बुधवार, 10 अगस्त 2016

स्वरचित अन्तरा / फिल्म हमराज़ /तुम अगर साथ देने का वादा करो


तुम रहो प्यार से हम रहें प्यार से  
प्यार से हम बचें वक्त की मार से 
प्यार में तुम मुझे यूँ डुबोती रहो  
प्यार में मैं तुम्हें यूँ डूबाता रहूँ       -प्रेम फर्रुखाबादी 
तुम अगर साथ देने का वादा करो 
मैं यूँ ही मस्त नग्में सुनाता रहूँ
 

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-08-2016) को "भाव हरियाली का" (चर्चा अंक-2432) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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