से देखा है मैंने उसको
होश नहीं बिल्कुल मुझको
सच कहूँ ऐसे में किसी का
भाये ना मुझको टोकना।
ख़ुद में ही मैं लगी हूँ डूबने
ख़ुदको ही मैं लगी हूँ ढूँढने
डूबती जाऊँ यूँ ही प्यार में
भाये ना किसी से बोलना।
उसकी शरण जब से गई हूँ
उसी की हो के मैं रह गई हूँ
भाने लगा अब तो मन को
साथ लेकर उसको डोलना।
वो ही दर्द दें वो ही दवा करें
वो ही दर्द दें वो ही दवा करें।
कोई बतलाये हम क्या करें।
उन्हें तारीफ अच्छी न लगे
मालूम नहीं क्यों सजा करें।
सिर्फ़ मेरे ही हो कर रहें वो
आप सब मिलके दुआ करें।
एक बार उनसे मैंने ये कहा
खूबसूरत हो थोड़ा छुपा करें।
Thursday 17 September 2009
ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है
ऐ मेरे दिल बता इतना बेकरार क्यों होता है।
जो नहीं आयेगा उसका इंतज़ार क्यों होता है।
जिसने यूँ ही तड़पने के लिए छोड़ दिया मुझे
ऐसे दिलवर पर तुझको ऐतबार क्यों होता है।
वफ़ा शब्द का जिनको मायने तक पता नहीं
जाने वफादारों में उनका शुमार क्यों होता है।
मैंने तो दिलो जान से उनसे वफ़ा निभाई थी
मुझ सा वफादार फ़िर नागवार क्यों होता है।
Saturday 12 September 2009
दोस्त दिल की मजबूरी भूल बनके रह गयी
दोस्त दिल की मजबूरी भूल बनके रह गयी ।
देखते देखते सपनों दुनिया धम से ढह गयी।
उनकी सोच थी कुछ और मेरी थी कुछ और
इसी सोच में दोनों की जिन्दगी बह गयी।
बिना फैसलों के कुछ भी हासिल नहीं होता
मेरी किस्मत मुझसे रुला करके कह गयी।
दिल बहला लेता अब भी उसके ख्यालों से
मैं नहीं सह पाया हूँ जुदाई पर वो सह गयी।
Wednesday 9 September 2009
कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है
कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है।
जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है।
अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त
उसका जीना जीना जो रोशनी बाँटता है।
किसी की कभी भी जान ले सकता है दुष्ट
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है।
किसी को रुलादे ऐसा गम किस काम का
उसको सराहो जो सब को हँसी बाँटता है।
बुझदिल लोग जिया करते हैं उदासियों में
दिलदार वही जो सबको ताजगी बाँटता है।
Sunday 6 September 2009
माँ की लोरी प्यारी बेटी के लिए
चंदा की चाँदनी जैसी
साथ में अपने सारे जहाँ की
मारे खुशी के लगा झूमने
तुझको पाकर लगता है
मेरे जीवन में आके तूने
मेरे मन मन्दिर में तू
तेरी सूरत में मुझको
देखके तेरा रूप सलोना
धन्य हुआ है जीवन मेरा
मैं तो कहूँ सबको ही मिले
तेरे आने से मेरे सूने घर में
Thursday 3 September 2009
ये गोरे गोरे गाल तेरे लिए
ये गोरे गोरे गाल तेरे लिए
ये काले काले बाल तेरे लिए
तू है मेरा और मैं हूँ तेरी
ये प्यारे सारा माल लिए ।
तेरे लिए मैं खुदको सजाती
जैसा तू चाहे वैसा बनाती
तेरी मस्ती में मदमाती
ये मस्ती भरी चाल तेरे लिए।
तुझसे मेरी खुशियाँ जाना
तुझसे मेरी दुनिया जाना
मैं दीवानी तू है दीवाना
हूँ दीवानी बेहाल तेरे लिए।
मेरे दिल का तू शहजादा
मैं तेरी रानी तू मेरा राजा
आजा मेरे दिल में समाजा
दूँगी खुदको उछाल तेरे लिए।
Tuesday 1 September 2009
जीवन में तुमसे ही हैं फूल झरे
सूरत तेरी आँखों से टारे न टरे।
कहाँ छुप गए कहके मिलन की
दिल कब से तेरा इंतज़ार करे।
साथ तेरे जो देखे हैं ख्वाब मैंने
ऐसा न हो रह जायें धरे के धरे।
तेरे बिना कैसे होगा जीना मेरा
तेरे बगैर जिन्दगी तारे न तरे।
दुनिया मेरी रंगीन है तुमसे ही
जिन्दगी लगे ही न तुमसे परे।
मेरे सामने ही रहा करो जानम
तेरी दूरियों से दिल बहुत डरे।
Monday 31 August 2009
प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं
प्यार के समंदर उनमें सूख गए हैं।
या फ़िर वो मुझसे अब ऊब गए हैं।
क्या सोचा था और ये क्या हो गया
लगता फैसला कर के चूक गए हैं।
और कहीं दिल भी तो नहीं लगता
उनकी खातिर तन मन टूट गए हैं।
अब क्या प्यार नसीब होगा उनका
यह सोच के ग़मों में हम डूब गए हैं।
कुछ भी कहना अब मुमकिन नहीं
या तो हम लुटे हैं या वो लूट गए हैं।
Friday 28 August 2009
मुझे चढ़ गयो प्यार का बुखार
उतारो करो जल्दी बलमा
देखो अब और न करो बेकरार
उतारो करो जल्दी बलमा।
हीर के राँझे को लाओ
लैला के मजनूँ को लाओ
जाओ जाओ जल्दी जाओ
अब न बिल्कुल देर लगाओ
देखो देर न करो सरकार
उतारो करो जल्दी बलमा।
तड़प तड़प के मरि न जाऊं
ऐसे में कुछ करि न जाऊं
किसी तरह में चैन न पाऊँ
कहाँ तक ख़ुद को तडपाऊँ
खड़े यूँ ही न रहो लाचार
उतारो करो जल्दी बलमा।
तन मन मेरा जलने लगा है
मति मेरी यह हरने लगा है
सोच सोच कर डरने लगा है
अपने आप ही मरने लगा है
जीना मेरा हुआ है दुश्वार
उतारो करो जल्दी बलमा।
Thursday 27 August 2009
कोई मुझको यह बतादे कैसे उनको हम मनायें
कोई मुझको यह बतादे कैसे उनको हम मनायें।
पहले की तरह दिलवर कैसे उनको हम बनायें।
वफ़ा ही वफ़ा है दिल में नहीं वेवफा हूँ बिल्कुल
पर क्या करुँ यकीं यह कैसे उनको हम दिलायें।
दिल चीर के कभी भी देख लें वो नजदीक आकर
प्यार ही है इस दिल में कैसे उनको हम दिखायें।
जीना नहीं है जीना फ़िर भी जीने को जी रहा हूँ
हालत क्या हो गयी यह कैसे उनको हम बतायें।
Tuesday 25 August 2009
तेरे लिए मैं लाया हूँ प्यार भरा यह दिल
क्या करुँ मैं जिस से तू हो जाए हासिल।
गोरा गोरा बदन तुम्हारा मुझे लुभाए रे
जितना देखूँ उतना पागल मुझे बनाये रे
चार चाँद लगाये मुखपे काला काला तिल।
तुझको पाना ही मेरा अरमान जाने जाना
तेरा मेरा यह रिश्ता लगता सदियों पुराना
तुझको पा के जीवन मुझको जाएगा मिल।
प्यार की मस्ती में होगी प्यारी मुलाकातें
एक दूजे की बाँहों में गुजरेंगी अपनी रातें
प्यार की खुश्बू में यह दिल जाएगा खिल।
Monday 24 August 2009
मेरे भोले बाबा सुन लो, मन की पुकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को
ठुकराया है दुनिया ने, देकर खूब भरोसा
अब न खाने वाला, इस दुनिया से धोखा
करो कृपा न भूलूँ मैं, तेरे इस उपकार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।
जीवन बन गया भोले, सचमुच एक पहेली
जाने कब सुलझेगी, मेरे जीवन की पहेली
राह दिखाना भोले, अपने भक्त लाचार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।
तेरे सिवा न कोई है, जिसको कहूँ मैं अपना
लगता होगा पूरा न , जो भी देखा है सपना
तुम्ही जानो कैसे, मिलेगा चैन बेकरार को।
शरण अपनी ले लो, ठुकरा दूँगा संसार को।
Sunday 23 August 2009
सैयां उसके बावरे, उस से लिपटत रोज।
लिपटके जाने कौन सी करते रहते खोज॥
करते रहते खोज खोज न पाए हैं कुछ भी।
तन टूटा और मन टूटा हो गए हैं भुस भी॥
कहे प्रेम कविराय जियो और जीने दो ना।
परमेश्वर पिता का सुबह-शाम रस लो ना॥
Friday 21 August 2009
जलवा हुश्न जवानी का मुझको दिखाके जा ना।
जलवा हुश्न जवानी का मुझको दिखाके जा ना।
मोह लिया है तुमने मुझको मुसकराके जा ना।
तुझसे जो मिलता जन्नत में भी वो सकून नहीं
मेरी हो जाओ रखेंगे दिल में तुझे सजाके जा ना।
जीवन के तर्कों से मुझे कुछ भी लेना देना नहीं
मैंने अपने ख्यालों में ये तुझको समाके जा ना।
होश नहीं है मुझको हाय जब से तुझको देखा है
होश में लादो जब चाहे मुझे पास बुलाके जा ना।
Thursday 20 August 2009
हम हैं आलसी राम
हम हैं आलसी राम।
कोई कहे कुछ करने को तो करते नहीं हम काम।
बिन करे ही मन का हो जाए सोचूँ यही दिल थाम।
हँसीनों से घिरा रहूँ और चलते रहें जाम पर जाम।
देखके हमें हर कोई पहिचाने हो ऐसा हमारा नाम।
रहने को घर ऐसा मिले जिसे कहते हों सब धाम।
खुशियाँ चूमें कदम हमारे चाहे सुबह हो चाहे शाम।
Tuesday 18 August 2009
जब से मिला है तेरा प्यार तब से खिला मेरा संसार
जब से मिला है तेरा प्यार तब से खिला मेरा संसार।
तेरी कसम तेरे प्यार में मिलने लगा है चैनो करार।
दीवाना तूने मुझको बनाया अपने इस रूप का गोरी
सदा रहे यूँ ही छायी तुझपे दिलवर यह मस्त बहार।
लगती हो तुम मुझको कोई ख्वाब किसी शायर का
तुझको देख-देख मचलती है मेरी तबियत बार-बार।
भला तारीफ करुँ मैं तेरी कैसे मुझे शब्द नहीं मिलते
तारीफ से तुम हो बहुत परे मेरी हम दम जाने-बहार।
ऊपर से नीचे तक तुम बस लगती मुझको रेशम सी
तुझे अपने अंग लगाये रखूँ मैं करे अंग-अंग पुकार।
खुल गई है मेरी किस्मत तुझको पाकर मेरे दिलवर
मुझको प्यारा लगने लगा सचमुच सारा यह संसार।
Sunday 16 August 2009
कोई पी रहा दोस्तों में कोई पी रहा अकेले में
ढूँढ रहा हर कोई साथी दुनिया के इस मेले में।
एक न एक दिन सकूं उसे जरूर मिल जाएगा
पर उसे सकूं नहीं मिलता दुनिया के झमेले में।
किसी तरह आनंद न आये तो कोई क्या करे
हर किसी की जुबान पर यही सवाल रहता है।
कहीं भी कोई हँसी न उडादे उसके जज्बात की
यही सोचकर वो अक्सर चुपचाप सा रहता है।
आजकल मुहब्बत दिलों से मिटती जा रही है
दुनिया अपने आप में ही सिमटती जा रही है।
किसी को भी परवाह नहीं है किसी की जहाँ में
पता नहीं ये दुनिया कहाँ भटकती जा रही है।
ग़मों से ही खुशियों की पहचान हुआ करती है
खुशियों से ही ग़मों की पहचान हुआ करती है।
बहुत कम ही लोग समझते हैं इस दुनिया में
जिन्दगी चार दिन की महमान हुआ करती है।
Friday 14 August 2009
खुश हो के दूसरों का खुश जीवन किया करो
खुश हो के दूसरों का खुश जीवन किया करो।
खाओ पियो पल दो पल प्रहसन किया करो।
सही और ग़लत का फैसला अगर न हो पाय
तो अकेले बैठकर मन में मंथन किया करो।
आप कितने अच्छे हो कितने बुरे हो दोस्त
अपने ही कर्मों का सामने दर्पण किया करो।
इतना कमा कर आखिर कहाँ ले के जाओगे
थोड़ा बहुत असहायों में अर्पण किया करो।
लोग तुमसे बात करने को व्याकुल हो जाए
कुछ आप ख़ुद में पैदा आकर्षण किया करो।
भूल से बहक न जाओ अपनी भावनाओं में
अपने आप पर भी थोड़ा शासन किया करो।
क्यों सिकुड़ कर जी रहे हो आप जिंदगी को
दौलत भी फुर्सत भी तो देशाटन किया करो।
यह मन पवित्रता से दयालुता से भर जाएगा
जो भूखे सोते उनको दान राशन किया करो।
Thursday 13 August 2009
जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें
जलने वाले जला करें आओ मिलके मज़ा करें।
बनके दीपक बाती रौशन जीवन की शमा करें।
रहकर अकेले जीवन सचमुच जिया नहीं जाए
आओ प्यार में रच बस एक दूजे को जवां करें।
आख़िर हम इंसान हैं गलती हो ही जाया करती
क्यों न छोड़ शिकवे गिले एक दूजे को क्षमा करें।
आज कमाकर आज गंवाया यह भी कोई जीना
बुरे समय के लिए भी जीवन में थोड़ा जमा करें।
कितना भी रोकिये ख़ुद को गुस्सा आ ही जाता
बेहतर होगा सुनने को भी कभी कभी थमा करें।
अकड़ में रहके सुखमय जीवन जिया नहीं जाए
मुहब्बत बढेगी आपस में एक दूजे को नमा करें।
Wednesday 12 August 2009
मेरी आँखों की नीदों को उड़ाके वो गए
मेरी आँखों की नीदों को उड़ाके वो गए।
रिश्ता दिल से दिल का जुडाके वो गए।
सब कुछ ठीक ही चल रहा था अब तक
जाने किस बात पे मुँह फुलाके वो गए।
रूठ भी गए तो मना लेंगे उन्हें प्यार से
हाय झटक मेरी बहियाँ छुडाके वो गए।
सोचा गुजार देंगे जीवन यह साथ-साथ
झुकना तो दूर मुझको झुकाके वो गए।
मन का दुःख अब किस से कहने जायें
कसम से तन-मन मेरा दुखाके वो गए।
Tuesday 11 August 2009
ज़रा- ज़रा सी बात पर अपने रूठने लगे।
इसी वजह से आजकल रिश्ते टूटने लगे।
कैसे निभें रिश्ते बताओ दूर तक भला
अपनत्व के सागर दिलों में सूखने लगे।
कैसे निकलें घर से माँ बहिन- बेटियाँ
गली-गली में गुंडे मवाली घूमने लगे।
बढ़ रहे अपराध दिनोंदिन समाज में
गुनाह करके लोग बेगुनाह छूटने लगे।
जल्दी से हर कोई बनना चाहता अमीर
जिसको मिलता मौका जहाँ लूटने लगे।
Sunday 9 August 2009
बंसी बजैया कृष्ण कन्हैया
बंसी बजैया, कृष्ण कन्हैया
आयी हूँ ,तेरे दरबार में
हाँ, आयी हूँ, तेरे दरबार में
कोई नहीं सिवा, तेरे कन्हैया
मेरा इस संसार में
हाँ, मेरा इस संसार में।
तेरी शरण में सुख मिलता है
तन खिलता है, मन खिलता है।
है मुझको भरोसा, तू सुन लेगा
विनती मेरी, एक पुकार में
हाँ, विनती मेरी,एक पुकार में।
मतलब की है, दुनिया सारी
दुनिया जीती है, पर मैं हारी
सुध बुध अपनी, भूल गई मैं
पागल होकर, तेरे प्यार में
हाँ, पागल होकर ,तेरे प्यार में।
बंसी बजैया, कृष्ण कन्हैया
आयी हूँ ,तेरे दरबार में
हाँ, आयी हूँ, तेरे दरबार में
कोई नहीं सिवा, तेरे कन्हैया
मेरा इस संसार में
हाँ, मेरा इस संसार में।
Saturday 8 August 2009
तुम्हारे जितना मुझे कोई भाता नहीं है।
तुम्हारे सिवाय नज़र कोई आता नहीं है।
लगता है तुमने भी मुझको दिल दे दिया
वरना यूँ देख के कोई मुस्कराता नहीं है।
मेरी किस्मत मेरे साथ जरूर रही होगी
ऐसे आसानी से प्यार कोई पाता नहीं है।
मुझे बड़ा सकूं मिलता है तेरे ख्यालों में
यूँ ही दिल गीत कोई गुनगुनाता नहीं है।
Friday 7 August 2009
हिंदुस्तान के वीर सैनिक
सीमाओं की है रक्षा तुमसे
तुमसे यह हिंदुस्तान है
हिंदुस्तान के वीर सैनिको
तुमपे हमको अभिमान है।
घरवार छोड़ सीमाओं पर
बैठे हो आँखें लगाये
उसे मिटादो जो भी दुश्मन
सीमाएं लाँघ के आए
तुमसे देश का गौरव है
तुमसे देश की शान हैं।
देशवासियों की खातिर
सीमाओं पर कष्ट उठाते हो
अपनी नीदें खो करके
हमको बेखौफ सुलाते हो
तुम सब के लिए हमारे
दिलों में बड़ा सम्मान है।
तुम्हारी बहादुरी के आगे
दुश्मन टिक नहीं सकता
तुम्हारी पकड़ छुडा करके
दुश्मन भाग नहीं सकता
धन्य तुम्हारा है देश प्रेम
धन्य तुम्हारा बलिदान है।
हिंदुस्तान के वीर सैनिक
दुनिया में नम्बर एक हैं
तुम्हारी वीरता की गाथाएं
एक नहीं कई अनेक हैं
कभी न मुडके पीछे देखो
ऐसी तुम्हारी पहिचान है।
धन्य हैं वो माँएं जिन्होंने
तुम सा वीर जवान जनां
मातृभूमि की रक्षा खातिर
कर देते हो खुदको फ़ना
देशवासियों के काम आए
जीवन तुम्हारा महान है।
Thursday 6 August 2009
अपराध की दुनिया दुनिया दल दल
फंस जाए जो भी वो पाए न निकल
सोचने बैठे कभी तो सोचता ही रहे
किसी तरह न सूझे कोई उसको हल।
पता नहीं जाने कब क्या हो जाए
मारने को निकले ख़ुद मर जाए
मौत मडलाये सिर पर हर एक पल।
छुप छुप जीना भी कोई जीना है
ऐसे जीवन ने सुख चैन छीना है
आज का भरोसा नहीं क्या होगा कल।
पीछा न छोडे कर्मों का लेखा जोखा
काटता वो ही इन्सां जो भी वो बोता
भोगना ही पड़ता यहाँ कर्मों का फल।
Wednesday 5 August 2009
खता हुई है क्या मुझसे जो खुदको यों जुदा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....
मात-पिता की हम हैं दो ही संताने
मैं जानू यह भइया और तू भी जाने
मैंने तो माना मगर यह तू नहीं माने
एक खून थे हम और तुम गैर मुझे क्यों बना दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....
शायद भाभी ने कुछ कह दिया होगा
मेरे खिलाफ तुमको भर दिया होगा
अपने पक्ष में तुमको कर लिया होगा
जीते जी ही तुमने अपनी बहिन को क्यों रुला दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....
जब से हुई हूँ मैं घर से पराई भइया
याद न मेरी तुम्हें कभी आयी भइया
जाने कौन सी घड़ी की मैं जाई भइया
ख़ुद न सोचा तुमने कुछ भी भाभी का क्यों कहा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....
भाई और बहिन की दीवार है भाभी
होती ऐसी सचमुच बेकार है भाभी
भइया की सुख दुःख संसार है भाभी
भइया मेरा बुरा नहीं पर भाभी ने ही मुझे छुडा दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....
आखिर तुम क्या चाहते हो बतलाओ हमें
आखिर तुम क्या चाहते हो बतलाओ हमें।
तुमको किसने भड़काया है बतलाओ हमें।
जिस थाली में खाओ उसी में ही छेद करो
यह पाठ किसने पढाया है बतलाओ हमें।
कसूरबारों को मारो तो जाने हम भी तुम्हें
बेकसूरों ने क्या बिगाडा है बतलाओ हमें।
तुम चाहे पचास मारो चाहे फ़िर सौ मारो
अब तक भला क्या पाया है बतलाओ हमें।
आग लगादी है तुमने इस प्यारे वतन में
क्यों तरस ही नहीं खाया है बतलाओ हमें।
एक दिन तुम ख़ुद भी मर जाओगे ऐसे ही
क्यों व्यर्थ जीवन गंवाया है बतलाओ हमें।
Tuesday 4 August 2009
एक - दूसरे के साथ चले हैं हम दोनों ।
मस्ती में मस्ती से खिले हैं हम दोनों ।
लाख लगाले ये दुनिया पहरा फ़िर भी
जब भी चाहा तब ही मिले हैं हम दोनों ।
रंग गए तन से मन से मिलके होली में
रंग एक दूसरे को खूब मले हैं हम दोनों।
सफल हुआ है जीवन अपना धरती पर
प्यार से मिलकर फूले फले हैं हम दोनों।
Monday 3 August 2009
काका जी का रोज़ पढ़े जो भी कुंडलिया छंद।
वो चिंता न बिल्कुल करे बस हो जाए निद्वंद।
बस हो जाए निद्वंद करे खुशियों का अनुभव
फ़िर जो भी काम करे काम हो जाये सम्भव।
कहे प्रेम कविराय लगाओ खूब भइया ठहाका
खुशियों के दाता हैं भारत के हाथरसी काका।
दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है
दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है।
दिल को तडपती है जब तेरी याद आती है।
छाया हुआ है अँधेरा दिखता नहीं है सवेरा
तबियत घबराती है जब तेरी याद आती है।
दिल है भारी भारी झूठ नहीं कसम तुम्हारी
दिल को तरसाती है जब तेरी याद आती है।
देख रहा हूँ तेरी राहें फैला कर अपनी बाहें
साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है।
Sunday 2 August 2009
दिल जल रहा मगर धुआं नहीं यारो।
दिल से बना कोई अपना नहीं यारो।
अकेला हूँ अकेला ही सही मैं फ़िर भी
जी लूँगा गर कोई महरबाँ नहीं यारो।
लुटने को लुट रहे हैं बहुत दुनिया में
पर मुझसा लुटा कोई यहाँ नहीं यारो।
सकूँ की तलाश में भटका हूँ उमर भर
जहाँ पे ढूँढा वहाँ पे मिला नहीं यारो।
आरजू थी कि कोई हमसफ़र मिलता
भटकता रहा मैं कहाँ कहाँ नहीं यारो।
Saturday 1 August 2009
भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है।
इसीलिए सभी को यहाँ पर कष्ट ही कष्ट है।
आजकल कोई भी किसी की सुनता ही नहीं
क्योंकि हरकोई अपने आप में हुआ मस्त है।
हमेशा सत्य ही जीतता यह किताबों में पढ़ा
मगर आज तो झूठ जीते यह हो रहा पुष्ट है।
हर कोई तो सितमगर है यहाँ अपने आप में
सितम करके इन्सां कितना बन गया दुष्ट है।
समा गई अशांति आज हर दिलो दिमाग में
जिससे भी बोलिये उसमें झलकता स्पष्ट है।
कोई अगर किसी से निभाए तो कैसे निभाए
बिना बात के ही हर कोई हर किसी से रुष्ट है।
वो सामने से गुजरते हैं मुझको देखते हुए ।
नज़रों ही नज़रों में अपना दिल फेकते हुए।
मेरी समझ में तो कभी कुछ भी नहीं आया
जाने उन्हें क्या मिलता मुझको छेड़ते हुए।
बात करना चाहो तो बात ही नहीं करते वो
अब मुझे भी मज़ा आने लगा उन्हें हेरते हुए।
हिम्मत जुटा के एक दिन मैंने कह ही दिया
आओ हम तुम जिन्दगी गुजारते खेलते हुए।
नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता है वो बोल पड़े
पाने से बेहतर लगे पाने को पापड़ बेलते हुए।
Friday 31 July 2009
जैसे वो भूले हमें वैसे ही मैं भी भूल गई
पर जब से सावन आयो मन तरसत है।
ठंडी - ठंडी हवा चले तन पर फुहार पड़े
पिया से मिलन की मेरी बड़ी हसरत है।
जब जब चमके हाय बादलों में बिजली
बिजली की कड़क संग दिल धडकत है।
बदन पर पानी गिरे गिरते ही जल जाए
दैया ऐसे आग मेरे अंग-अंग दहकत है।
Thursday 30 July 2009
ऊधौ उठि जाउ तुम अब हमारे सामने से
ऐसी बातें करत तुम को नहीं शरम आवे।
हमारे तो हिय में कन्हैया की मूरत बसी है
ब्रह्म उपासना बताउ हमें कौन जतन भावे।
गोपियाँ तो ऊधौ से खूब खिसियाती जाती
पर ऊधौ ज्ञान गठरी अपनी खोलत जावे।
कहे प्रेम बोली मिलि गोपियाँ सब ऊधौ से
अंधी तो तब जाने जब भरि बाँहों में आवे।
कोई नहीं है हमारा यहाँ ,
है मतलबी यह सारा जहाँ।
जिसको हमने अपना बनाया,
समझा उसने पराया यहाँ।
कहने को सब रिश्ते नाते,
होते तब तक जब तक खाते
मानो या न मानो कोई यह,
खाब्बुओं का है मारा जहाँ।
बेदर्दों की यह दुनिया है,
दुनिया भी क्या यह दुनिया है
जब भी देखा आजमाकर के,
मिलता नहीं है सहारा यहाँ।
अपनी न होगी दुनिया कभी,
चाहे मिटादो अपनी जिन्दगी
कहते कुछ भी बनता नहीं है,
जीवन बड़ा ही बेचारा यहाँ।
Tuesday 28 July 2009
कभी कभी अपने ही फैसले हमें नहीं सुहाते हैं।
अन्दर ही अन्दर हम चीखते और चिल्लाते हैं।
दुनिया में लोग अपनी सोच पे ही लिया करते
कभी खुदको रुलाते तो कभी खुदको हँसाते हैं।
अपनों की सलाह भी हमको मान लेनी चाहिए
जो भी मानते वो अक्सर ही आगे बढ़ जाते हैं।
जो लेते रहते सीख गैरों की गलतियों से सदा
वही लोग अपने को जीवन में बेहतर बनाते हैं।
Monday 27 July 2009
इस दुनिया में कौन है अपना कहना मुश्किल है।
जाने कौन कब दे जाए धोखा कहना मुश्किल है।
कहने को सब ही कहते हैं कि हम साथ निभाएंगे
लेकिन कौन निभाएगा कब तक कहना मुश्किल।
अक्सर लोग भरोसे में लेकर ही तोड़ देते हैं भरोसा
आख़िर किस पर हम करें भरोसा कहना मुश्किल है।
कहते हैं मुहब्बत और जंग में सब कुछ जायज है
पर इनके सिवा और बचा क्या कहना मुश्किल है।
Sunday 26 July 2009
अपनों को अपनत्व दिखाएँ मिलें तो अहसास कराएँ
अपनों को अपनत्व दिखाएँ मिलें तो अहसास कराएँ।
जिन्दगी आसान होगी साथ बैठें पल दो पल बिताएँ।
त्याग क्षमा और सहनशीलता से रिश्ते जिन्दा रहते
गर भरोसा न हो तो इनको जीवन में जरूर अपनाएँ।
जरूरत से ज्यादा बातों से रिश्तों में तनाव आ सकता
हो सके तो अपनी इस आदत पर विवेक से काबू पाएँ।
हर वक्त हर किसी से बात करने को मन नहीं करता
ऐसे हालात में भूल कर कभी किसी के पास न जाएँ।
खासम खास की मदद कैसे करें ज्यादा से ज्यादा सोचें
ऐसा सोच सोचकर अपनों को और अपने करीब लाएँ।
Saturday 25 July 2009
मानव के पाप पुण्य का होता है यहीं हिसाब
मानव के पाप पुण्य का होता है यहीं हिसाब।
अपने जीवन की वो लिखता ख़ुद ही किताब॥
लिखता ख़ुद ही किताब फ़िर भी करता पाप।
उठता और गिरता है यहाँ ख़ुद ही अपने आप॥
कहे 'प्रेम' कविराय पापी दुष्ट हुआ करें दानव।
पुण्य वो ही करते हैं जो होते सज्जन मानव॥
Friday 24 July 2009
बड़ी मछली छोटी को खाए जा रही है।
यह दुनिया ऐसे ही चलती जा रही है।
कमजोरों पर जुल्म हमेशा होते आए
आज भी यह दुनिया जुल्म ढा रही है।
अभी तो हम ढंग से जी भी नहीं पाए
यह जिन्दगी है कि हाथों से जा रही है।
उसकी खूबसूरती का कोई जवाब नहीं
जब देखो तब ही वो दिलको भा रही है।
उसको मनाने की तो कोशिश बहुत की
मगर उसके मुँह पे हमेशा ही ना रही है।
हक़ मांगो तो तकलीफ होती है उनको
हमारी सरकार हमको ही ठुकरा रही है।
मुनाफा कमा के हो गए वो नम्बर वन
कर्मचारियों की हालत लड़खड़ा रही है।
Wednesday 22 July 2009
रात पिया ने बड़ा तंग कियो रे
रात पिया ने बड़ा तंग कियो रे
कैसे कहूँ जो मेरे संग कियो रे
पल भर उसने सोने न दिया रे
रोना चाहा पर रोने न दिया रे
ऐसे लड़ा वो जैसे जंग कियो रे
अपनी ही धुन में खोया रहा वो
कुछ न सुनी हाय मैंने कहा जो
दैया हाल बड़ा ही बेढंग कियो रे
बहुत बचाया पर बचा नहीं पाई
उसकी पकड़ को छुडा नहीं पाई
ढीला हर एक उसने अंग कियो रे
व्यथा सुनकर थानेदार के भी होश उड गए ,फ़िर भी थानेदार ने तुंरत आदेश दिया हवलदार जल्दी जाकर इनके पति को गिरफ्तार करके लाओ . आधे घंटे में हवलदार उसके पति को गिरफ्तार करके ले आया .थानेदार ने चेतावनी देते हुए कहा माना कि इनके आप पति हैं इसका मतलब यह नहीं कि इनकी मर्जी का ध्यान न रखा जाए । इस बार छोडे देता हूँ आइन्दा के लिए ध्यान रहे। समझे ......वरना बलात्कार का केस लगाने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगेगी।
थानेदार का फैसला सुनके पति पत्नी दोनों घर चले गए..
Tuesday 21 July 2009
देखो शबाब है यह
मस्त शराब है यह।
आगे बढ ओ दीवाने
बड़ा लाजवाब है यह।
मेरे बदन की खुश्बू
फैली हुई है हर शू
मेरी खुश्बू में समाजा
खिलता गुलाब है यह।
पास आता क्यों नहीं
मुझे सताता क्यों नहीं
सच सच कहूं मैं तुझसे
आदत ख़राब है यह।
बाँहों में लीजिये ना
आँखों से पीजिये ना
आके बे खौफ पढ़ ले
हुस्न की किताब है यह।
Saturday 18 July 2009
दीदी सुन अपने देवर को समझाले
बात बात में अपना दिल न उछाले
मेरे आगे पीछे खूब चक्कर काटे
बातें करे इतनी दिमाग को चाटे
टलता ही नहीं वो बिल्कुल ही टाले।
तारीफ मेरी करता वो बहुत है
डांट दूँ उसे तो डरता बहुत है
हाय पास मेरे आ जाए वो हौले हौले।
हाथ न आऊँगी में उसके कभी
चाहे चलले क्यों न चले सभी
पटूंगी नहीं मैं चाहे वो कितना पटाले।
साथ निभाने का गर वादा करे
तब ही भले वो मेरा ध्यान धरे
हो जाऊँगी उसकी पहले शादी रचाले।
Friday 17 July 2009
हमने पड़ोसी से दोस्ती की चाह की
हमने पड़ोसी से दोस्ती की चाह की ।
पर उसने न हमारी कोई परवाह की।
हम अच्छे रिश्ते बनना चाहते उस से
दुनिया जानती हम कह रहे हैं कब से
कारगिल में घुसकर उसने गुनाह की।
सोचा था इंसानियत को मिलके पूजेंगे
दिलों में मुहब्बत को हम खुलके ढूँढेंगे
मगर पड़ोसी ने हमेशा हमसे डाह की।
इल्जाम लगना उसकी पुरानी आदत है
इसी बात पर हमको उससे शिकायत है
जहाँ में उसने हमारी बड़ी अफवाह की।
हम को अपने पड़ोसी से नफ़रत नहीं है
मगर उसके दिल में जरा उल्फत नहीं है
बात बने इसलिए हमने आउ जाउ की।
हमें लगता पड़ोसी में कोई चेतना नहीं
इंसानियत की खातिर कोई वेदना नहीं
हमने हमेशा से ही उसकी वाह वाह की।
हम से टकरा के उसको पछताना होगा
दोस्ती से ही रिश्ता अच्छा बनाना होगा
हमने हमेशा मिलने की सरल राह की।
दुश्मनी की राहों से उसको मुड़ना होगा
तभी साथ-साथ दोनों का चलना होगा
हमने जब की मुहब्बत की निगाह की।
Thursday 16 July 2009
हम तो पड़ोसी से दोस्ती करने चले
हम तो पड़ोसी से दोस्ती करने चले।
मगर वो तो ले के छुरा पड़ गया गले।
कारगिल सीमा लांघी विश्वासघात से
हमें तो ये आदमी दीखते नहीं हैं भले।
पिछली लड़ाइयों से ये कुछ सीखे नहीं
तभी तो रह गए इस बार भी हाथ मले।
इंसानियत इनको कभी रास न आयी
ये उनसे ही खुश रहे जिनसे गए छले।
ये तो आदी हुए इंसानी खून बहाने के
हम तो शान्ति चाहें इस गगन के तले।
रह रह जोर लगाना इनकी आदत हुई
मगर इनके इरादे इन्हें कभी नहीं फले।
दम नहीं है फ़िर भी फड फडा रहे बहुत
दुनिया करें तबाह गर इनका बस चले।
फिरते हैं उतावले ये युद्ध करने के लिए
हम तो टालना चाहें युद्ध जब तक टले।
दूसरों के घर घुसना बिल्कुल ठीक नहीं
भई पता नहीं ये किन संस्कारों में पले।
भला क्यों नहीं आता इनकी समझ में
आग से खेलना चाहें पर कई बार जले।
Wednesday 15 July 2009
मैं क्या बताऊं! तुम्हें दुःख अपना गुइयां।
मिलत जुलत नाहीं हैं मुझसे मेरे सइयां।
सब सखियाँ तो मेरी मज़ा उडावे
सइयां उनके उन्हें गोद में बिठावे
पर हाय! मुझको नहीं है कहीं कोई ठैयां।
सैयां मेरे हैं बड़े अजीब तरह के
रूठे रहते वो जाने कौन वजह से
कभी न डालें वो मेरी बहियों में बहियां ।
तुम्हारे दिन अच्छे कटत हैं सहेली
पर मैं तो रही हूँ घुट घुटके अकेली
दुःख के सिवा न मिली सुख की कभी छैयां।
Tuesday 14 July 2009
वो मुझको अपनी जाँ समझते हैं
वो मुझको अपनी जाँ समझते हैं।
मेरी मौनी को मेरी हाँ समझते हैं।
जुल्फें मेरी बिखरा के ख़ुद पर वो
मुझको ठंडी घनेरी छाँ समझते हैं।
बस होने ही वाले हैं साठ के ऊपर
अभी भी खुदको जवाँ समझते हैं।
समझाती रहती हूँ अब यह छोडो
पर मेरी बातें वो कहाँ समझते हैं।
उन के आगे तो मेरी एक चले ना
ख़ुद को तीस मार खां समझते है।
रह जाती हूँ मैं मन को मसोसकर
पर मेरी कहाँ वो जुवां समझते हैं।
Monday 13 July 2009
हम चढ़ गए एक दूजे की निगाहों में
हम चढ़ गए एक दूजे की निगाहों में ।
बड़ा सकूं मिला एक दूजे की बाँहों में।
अब हमें क्या लेना देना है दुनिया से
जब रहने को मिले उसकी पनाहों में।
मुहब्बत का रंग लगता बड़ा ही प्यारा
मस्ती छायी हुई जिन्दगी की राहों में।
जो मांगो वही मिले तो बात ही क्या है
यह तब होता जब असर हो दुआओं में।
Sunday 12 July 2009
मेरी भी एक प्यार से भरी कहानी थी
मेरी भी एक प्यार से भरी कहानी थी।
कुछ न पूँछो जिन्दगी बड़ी सुहानी थी।
बड़ा मुश्किल था रहना दूर एक दूजे से
मैं उसपे दीवाना वो मुझपे दीवानी थी।
जितना प्यार मिला उसका बहुत लगा
उसकी हरेक अदा दिल को लुभानी थी।
उसका प्यार दिल से कभी उतरा ही नहीं
उसका प्यार ही मेरी ताकत रूहानी थी।
Saturday 11 July 2009
बतलाओ मुझे आप क्यों रोने लगे हो
बतलाओ मुझे आप क्यों रोने लगे हो।
आँसुओं से आँखें क्यों भिगोने लगे हो।
टूटना बिखरना जिसकी आदत हो गई
उसे एक धागे में क्यों पिरोने लगे हो।
रहना चाहते हो गर खूबसूरत फूलों में
तो जीवन में काँटे क्यों बोने लगे हो।
पाहिचान बनानी तो हटके जीना होगा
गुम होकर पहिचान क्यों खोने लगे हो।
जल्दी सो ओ जल्दी उठो स्वस्थ रहोगे
देर सुबह तक आखिर क्यों सोने लगे हो।
Wednesday 8 July 2009
अब देखना यह है कि वो आख़िर क्या करते हैं
अब देखना यह है कि वो आख़िर क्या करते हैं।
ठुकराते हैं कि मुहब्बत का हक़ अदा करते हैं।
वो मेरी मरज जान के भी अनजान से बने हुए
दवा कि जगह पास आकर सिर्फ़ दुआ करते हैं।
वो बसे हुए हैं इस तरह मेरे दिलो- दिमाग में
जफा भी करते तो लगता है कि वफ़ा करते हैं।
उन्हें मनाओ तो वो मनाये नहीं मनते मुझसे
पता नहीं कि हम आख़िर क्या खता करते हैं।
अब इस के सिवा कोई काम नहीं है मेरे पास
हर हाल में बस उनकी ही माला जपा करते हैं।
रात भर सो नहीं पाते उनके ख्यालों में डूब कर
कोई राह नज़र नहीं आती हाथ मला करते हैं।
लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं।
Tuesday 7 July 2009
जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ
जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ।
मुस्कराए हुए मुझे एक ज़माना हुआ।
जी रहा हूँ तड़प कर उसकी जुदाई में
यह दिल मेरा उजड़कर वीराना हुआ।
बड़े दिल से रखा था मुहब्बत में कदम
क्या कहूँ खामखा खुदको रुलाना हुआ।
किसी को न मिले कभी ऐसी बेवफाई
जीते जी मेरा तो बस मर जाना हुआ।
Monday 6 July 2009
मुस्कराते हुए लोग भी अन्दर से हुए क्रूर हैं
दोहरी जिन्दगी जीने के लिए हुए मजबूर हैं।
कहना कुछ करना कुछ आदत सी पड़ गयी
इंसानियत के कितने बदल गए दस्तूर हैं।
जुल्म पर जुल्म बढते जा रहे हैं दिनों दिन
मगर सज़ा वही पा रहे जो गरीब बेक़सूर हैं ।
मस्ती में जी रहे हैं वही मनमानी जिंदगी
जिनके दौलत से भरे हुए खजाने भरपूर हैं।
कोई किसी की परवाह करना ही नहीं चाहे
आज इंसानियत से लोग जा रहे बड़ी दूर हैं।
शासन प्रशासन सभी तो हैं जनता के लिए
इसके बावजूद भी सब लोग हुए चूर चूर हैं।
Sunday 5 July 2009
अगर तू आए तो आ जाए मौसम बहार का
अगर तू आए तो आ जाए मौसम बहार का ।
यह मेरा दिल बड़ा बेताब है तेरे दीदार का।
हर तरह से देख लिया मैंने बहलाके दिल को
फ़िर भी हाल बेहतर न हुआ तेरे बीमार का ।
आ भी जाओ अब और देर ना लगाओ प्रिये
तुझको कसम मेरी वास्ता अपने प्यार का ।
यह दिल मेरा बेकाबू हुआ जाए तेरी चाह में
हाय! पल पल काटे न कटे तेरे इंतज़ार का।
Friday 3 July 2009
गरीबी नहीं मिट रही तो क्या गरीब तो मिट रहे हैं
गरीबी नहीं मिट रही तो क्या गरीब तो मिट रहे हैं ।
जो नहीं मिटे वो जिंदगी में जैसे तैसे घिसट रहे हैं।
राज नेता जो कहते अक्सर वो किया नहीं करते
मगर गरीबी पर बयान देकर वो हमेशा हिट रहे हैं।
गरीबों पर रहम दिखाया गया पर किया नहीं गया
सदियों से ही पिटते आए और आज भी पिट रहे हैं।
कहना कुछ करना कुछ यही फंडा है राजनीति का
नेता यही फंडा अपना कर मकसदों में फिट रहे हैं।
Tuesday 30 June 2009
अपने आप से अपना मुख क्यों मोड़ने लगे हो
अपने आप से अपना मुख क्यों मोड़ने लगे हो।
दुनिया का दुःख जीवन में क्यों भोगने लगे।
कम से कम जो बोले वो ही प्यारा लगता है
यह जान कर भी ज्यादा क्यों बोलने लगे हो।
रिश्तों को कभी भी गहराई से मत देखिये
गहराई से देखके रिश्तों को क्यों तोड़ने लगे हो।
ख़ुद ही इन्सान गिरता और ख़ुद ही उठता है
फ़िर दोष दूसरों पर भैया क्यों थोपने लगे हो।
अपने ही हाथों में होता अपना भाग्य बनना
फ़िर आप अपने आपको क्यों कोसने लगे हो।
राज की बातें राज बना के रखना सीखो प्यारे
राज की बातें दूसरों से क्यों खोलने लगे हो।
नए मीत बने तो अपने गले लगाओ उन को
नए की खातिर पुरानो को क्यों छोड़ने लगे हो।
चाहने पर भी कोई आप को चाहना न चाहे
ऐसे लोगों से आख़िर प्रीति क्यों जोड़ने लगे हो।
पहले सोचो समझो फ़िर अपना विवेक लगाओ
सोचे समझे बिना ख़ुद को क्यों झोकने लगे हो।
Saturday 27 June 2009
दोस्तो दोस्ती का खूब मज़ा लीजिये
एक प्यारा साथी कोई बना लीजिये।
जो अपनी कहे और वो तुम्हारी सुने
उस को दिल में अपने बसा लीजिये।
काटे कटती नहीं यह तनहा जिंदगी
दिल अपना किसी से मिला लीजिये।
यूँ कोई किसी का जल्दी होता नहीं
बात बनेगी दिल को बढा लीजिये।
दो कदम पहले आगे बढाओ तो जरा
फ़िर पता दीजिये और पता लीजिये।
जिंदगी की खुशी तुम्हें मिल जायेगी
प्यार से अपनी जिंदगी सजा लीजिये।
Friday 26 June 2009
कर लो यकीं मुझ पर जानम
करलो यकीं मुझ पर जानम प्यार हमारा झूठा नहीं।
इतना सताया तुमने फ़िर भी दिल हमारा टूटा नहीं।
कसम तुम्हारी तुम क्या जानो कितना तुम को चाहें
जिस पल याद नहीं आई ऐसा पल कोई छूटा नहीं।
एक दिन आएगा जब तुम महसूस करोगी मुझको
मुझको पता मेरा मुकद्दर अब तक मुझसे रूठा नहीं।
जब तक साँस रहेगी मेरी तब तक तुमको चाहेंगे
यूँ तो देखे लाखों हसीं पर तुझसा कोई सूझा नहीं।
तुम हो मेरी पहली चाहत तुम को कैसे भूल जायें
तुम हो प्यार की फुलवारी सिर्फ़ प्यार का बूटा नहीं।
Wednesday 24 June 2009
हम रुसवा हो गए
उनकी झलक भी नहीं मिली, हम रुसवा हो गए।
मुहब्बत की खूब उडी खिल्ली, हम रुसवा हो गए।
सोचा था जियेंगे मिल के मुहब्बत की फिजाओं में
ऐसी लगी मेरे मुँह में चिल्ली, हम रुसवा हो गए।
मेरा बड़ा अरमान था करूंगा देश सेवा नेता बनकर
हाय पहुँच भी न पाये दिल्ली, हम रुसवा हो गए।
हौसला लेकर मैं उतरा था मुहब्बत की क्रिकेट में
शुरुआत में ही उड गई गिल्ली, हम रुसवा हो गए।
अपनी ही धुन में थे हम मस्त बेखबर दुनिया से
जाने कहाँ से आ गई बिल्ली, हम रुसवा हो गए।
दिल की बेचैनी को आख़िर कहाँ कहने जायें हम
किसी तरह न मिली तसल्ली, हम रुसवा हो गए।
Tuesday 23 June 2009
परदेश से जब आयेंगे मेरे साजना
परदेश से जब आयेंगे मेरे साजना
रूठ जाऊंगी उनसे करूँगी बात ना
जो भी कहो ,कहूँगी , दूर से कहो
रखने दूँगी उन्हें वदन पे हाथ ना।
पूछूँगी क्यों इतना सताया मुझे
काहे पागल सजना बनाया मुझे
तुमने तो मुझको भुला ही दिया
काहे तरसाके इतना रुलाया मुझे
ये आदतें तुम्हारी आयी रासना।
तुम क्या जानो मैं कैसे रही हूँ
ली न ख़बर जीवित कि मरी हूँ
तुम हो बड़े बेरहम दिल पिया
तुम्हारी बला से,मैं जैसे भी रही हूँ
लगता आयी तुम्हें मेरी याद ना।
Thursday 18 June 2009
इंसानियत का फ़र्ज़ निभाते चलो।
भटके हुओं को राह दिखाते चलो।
धन दौलत भला कौन साथ ले गया
जादा हो तो गरीबों को उठाते चलो।
दुबारा जीवन तो अब मिलना नहीं
हो सके तो प्यारे मित्र बनाते चलो।
रोते को हँसाना पुण्य से कम नहीं
ऐसा पुण्य जीवन में कमाते चलो।
Wednesday 10 June 2009
नौकरी से छुट्टी ले आना बालमा
कर के कोई सा बहाना बालमा
नौकरी से छुट्टी ले आना बालमा
नौकरी में तुम ऐसे डूबे
मुझको तो बिल्कुल ही भूले
ऐसा किस काम का कमाना बालमा।
रूप और जवानी फ़िर न आए
तुमको भला यह कौन बताये
फ़िर न मिले यह खजाना बालमा।
गुजरूँ जिधर से हर कोई देखे
अँखियों से दिल अपना फेके
मेरे पीछे पड़ा है जमाना बालमा।
करवट बदल बदल कर जागू
जल्दी से आ ओ तुमसे मांगू
बीता जाए मौसम सुहाना बालमा।
फिसल न जाए कहीं पैर हमारो
जल्दी से आ के मुझको संभालो
फ़िर दोषी न मुझे ठहराना बालमा।
Monday 8 June 2009
प्रभु मेरे तेरी जय जय कार
तेरी शरण में आ कर पाया
मैंने एक खुशियों का संसार
प्रभु मेरे तेरी जय जय कार।
शरण तुम्हारी जबसे आया
सचमुच मैंने जीवन पाया
पुष्प खिला मेरे जीवन का
तूने सुन ली मेरी पुकार।
विश्वास हमारा हुआ है तुझमें
वास तुम्हारा हुआ है मुझमें
परमानन्द मिलने लगा है
मेरा जीवन हुआ साकार ।
जीवन की तूने राह दिखाई
जीने की तूने चाह जगाई
दुःख के बादल छटने लगे हैं
तेरी महिमा अपरम्पार।
जीवन मेरा सफल हुआ है
तेरी भक्तिमें सबल हुआ है
थकता नहीं गुन तेरे गाकर
तूने मुझपे किया उपकार ।
इतनी कृपा बनाये रखना
हर पल मेरे संग ही रहना
तेरी भक्तिमें मन रमा रहे
बना रहे तू जीवन आधार।
कभी न छूटे सांगत तेरी
पूरी हो प्रभु मन्नत मेरी
सदा ही तेरा ध्यान धरूँगा
करो विनती मेरी स्वीकार।
जब से की मैंने तेरी प्रार्थना
पूरी होने लगी मेरी कामना
तेरी कृपा से उठने लगे हैं
मेरे मन में सुन्दर सुविचार।
दुःख के बादल छटने लगे हैं
सुख के सागर भरने लगे हैं
शैतानों ने कर रखा था मेरा
सचमुच जीवन जीना दुश्वार।
जीवन की मुझे राह दिखादी
जीने की मुझमें चाह जगादी
मारे खुशी के गद गद हूँ मैं
जो सुन ली तुमने मेरी पुकार।
तेरी महिमा का पार नहीं है
तेरे जैसा कोई प्यार नहीं है
तेरी दया से प्रभु मैं ही नहीं
मेरा धन्य हुआ परिवार।
Saturday 6 June 2009
चालीस पार हो गए तो अखरस बतरस लीजिये।
जियो और जीने दो, से जीवन का रस लीजिये।
गर जल्दी जाना हो तुमको यह दुनिया छोड़कर
सुबह-शाम जब चाहे सिगरट का कस लीजिये।
जो तुझको जीने न दे किसी तरह से दुनिया में
कुछ न सोचो जैसे तैसे उसको बस डस लीजिये।
मोहब्बत से लोग जहाँ मिल जुल कर रहते हों
उनके बीच जाकर प्यारे एक दम बस लीजिये।
जीवन की आपाधापी में क्यों आग बबूला होते
जो भी मन का मिले उसी के संग हँस लीजिये।
Thursday 4 June 2009
नफ़रत करने की तो वो सारी हदें तोड़ दिए।
अपना रुख मोड़ के मेरा भी रुख मोड़ दिए।
किसी का भी बुरा चाहना ठीक नहीं है इतना
अपनों की खातिर अपनी ही आँख फोड़ लिए।
ऐसे लोग जहाँ कहीं पर भी मुझे समझ आए
बड़े प्यार से मैंने उनसे अपने हाथ जोड़ लिए।
सभी अपने मन के मिलें ऐसा हो नहीं सकता
मन के तो अपनाए बे-मन के मैंने छोड़ दिए।
Monday 1 June 2009
ईशु मसीह की प्रार्थना
मैंने बहुत पहले लिखी थी जो आप
के सामने प्रस्तुत है।
यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन मन में तू यहोवा
तेरी व्यवस्था पे चल कर
मेरा जीवन बदलने लगा है
टेड़ी मेढ़ी राहों से निकल कर
सीधी राहों पे चलने लगा है
सीधी राहों पे चलने लगा है
यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन मन में तू यहोवा
भरोसा किया मैंने तुझ पर
किया जीवन ये तेरे हवाले
हजारों नहीं तू ने लाखों
भक्तों के जीवन संभाले
भक्तों के जीवन संभाले
यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन मन में तू यहोवा
कर दो कृपा इतनी मुझ पर
संगत न कभी तेरी छूटे
एक तेरा ही रिश्ता है सांचा
बाकी लगें रिश्ते झूठे
बाकी लगें रिश्ते झूठे
यहोवा यहोवा यहोवा
समाया तन मन में तू यहोवा
Thursday 28 May 2009
उसका बसा बसाया घर उजड गया।
तम्बू छोडिये बम्बू भी उखड गया।
सदमा गम का वो झेल नहीं पाया
उस का सारा हाल ही बिगड गया।
कैसे लौट पायेगा वो अपने हाल में
उस के दिल को सब यह हड़ गया।
अब क्या होगा आगे ये कौन जाने
हालात देख उस का होश उड गया।
जीना चाहता था वो अपने ढंग से
उसके जीवन का रुख ही मुड गया।
प्रेम का रोग कभी न लगे किसी को
खुशी की चाह में बेचारा कुड गया।
Tuesday 26 May 2009
तन के रोगी मन के रोगी देखे गए।
प्यार में तड़पते हुए जोगी देखे गए।
ओखली के अदंर पर चोट के बाहर
बड़े चतुर जहाँ में भोगी देखे गए।
मतलब में तो मीठे पर वैसे कडुए
जादा ऐसे जहाँ में ढोंगी देखे गए।
आता जाता कुछ भी नहीं फ़िर भी
बकते हुए बहुत से पोंगी देखे गए।
Monday 25 May 2009
दोस्ती से बेहतर लोग दुश्मनी निभा देते हैं।
इंसानियत का गिरा हुआ रूप दिखा देते हैं।
बड़ी मुश्किल से बनती है दुनिया में इज्जत
उसी इज्जत को लोग धूल में मिला देते हैं।
पहले दोस्त हुआ करता है कोई भी दुश्मन
दोस्त से दुश्मन बन कर जड़ हिला देते हैं।
अगर आगे नहीं निभे तो वहीं पर छोड़ दें
देवता बन के क्यों राक्षस का सिला देते हैं।
Sunday 24 May 2009
आप को कभी दुखी नहीं होना चाहिए।
आँसुओं में आँखें नहीं भिगोना चाहिए।
भले ही फूलों की जगह तुम्हें कांटे मिलें
जिन्दगी में कभी कांटे नहीं बोना चाहिए।
दुखों से कभी हारो मत उनसे जूझते रहो
हौसला टूटे तो कभी रोना नहीं चाहिए।
हर हालत में मन में शान्ति बनाये रखें
मन की शान्ति कभी खोना नहीं चाहिए।
Tuesday 19 May 2009
जब तक न कहे कोई खाना नहीं चाहिए।
कमजोरों को भी हक़ है दुनिया में जीने का
कमजोरों पर सितम कोई ढाना चाहिए।
प्यार से मोहब्बत से लोग रहते हों जहाँ
पुलिस का वहां पे कोई थाना नहीं चाहिए।
सब कुछ कुर्बान कर देते लोग मोहब्बत में
पर नाजायज फायदा कोई उठाना नहीं चाहिए।
जिसको चाहो उसको माफ़ भी करते रहो
अपनों पर कसना कोई ताना नहीं चाहिए।
Sunday 17 May 2009
उसका आ के वापस जाना अच्छा नहीं लगता।
उसके बिना मौसम सुहाना अच्छा नहीं लगता।
जुदाई का दर्द भला क्या समझेगा यह जमाना
ऐसे में किसी का समझाना अच्छा नहीं लगता।
जो होना था वही हुआ और कर भी क्या सकते
चुप चाप बैठ कर पछताना अच्छा नहीं लगता।
लाख कोशिश की दिल को बहलाने की मैंने पर
किसी तरह भी कोई बहाना अच्छा नहीं लगता।
यह सूचक है यारो इ़सका कि बदल रहा है ज़माना।
बदल रहा है जमाना जाने क्या से क्या न हो जाए
लडके के साथ कहीं लड़के की शादी ही न हो जाए।
कहे प्रेम कविराय होगी बड़े अफ़सोस की बात भाई
सुहागरात की रात करेंगे फ़िर जम के दोनों लडाई।
Sunday 10 May 2009
माँ
सबसे प्यारी सबसे न्यारी माँ होती है।
अपने जिगर के टुकडों की वो जाँ होती है।
सदा अपने बच्चों का रखती है वो ध्यान
जीती है वो देख के उनकी मधुर मुस्कान
जहाँ भी होते बच्चे उसके वो वहाँ होती है।
सबसे प्यारी सबसे न्यारी माँ होती है।
अपने जिगर के टुकडों की वो जाँ होती है।
बच्चों की खुशियों में खुशी हो हो करके
उनके दुःख में अक्सर दुखी हो हो करके
अपने बच्चों के संग संग वो रवाँ होती है।
सबसे प्यारी सबसे न्यारी माँ होती है।
अपने जिगर के टुकडों की वो जाँ होती है।
बच्चों की मनोभावना
छोटू बोला लम्बू से
तू क्यों लंबा हो गया
बिजली का खम्बा हो गया
लम्बू बोला छोटू से
खूब खाना खा प्यारे
मुझसा लंबा हो जा रे
कभी नही जो रूठते
खाना खूब खाते हैं
मम्मी उनको प्यार करती
और पापा खूब घुमाते हैं।
साईं बाबा का गुनगान
मिलके करलो खुलके करलो साईं का गुनगान
साईं का गुनगान करेगा हम सब का कल्याण
सुबह शाम साईं की आरती उतार लो
साईं की भक्ति से ख़ुद को संवार लो
मानो कहना नहीं तो वरना रहेंगे भटकते प्राण
सच्चे मन से जो साईं दरबार में आया
जो भी कामना की है उसने वो पाया
साईं कृपा से हो जाते हैं निर्धन भी धनवान
भक्तों की सुनते सदा मन की पुकार साईं
झोलियों में भरते सदा अपना प्यार साईं
हर सुख का दाता है जग में साईं का ध्यान
Thursday 7 May 2009
दो दिन के बाद महमान महमान नहीं होता
चाहने पर अक्सर किसी का मान नहीं होता।
दो दिन के बाद महमान महमान नहीं होता।
बहुत पापड बेलने पड़ते हैं जिन्दगी में यारो
यूँ ही पूरा दिल का कभी अरमान नहीं होता।
कोई न कोई स्वार्थ जरूर देखती है ये दुनिया
खामखा कोई किसी पर महरबान नहीं होता।
सच्चे मन से जो करते रहते दूसरों का भला
उनका बेकार कभी कोई अहसान नहीं होता।
नफरतों का परिणाम होता है बड़ा ही घातक
मुसीबतों में कोई उनके दरमियाँ नहीं होता।
जीने को जीते रहते हैं वो भी अपनी जिन्दगी
जिन्हें कभी नसीब जमीं आसमान नहीं होता।