रविवार, 30 अप्रैल 2017

थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे


थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे।  
कहानी वो सारी पुरानी लिखेंगे।।  

जो दी थी मुझे बहुत प्यार से।  
उसी प्यार की निशानी लिखेंगे।।  

याद आता है वो गुजरा जमाना। 
गुजरे ज़माने की जवानी लिखेंगे।। 

हाय वो  रूप उसका सलोना। 
पड़ी चुनर उसपे धानी लिखेंगे।। 

भुलाये नहीं भूलता प्यार उसका। 
उसकी हर एक मेहरबानी लिखेंगे।।

बोलो से मुझको रिझाती थी वो।
वही मीठी - मीठी बानी लिखेंगे।। 

दोनों ही डूबे थे हम प्यार में। 
समझे ज़माना वो मानी लिखेंगे।।

हाय वो दिन वो प्यारी रातें ।  
घड़ियाँ वो प्यारी सुहानी लिखेंगे।। 

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