सोमवार, 5 सितंबर 2016

कब देगा तू मेरा साथ,



एक पत्नी अपने पति से कितनी पीड़ित है. 
अपनी पीड़ा के साथ-साथ वह अपने गुस्से
का भी बयान इस गीत के माध्यम से इस प्रकट कर रही है-

कब देगा तू मेरा साथ,
कब मानेगा मेरी बात
दिन तो जैसे तैसे कटे,
कटती नहीं है मेरी रात ।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

दिखने में लगता है भोला,
जब बोला झूठ ही बोला
देख ली तेरी क्या औकात।
दिन तो जैसे तैसे कटे... 

अंदर से तू है शातिर,
समझ गयी हूँ मैं आखिर
नरक बना दिए हैं हालात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

मुझे कभी समझा ही नहीं,
माना कभी अपना ही नहीं
कभी समझे नहीं मेरे जज्बात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

सपने मेरे सब चूर हुए,
मरने को मजबूर हुए
दुःख में डूबे हैं दिन रात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...






     


1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-09-2016) को हो गए हैं सब सिकन्दर इन दिनों ...चर्चा मंच ; 2458 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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