गुरुवार, 30 मार्च 2017

"वरिष्ठ कवि महोदय"


"वरिष्ठ कवि महोदय"
मैं एक वरिष्ठ कवि हूँ। बहुत पापड़ बेलने के बाद वरिष्ठ कवि बना हूँ। वरिष्ठ कवियों से आशीर्वाद लिया हूँ। उनसे जो सीखा है वो मेरी गरिमा बनाये रखने में काफी मददगार है।
काव्य गोष्ठियों में जब बुलाया जाता हूँ तो मैं अक्सर अंत में पहुँचता ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मेरा स्वागत कर सकें और मुझे सुन सकें। आधा घंटे के अंदर वहां से जाने की मैं अपनी भूमिका बनाने लगता हूँ- " व्यस्त होने के कारण मैं ज्यादा समय आप सबको नहीं दे पा रहा हूँ। इस लिए आप सभी से विनम्र निवेदन है कि मुझे पहले सुन लिया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा मेरे लिए, क्यों कि मुझे अन्य कार्यक्रमों में भी जाना , मुझे आशा है कि आप लोग अन्यथा नहीं लेंगे। साथ में यह भी आग्रह है कि मेरी शाल और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाय।" शाल और प्रतीक चिह्न मिलने के बाद यह कहकर विदा लेते हैं कि - मित्रो , क्षमा करें! मेरी शुभ कामनाएं और आशीर्वाद !!!!

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