शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

ऐसा नहीं कि हम कुछ समझते नहीं


ऐसा नहीं कि हम कुछ समझते नहीं
समझते तो बहुत हैं मगर कहते नहीं।
कहने से क्या इन्सां बुरा मान जाता है
बुरा मान जाये कोई हमें नहीं भाता है।  

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-08-2016) को "धरा ने अपना रूप सँवारा" (चर्चा अंक-2427) पर भी होगी।
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    हरियाली तीज और नाग पञ्चमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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