मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना


कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे कैसे होगा जीना।
मुझे पी लेने दो मुझे जी लेने दो
गरेबां चाक हुआ उसे सी लेने दो
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

तोड़ दिया दिल जिसने मेरा
मोड़ दिया रुख उसने मेरा
लाखों में वो एक थी दिलवर मेरी हसीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

बहक जाऊं तो होना नहीं खफा
पीने वालों की होती यही अदा
इसी अदा में भाता है मुझको जीवन जीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

पीता हूँ तो बस पीता रहता
गम को भुलाकर जीता रहता
जीवन तो पाया मैंने पर पाई कोई खुशीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

किस से कहूं मैं दिल का रोना
हुआ वो ही है जो था होना
जो भी मेरे संग हुआ हो संग किसी के कभीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---











कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें