मंगलवार, 1 मार्च 2016

स्वरचित अन्तरा / ओ फिरकी वाली


ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना नहीं फिर जाना तू अपनी जुबान से
कि तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से
ओ मतवाली ये दिल क्यों तोड़ा ये तीर काहे छोड़ा नज़र की कमान से
कि मर जाऊँगा मैं बस मुस्कान से
ओ फिरकी वाली ...

पहले भी तूने इक रोज़ ये कहा था -२
आऊँगी तू ना आई
वादा किया था सैंया बन के बदरिया
छाऊँगी तू ना छाई
( मेरे प्यासे ) -२ नैना तरसे तू निकली ना घर से
कैसे बीती वो रात सुहानी तू सुन ले कहानी ये सारे जहान से

कि तेरे नैना हैं ...
सोचा था मैने किसी रोज़ गोरी हँस के -२
बोलेगी तू ना बोली
मेरी मोहब्बत भरी बातें सुन-सुन के
डोलेगी तू ना डोली
( ओ सपनों में ) -२ आने वाली रुक जा जाने वाली 
किया तूने मेरा दिल चोरी ये पूछ ले गोरी ज़मीं आसमान से 
कि तेरे नैना हैं ...                                                           -आनंद बख्शी 
चाह में तेरी मैं तो पागल हुआ हूँ -२ 
देख ले तू देख ले 
फिर भी नहीं मैं तुझको छुआ हूँ 
देख ले तू देख ले 
(लाखों में तू )-२ एक अनोखी  दिल को भाये तेरी शोखी 
कोई झूठ न बोलूं   मैं सच ही बोलूँ कसम ईमान  से          - प्रेम फ़र्रुखाबादी 
कि तेरे नैना हैं ...


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