रविवार, 18 अप्रैल 2010

कभी वो मुझे ओढ़ते हैं तो कभी मुझे बिछाते हैं।

कभी वो मुझे ओढ़ते हैं तो कभी मुझे बिछाते हैं।
अपनी मुहब्बत को मुझे कई ढंग से दिखाते हैं

हम नहीं होते तो उन पर दुःख का पहाड़ टूटता
मालूम नहीं मेरे बगैर दिन रात कैसे बिताते हैं

मुँह से बात निकली कि आज तो ये चीज़ खाना
जरा सी देर में वो चीज़ लाकर मुझे खिलाते हैं

कोई अगर मदभरी आँखों से देखना भी चाहे तो
सामने आकर वो उन नज़रों से मुझे छिपाते हैं

उनका प्यार तो जहाँ में सबसे अलग ही लगता
हर पल हर घड़ी मुझे नये-नये ढंग से रिझाते हैं

3 टिप्‍पणियां:

  1. मुँह से बात निकली कि आज तो ये चीज़ खाना
    जरा सी देर में वो चीज़ लाकर मुझे खिलाते हैं ...

    इन छोटी छोटी बातों में ही प्यार का पता चलता है ... सच्चा प्यार यही है ... अच्छा लिखा है बहुत ही ...

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  2. जब आपसे इस क़दर मुहब्बत है तो पजेसिवनेस तो होगी ही , जिसका आपको बुरा नहीं मानना चाहिए
    आपकी किस्मत पे रश्क आता है !

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