शनिवार, 26 दिसंबर 2009

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।


अकेले में जीना भी जीना है क्या-2
जीना नहीं है यह जीना है सजा-2
तन - मन से मैं
तरसती रही, बहकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।


हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें उस तरह -२
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर भी मैं सो ना सकी -२
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

अब आये अब आये करती रही -२
बस दरवाजे को ही मैं तकती रही- २
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

संग किसी के भी ऐसा ना हो-२
तंग कोई भी मेरे जैसा ना हो -२
मन ही मन में सिकुड़ती रही, उखड़ती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

बुधवार, 9 दिसंबर 2009

जय हो पाट बाबा की (जबलपुर वाले)


मन की खुशियाँ मिलें, पाट बाबा के दरबार में।
मन की कलियाँ खिलें, पाट बाबा के दरबार में।


सच्चे मन से जिसने जो माँगा
बाबा ने वो उसको दिया है
दुःख सारे ही लेकर उसके
सुख - सागर को दिया है
दुखिया सुखिया बनें
, पाट बाबा के दरबार में।

भक्तों का हरदम ही यहाँ पर
खूब ताँता लगा रहता है
बड़ा ही दयालू है यह बाबा
हर कोई यह कहता है
आओ मिलके चलें, पाट बाबा के दरबार में।


बाबा के चरणों में हरदम
जिसका ध्यान लगा है
उस पर कृपा हुई बाबा की
सोया भाग जगा है
अर्जी सबकी लगें, पाट बाबा के दरबार में।



शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

मैया मैहर वाली

मैया मैहर वाली ,मुझपे महर करो
मुझपे महर करो, खुशियाँ नज़र करो
मैया मैहर वाली, मुझपे महर करो।

विपदाओं ने, मुझको घेरा
अपनों ने भी, मुख को फेरा

समझ में कुछ भी आता नहीं
कुछ भी मुझको भाता नहीं
मैया, आसान जीवन की डगर करो।


काम कोई मेरा, बनता नहीं
जोर कोई मैया, चलता नहीं
क्या करुँ क्या ना करुँ
क्या कहूँ क्या ना कहूँ
अपनी शक्ति का मुझपे असर करो

द्वार तेरे मैया, जो भी पहुँचा
कुछ न कुछ, लेके ही लौटा
मेरी भी एक अर्ज़ सुन लो
जीवन में खुशियाँ भर दो
मैया, फ़िर से आबाद मेरा घर करो।