रविवार, 30 अप्रैल 2017

थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे


थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे।  
कहानी वो सारी पुरानी लिखेंगे।।  

जो दी थी मुझे बहुत प्यार से।  
उसी प्यार की निशानी लिखेंगे।।  

याद आता है वो गुजरा जमाना। 
गुजरे ज़माने की जवानी लिखेंगे।। 

हाय वो  रूप उसका सलोना। 
पड़ी चुनर उसपे धानी लिखेंगे।। 

भुलाये नहीं भूलता प्यार उसका। 
उसकी हर एक मेहरबानी लिखेंगे।।

बोलो से मुझको रिझाती थी वो।
वही मीठी - मीठी बानी लिखेंगे।। 

दोनों ही डूबे थे हम प्यार में। 
समझे ज़माना वो मानी लिखेंगे।।

हाय वो दिन वो प्यारी रातें ।  
घड़ियाँ वो प्यारी सुहानी लिखेंगे।। 

रविवार, 23 अप्रैल 2017

पत्नी जब पुत्र नज़र से पति को देखती है


पत्नी जब पति को प्यार से नहीं देखती है
तो पति नज़र उसको बहुत दूर फ़ेकती है

धीरे धीरे उनके दरमियाँ दूरियां बढ़ जाती
फिर पति कहीं पत्नी कहीं आँख सेकती है

अपना प्यार बस अपनी नज़र से ही देखो
ऐसा करने से जिन्दगी हँसती खेलती है 

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है


न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है। 
भला माने या कोई बुरा अपनी तो ये आदत है।

आज तक कौन किसको खुश कर पाया यहाँ
किसी को खुश रखना एक बहुत बड़ी आफत है।

ख़ुशी से उछल पड़ता हर कोई इस बात पर, 
गर कहे कोई आज मेरे घर आपकी दावत है। 

बड़ी बेचैनी सताये और कुछ समझ न आये, 
समझ जाइये दिल में किसी के लिए चाहत है।

अपने आगे किसी की भी चलने ही न दे कोई, 
समझ लो बड़ा ढीठ है या उसमें बड़ी ताकत है।

तूने तो मेरे होँठ सिल दिए


तूने तो मेरे होँठ सिल दिए
आखिर बता किस के लिए।

तुझको देख कर  क्या कहें
गिर पड़ा हूँ जैसे बिन पिए।

कैसे सम्भालूं बता खुदको
जाने क्या नहीं क्या किये।

बात बने तो भला कैसे बने
बिना लिए दिल बिना दिए।