गुरुवार, 9 सितंबर 2010

मस्त हवाओ मुझको बताओ



मस्त हवाओ, मुझको बताओ,महबूब मेरा, किस हाल में है

छूकर उसके , बदन को आओ,
महबूब मेरा, किस हाल में है। 

महबूब मेरा, किस हाल में है।

ऐ चाँद सुन, तुझे मेरी कसम,देखता होगा, तू मेरा हमदम
खुद में ही उसे, मुझको दिखाओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ

महबूब मेरा, किस हाल में है।

शायरों से मेरी, गुजारिश यही,कैसे सोचता वो, जहाँ भी कहीं
उससे वाकिफ, मुझको कराओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ

महबूब मेरा, किस हाल में है।

तेरी खुदाई खुदा, तू ही जाने,आखिर करें क्या, हम दीवाने
जल्दी से अब, मुझको मिलाओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ
महबूब मेरा, किस हाल में है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस मौसम में आपकी रचना और भी रसीली लगती है........

    बधाई !

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  2. शायरों से मेरी गुजारिश यही है
    कैसे सोचता वो जहाँ भी कहीं है
    उसकी सोच मुझको पहुँचाओ।
    महबूब मेरा किस हाल में है।
    वाह ! बहुत मनोरम रचना ....आभार
    मैं अनुष्का .....नन्ही परी

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  3. आप का ब्लॉग पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
    हिंदी भाषा का प्रेमी हूँ, लेकिन मैं खुद अग्न्रेज़ी में लिखता हूँ.

    अकस्मात् ही आपका ब्लॉग मिल गया इन्टरनेट पर....
    कृपया मुझे बताएं कि आपके ब्लॉग को फोल्लो कैसे किया जाए?

    हमारी शुभकामनाएं कि आप और अच्छा लिखें और हमें भी हिंदी भाषा का ज्ञान प्रदान करें !

    आपका

    रोब्बी ग्रे

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