बुधवार, 19 जुलाई 2017

उसकी हर बात मैंने कबूल की


उसकी हर बात मैंने कबूल की,
शायद यही मैंने बड़ी भूल की
जिंदगी उसकी मैं गुलाब करता रहा,
मगर मेरी जिंदगी उसने बबूल की।

दिल की कली कोई खिली नहीं,

जैसी चाही जिंदगी वैसी मिली नहीं
आसान नहीं है दुनियां झेल पाना,
झेली बहुत मगर मुझसे झिली नहीं।

जीवन के सुख दुःख से यही लगे ,

स्वर्ग भी यहीं है नर्क भी यहीं है
भले कोई मेरी बात माने या माने,
जो कुछ भी है वो सब कुछ यहीं है।  
                            -प्रेम फर्रुखाबादी 

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