गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

उनकी रचना में नहीं जितना उनमें दम है


उनकी रचना में नहीं जितना उनमें दम है
उनके आगे तो मित्र क्या ठर्रा क्या रम है

टिपण्णी करने जाता सिर पे पाँव रखे हुए
मुहब्बत के लिए ये मेहनत बहुत कम है

आँखों के अंधे को कुछ भी तो नहीं सूझता
आखिर क्या उन में अच्छाई क्या ख़म है

जो है पास उसकी उसे ख़ुशी ही नहीं होती
जो नहीं पास उसका खलता बहुत गम है

उनका ध्यान यूँ कोई भंग नहीं कर पाये
जिससे भंग होता वो उनकी छम छम है

समझदारों को समझाने की जरूरत नहीं
प्यार मिले बतलाओ फिर कैसी शरम है

तारीफ़ से हमेशा हासिल नहीं होता प्यार
हाय ब्लागर्स का ये कितना प्यारा भ्रम है

6 टिप्‍पणियां:

  1. इतने तीखे तीखे तीर चलाये हैं की जो भी टिपण्णी करने आयेगा, दो बार सोचेगा...और फिर उलटे पाओं लौट जायेगा ... हाँ केवल मेरे जैसे कुछ बेशर्म लोग होते हैं ... आप तोप भी दागो तो दांत निपोरके हँसेंगे और फिर भी आएंगे ...
    चला लीजिये आप तीर जितने भी हो कमान में !
    शेर हाथी डरते होंगे इनसे, हम जैसे मच्छरों को डर क्या !!

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  2. मेरी रचना पर टिपण्णी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया प्रेम जी ... आप सबका प्यार और आशीर्वाद ही मुझे प्रेरणा देता है !

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  3. Ghazab Baat Kahi hai Apne Prem saab!!! Shabdon ka shandar Sanyojan Kiay hai apne!!!



    "RAM"

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  4. आज तो बहुत ज़ोरदार मारा है , प्रेम भाई।
    रचना अच्छी बन पड़ी है ।

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  5. उनके गानों को तुम कब तक गाओगे!
    कब तक अपने मन को तुम भरमाओगे!
    सपनों मे खो जाना इतना ठीक नही.
    खारे सागर में कब तक उतराओगे!

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  6. सार्थक पहल ........चुटीले विचार .......बधाई!
    ‌"शब्दों का नन्हा गुलदस्ता, भावों का कोमल उपहार।
    भेज रहा "डंडा" ‍कवि इनको आप करें सादर स्वीकार॥"

    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

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