शनिवार, 27 जून 2009

दोस्तो दोस्ती का खूब मज़ा लीजिये


दोस्तो दोस्ती का खूब मज़ा लीजिये
एक प्यारा साथी कोई बना लीजिये

जो अपनी कहे और वो तुम्हारी सुने
उस को दिल में अपने बसा लीजिये

काटे कटती नहीं यह तनहा जिंदगी
दिल अपना किसी से मिला लीजिये

यूँ कोई किसी का जल्दी होता नहीं
बात बनेगी दिल को बढा लीजिये

दो कदम पहले आगे बढाओ तो जरा
फ़िर पता दीजिये और पता लीजिये

जिंदगी की खुशी तुम्हें मिल जायेगी
प्यार से अपनी जिंदगी सजा लीजिये


11 टिप्‍पणियां:

  1. जो अपनी कहे और वो तुम्हारी सुने
    उस को दिल में अपने बसा लीजिये।


    ढूंढना हमनशीं कोई मुश्किल नहीं बस आप,
    अपने-पराये का फर्क दिल से हटा लीजिये ।
    बहुत ही सुन्‍दर रचना इन शब्‍दों के साथ बधाई ।

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  2. IATANI KHUBSOORAT EHSAASO KI TOKARI AAP LEKAR AAYE HAI KI KUCHH JABAAW NAHI SUJH RAHA HAI ........SUNDAR

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  3. दो कदम पहले आगे बढाओ तो जरा
    फ़िर पता दीजिये और पता लीजिये।
    वाह सच्ची बात कही आपने...बहुत अच्छी रचना...बधाई
    नीरज

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  4. waah ji waah
    dosti ke maze ki baat hi aur hai...
    umda
    bahut umda rachna !

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  5. इतना ख़ूबसूरत कविता लिखा है आपने की कहने के लिए अल्फाज़ कम पर गए! उम्दा कविता के लिए बधाई!

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  6. दो कदम पहले आगे बढाओ तो जरा
    फ़िर पता दीजिये और पता लीजिये।

    साधारण शब्दों में गहरी मार कर गए आप तो ......बहुत खूब.....!!!

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  7. प्यार से बढ़ कर जिंदगी मे कोई चीज़ नही होती,
    दोस्ती इस बात की एक सुंदर अनुभूति है,

    अत्यन्त सुंदर रचना..

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