बुधवार, 24 मई 2017

मेरे दोहे

पिछले कर्मों का ही है,यह जीवन परिणाम.
कोई पाए दुःख यहाँ, तो कोई सुखधाम..
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धीरज धारण जो करे, चले समय के साथ.
साथ साथ उसके रहे, हर पल दीनानाथ..
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जीवन जीना कठिन है,मिलना है आसान.
लगा सोच परहित में,मत घबरा नादान..
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तेरा जीवन पूर्ण है, रखना इसको पूर्ण.
पूर्ण में दिख जाएगा,तुझको यहाँ सम्पूर्ण..
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अपने समय पे आते, दुनियां में सब लोग.
अपने समय पे जाते,अपना दुःख-सुख भोग..
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बनता बिगड़ता रहता, जीवन का यह चक्र.
रख यहाँ सीधी-सीधी,मत रखना दृष्टी वक्र.. 
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शुभता से शुभ कर्म हों,शुभता रखिये पाल.
शुभता से ही शुभ फलें,इतना रखिये ख्याल..
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दुष्ट की है कितनी उमर,कह न सका ये कोय.
दुष्टता ही ले डूबती, सब कुछ अपना खोय.. 
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- प्रेम फर्रुखाबादी मो : 9958871010 


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