शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

जहां चाह है वहीं राह है प्यारे

जहां चाह है वहीं राह है प्यारे।
दिल में फिर क्यों डाह है प्यारे।


जो कर दिखाते हैं कमाल कोई
होती उन्ही की वाह-वाह है प्यारे

हुनर जिसने कोई सीखा ही नहीं

निकले फिर उनकी आह है प्यारे

मान भी लो कहा कभी अपनों का

वरना जिंदगी होती तबाह है प्यारे

प्यार में बहुत ताकत हुआ करती

प्यार ही सबसे बड़ी पनाह है प्यारे

संभाल सकते तो संभालो खुद को

जिंदगी होती बड़ी अथाह है प्यारे

जो समझ लिया इस जिंदगी को

वो ही होता यहाँ शहंशाह है प्यारे।


कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ

कितना भी कर ले कोई चिल्ल पुआ ।
होगा वही जो किस्मत में लिखा हुआ ।।
भले ही पकाये कोई कहीं भी रख कर
फल तो वही पका है जो पेड़ से चुआ।।  

दिल चाहे वो मुझे मिल जाए


दिल चाहे वो मुझे मिल जाए
तो जिंदगी फूल सी खिल जाए।

प्यारा दोनों का मेल होगा

न्यारा दोनों का खेल होगा
देखे तो सारा जमाना हिल जाए।

तन्हा और  जिया न जाय

गम को और पिया न जाय
इनायत हो जख्में दिल सिल जाए।

कोशिश तो अपनी जारी रहेगी

दिल को वो बड़ी प्यारी रहेगी
भले ही कोशिश में दिल छिल जाए। 

शनिवार, 2 सितंबर 2017

मन को बस में राखिये,करिये अपना काम


मन को बस में राखिये,करिये अपना काम।
भोजन कर आराम से, भजिये सीता राम।।
भजिये  सीता राम, जीवन  खुशहाल होगा।
तन-मन हमेशा ही,एक सुर मयताल होगा।।
कहे प्रेम कविराय,सन्देश यही जन-जन को।
करिये अपना काम,राखिये बस में मन को।।
                                               -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

बुधवार, 19 जुलाई 2017

उसकी हर बात मैंने कबूल की


उसकी हर बात मैंने कबूल की,
शायद यही मैंने बड़ी भूल की
जिंदगी उसकी मैं गुलाब करता रहा,
मगर मेरी जिंदगी उसने बबूल की।

दिल की कली कोई खिली नहीं,

जैसी चाही जिंदगी वैसी मिली नहीं
आसान नहीं है दुनियां झेल पाना,
झेली बहुत मगर मुझसे झिली नहीं।

जीवन के सुख दुःख से यही लगे ,

स्वर्ग भी यहीं है नर्क भी यहीं है
भले कोई मेरी बात माने या माने,
जो कुछ भी है वो सब कुछ यहीं है।  
                            -प्रेम फर्रुखाबादी 

बुधवार, 5 जुलाई 2017

जब से शुरुआत की प्यार में

जब से शुरुआत की प्यार में
जिंदगी डूब सी गयी प्यार में,
चलो देखते हैं क्या होता आगे
जिंदगी ये क्या होती प्यार में.

गुरुवार, 15 जून 2017

न जाने फेसबुक वो क्यों, छोड़ कर चले गए


न जाने वो फेसबुक क्यों, छोड़ कर चले गए।
दिल अपने दीवाने का क्यों, तोड़ कर चले गए।। दिल खूब बहलता था मेरा देख-देख कर उन्हें, दिल बड़ी बेदर्दी से क्यों, झकझोड़ कर चले गए।।
अब और जीने की कोई अरमान न रही बाकी, खता बताते अपना मुख क्यों, मोड़ कर चले गए।।
ग़मों के सहारे बेखबर जिए जा रहा था जिंदगी, खुशियों से मेरा रिश्ता क्यों, जोड़ कर चले गए।। वो थे तो खूब दिखते थे दोनों ही जहाँ मुझको, रौशनी लेकर आखों को क्यों,फोड़ कर चले गए।।
-प्रेम फ़र्रुखाबादी

मंगलवार, 13 जून 2017

आप से क्या मिला साहिब


आप से क्या मिला साहिब।
 दूर हुआ हर गिला साहिब।। 

मत पूछियेगा हाल दिल का  
गुलाब जैसा खिला साहिब।।

अपना मिलन है कमाल का।  
क्या दिया है सिला साहिब।। 

थम जाए बस वक्त यहीं। 
यूं फले सिलसिला साहिब।।

गुरुवार, 8 जून 2017

चाहने वालों की यहाँ कमी नहीं है

चाहने वालों की यहाँ कमी  नहीं है.
मगर उनकी आखों में नमी नहीं है.

लाख ठुकराए दुनियां प्रेम दीवानों को, 

मगर उनकी गिनती कभी थमी नहीं है.

भले ही कही हो आपने  दिल से,
मगर बात आप की जमी नहीं है.

कहने को बहुत खूबसूरत है दुनिया,

मगर तबियत मेरी कहीं रमी नहीं है. 

सोमवार, 5 जून 2017

तुम हुए मुझ पर फ़िदा क्यों


तुम हुए मुझ पर फ़िदा क्यों, यह तुम जानो। 
फूल तेरे दिल का खिला क्यों, यह तुम जानो।। 
शिकायत भरी नज़रों से देखते रहते हो मुझे। 
करते रहते सबसे गिला क्यों, यह तुम जानो।। 

बुधवार, 24 मई 2017

मेरे दोहे

पिछले कर्मों का ही है,यह जीवन परिणाम.
कोई पाए दुःख यहाँ, तो कोई सुखधाम..
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धीरज धारण जो करे, चले समय के साथ.
साथ साथ उसके रहे, हर पल दीनानाथ..
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जीवन जीना कठिन है,मिलना है आसान.
लगा सोच परहित में,मत घबरा नादान..
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तेरा जीवन पूर्ण है, रखना इसको पूर्ण.
पूर्ण में दिख जाएगा,तुझको यहाँ सम्पूर्ण..
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अपने समय पे आते, दुनियां में सब लोग.
अपने समय पे जाते,अपना दुःख-सुख भोग..
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बनता बिगड़ता रहता, जीवन का यह चक्र.
रख यहाँ सीधी-सीधी,मत रखना दृष्टी वक्र.. 
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शुभता से शुभ कर्म हों,शुभता रखिये पाल.
शुभता से ही शुभ फलें,इतना रखिये ख्याल..
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दुष्ट की है कितनी उमर,कह न सका ये कोय.
दुष्टता ही ले डूबती, सब कुछ अपना खोय.. 
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- प्रेम फर्रुखाबादी मो : 9958871010 


सोमवार, 15 मई 2017

बोली

क्भी लगे यह फूल सी,
कभी लगे यह शूल।
बोली का सब खेल है,
यह मत प्यारे भूल।।   

यूँ ही कुछ भी मत बोलो,
जब बोलो हितकर बोलो। 
जो हित कर बोली बोले,
यह दुनियां उसकी हो ले।। 

बोली से ही प्यार बढे,
बोली से ही रार बढे।  
बोली से ही मित्र बने,
बोली से ही शत्रु बने।।   

बोली से ही रिश्ते खिलते,
बोली से ही रस्ते मिलते।
बोली से ही सुख मिलता,
बोली से ही दुःख मिलता।।   

बोली से ही सम्मान मिले,
बोली से ही अपमान मिले। 
बोली से ही मसले सुलझें,
बोली से ही मसले उलझें।।  

बोली से ही व्यवहार चले,
बोली से ही व्यापार चले । 
बोली से ही परिवार चले,
बोली से ही संसार चले।।
  
बोली से ही प्राण भरे,
बोली से ही प्राण हरें।   
कहता हर कोई संत है,
बोली की महिमा अनंत।। 

यूँ ही कुछ भी मत बोलो,
जब बोलो हितकर बोलो। 
जो हित कर बोली बोले,
यह दुनियां उसको हो ले।। 
   

सोमवार, 8 मई 2017

मुहब्बत में अच्छे अच्छे बिखर जाते हैं


नफ़रत में अच्छे अच्छे बिखर जाते हैं
मुहब्बत में अच्छेअच्छे निखर जाते हैं

हुस्न का दीवाना बताओ यहाँ कौन नहीं
हुस्न देख कर अच्छे अच्छे मर जाते हैं।

अकेला तो यहाँ पर कोई जी नहीं सकता
प्यार पा कर अच्छे अच्छे संवर जाते है

मुश्किल से गुजरे उसकी जुदाई का पल
साथ मिले तो अच्छे अच्छे तर जाते हैं

रविवार, 30 अप्रैल 2017

थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे


थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे।  
कहानी वो सारी पुरानी लिखेंगे।।  

जो दी थी मुझे बहुत प्यार से।  
उसी प्यार की निशानी लिखेंगे।।  

याद आता है वो गुजरा जमाना। 
गुजरे ज़माने की जवानी लिखेंगे।। 

हाय वो  रूप उसका सलोना। 
पड़ी चुनर उसपे धानी लिखेंगे।। 

भुलाये नहीं भूलता प्यार उसका। 
उसकी हर एक मेहरबानी लिखेंगे।।

बोलो से मुझको रिझाती थी वो।
वही मीठी - मीठी बानी लिखेंगे।। 

दोनों ही डूबे थे हम प्यार में। 
समझे ज़माना वो मानी लिखेंगे।।

हाय वो दिन वो प्यारी रातें ।  
घड़ियाँ वो प्यारी सुहानी लिखेंगे।। 

रविवार, 23 अप्रैल 2017

पत्नी जब पुत्र नज़र से पति को देखती है


पत्नी जब पति को प्यार से नहीं देखती है
तो पति नज़र उसको बहुत दूर फ़ेकती है

धीरे धीरे उनके दरमियाँ दूरियां बढ़ जाती
फिर पति कहीं पत्नी कहीं आँख सेकती है

अपना प्यार बस अपनी नज़र से ही देखो
ऐसा करने से जिन्दगी हँसती खेलती है 

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है


न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है। 
भला माने या कोई बुरा अपनी तो ये आदत है।

आज तक कौन किसको खुश कर पाया यहाँ
किसी को खुश रखना एक बहुत बड़ी आफत है।

ख़ुशी से उछल पड़ता हर कोई इस बात पर, 
गर कहे कोई आज मेरे घर आपकी दावत है। 

बड़ी बेचैनी सताये और कुछ समझ न आये, 
समझ जाइये दिल में किसी के लिए चाहत है।

अपने आगे किसी की भी चलने ही न दे कोई, 
समझ लो बड़ा ढीठ है या उसमें बड़ी ताकत है।

तूने तो मेरे होँठ सिल दिए


तूने तो मेरे होँठ सिल दिए
आखिर बता किस के लिए।

तुझको देख कर  क्या कहें
गिर पड़ा हूँ जैसे बिन पिए।

कैसे सम्भालूं बता खुदको
जाने क्या नहीं क्या किये।

बात बने तो भला कैसे बने
बिना लिए दिल बिना दिए।  

गुरुवार, 30 मार्च 2017

"वरिष्ठ कवि महोदय"


"वरिष्ठ कवि महोदय"
मैं एक वरिष्ठ कवि हूँ। बहुत पापड़ बेलने के बाद वरिष्ठ कवि बना हूँ। वरिष्ठ कवियों से आशीर्वाद लिया हूँ। उनसे जो सीखा है वो मेरी गरिमा बनाये रखने में काफी मददगार है।
काव्य गोष्ठियों में जब बुलाया जाता हूँ तो मैं अक्सर अंत में पहुँचता ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मेरा स्वागत कर सकें और मुझे सुन सकें। आधा घंटे के अंदर वहां से जाने की मैं अपनी भूमिका बनाने लगता हूँ- " व्यस्त होने के कारण मैं ज्यादा समय आप सबको नहीं दे पा रहा हूँ। इस लिए आप सभी से विनम्र निवेदन है कि मुझे पहले सुन लिया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा मेरे लिए, क्यों कि मुझे अन्य कार्यक्रमों में भी जाना , मुझे आशा है कि आप लोग अन्यथा नहीं लेंगे। साथ में यह भी आग्रह है कि मेरी शाल और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाय।" शाल और प्रतीक चिह्न मिलने के बाद यह कहकर विदा लेते हैं कि - मित्रो , क्षमा करें! मेरी शुभ कामनाएं और आशीर्वाद !!!!

भारत की सेना ने कमाल कर दिया


भारत की सेना ने कमाल कर दिया
कमाल जो किया वो बेमिशाल कर दया
एल ओ सी पार सर्जिकल स्ट्राइक करके
दुश्मनों  का हाल- बेहाल कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

खून का बदला खून से ले लिया
जितना मिला उससे ज्यादा दे दिया
एक ही झटके में  निढ़ाल  कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

होश में जो थे बेहोश  हो गए
जो शेर समझते थे खरगोश हो गए
घुसपैठियों को काल के गाल कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

क्या करें क्या न करें सोचने लगे
अपने अपने बालों को सब नोचने लगे
दुश्मनों के जी का जंजाल  कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।
               -प्रेम फ़र्रुखाबादी 


इस दुनियां में कौन है अपना कहना मुश्किल है


इस दुनियां में कौन है अपना, कहना मुश्किल है 
जाने कौन कब दे जाय धोखा, कहना मुश्किल है 
अक्सर  लोग  भरोसे से  ही  तोड़  देते हैं भरोसा 
आखिर किस पर करें भरोसा, कहना मुश्किल है 
                          -प्रेम फ़र्रुखाबादी  


शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

मुझे तन्हा छोड़ कर क्यों चला गया तू



मुझे तन्हा छोड़ कर क्यों चला गया तू 
तन - मन  दोनों  से क्यों गला गया तू 
होली  आने  में  तो अभी  बहुत  देर थी 
होली  से पहले  ही  क्यों  जला गया तू
              - प्रेम फर्रुखाबादी