शनिवार, 29 अप्रैल 2017

थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे


थी कितनी मेरी दीवानी लिखेंगे।
कहानी वो सारी पुरानी लिखेंगे।।
जो दी थी मुझे बहुत प्यार से।
उसी प्यार की निशानी लिखेंगे।।

याद आता है वो गुजरा जमाना।
गुजरे ज़माने की जवानी लिखेंगे।।
हाय वो रूप उसका सलोना।
पड़ी चुनर उसपे धानी लिखेंगे।।

भुलाये नहीं भूलता प्यार उसका।
उसकी हर एक मेहरबानी लिखेंगे।।
बोलो से मुझको रिझाती थी वो
वही मीठी - मीठी बानी लिखेंगे।।

दोनों ही डूबे थे हम प्यार में।
समझे ज़माना वो मानी लिखेंगे।।
हाय वो दिन वो प्यारी रातें ।
घड़ियाँ वो प्यारी सुहानी लिखेंगे।।

-प्रेम फर्रूखाबादी

रविवार, 23 अप्रैल 2017

पत्नी जब पुत्र नज़र से पति को देखती है


पत्नी जब पुत्र नज़र से पति को देखती है
तो पति नज़र उसको बहुत दूर फ़ेकती है

धीरे धीरे उनके दरमियाँ दूरियां बढ़ जाती
फिर पति कहीं पत्नी कहीं आँख सेकती है

अपना प्यार बस अपनी नज़र से ही देखो
ऐसा करने से जिन्दगी हँसती खेलती है 

सिर्फ चार दिन ही हुआ करते हैं प्यार के 
उम्र भर फिर पति झेंपता पत्नी झेंपती है ।


शनिवार, 22 अप्रैल 2017

न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है


न किसी से नफरत है न किसी से मुहब्बत है। 
भला माने या कोई बुरा अपनी तो ये आदत है।

आज तक कौन किसको खुश कर पाया यहाँ
किसी को खुश रखना एक बहुत बड़ी आफत है।

ख़ुशी से उछल पड़ता हर कोई इस बात पर, 
गर कहे कोई आज मेरे घर आपकी दावत है। 

बड़ी बेचैनी सताये और कुछ समझ न आये, 
समझ जाइये दिल में किसी के लिए चाहत है।

अपने आगे किसी की भी चलने ही न दे कोई, 
समझ लो बड़ा ढीठ है या उसमें बड़ी ताकत है।

तूने तो मेरे होँठ सिल दिए


तूने तो मेरे होँठ सिल दिए
आखिर बता किस के लिए।

तुझको देख कर  क्या कहें
गिर पड़ा हूँ जैसे बिन पिए।

कैसे सम्भालूं बता खुदको
जाने क्या नहीं क्या किये।

बात बने तो भला कैसे बने
बिना लिए दिल बिना दिए।  

गुरुवार, 30 मार्च 2017

"वरिष्ठ कवि महोदय"


"वरिष्ठ कवि महोदय"
मैं एक वरिष्ठ कवि हूँ। बहुत पापड़ बेलने के बाद वरिष्ठ कवि बना हूँ। वरिष्ठ कवियों से आशीर्वाद लिया हूँ। उनसे जो सीखा है वो मेरी गरिमा बनाये रखने में काफी मददगार है।
काव्य गोष्ठियों में जब बुलाया जाता हूँ तो मैं अक्सर अंत में पहुँचता ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मेरा स्वागत कर सकें और मुझे सुन सकें। आधा घंटे के अंदर वहां से जाने की मैं अपनी भूमिका बनाने लगता हूँ- " व्यस्त होने के कारण मैं ज्यादा समय आप सबको नहीं दे पा रहा हूँ। इस लिए आप सभी से विनम्र निवेदन है कि मुझे पहले सुन लिया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा मेरे लिए, क्यों कि मुझे अन्य कार्यक्रमों में भी जाना , मुझे आशा है कि आप लोग अन्यथा नहीं लेंगे। साथ में यह भी आग्रह है कि मेरी शाल और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाय।" शाल और प्रतीक चिह्न मिलने के बाद यह कहकर विदा लेते हैं कि - मित्रो , क्षमा करें! मेरी शुभ कामनाएं और आशीर्वाद !!!!

भारत की सेना ने कमाल कर दिया


भारत की सेना ने कमाल कर दिया
कमाल जो किया वो बेमिशाल कर दया
एल ओ सी पार सर्जिकल स्ट्राइक करके
दुश्मनों  का हाल- बेहाल कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

खून का बदला खून से ले लिया
जितना मिला उससे ज्यादा दे दिया
एक ही झटके में  निढ़ाल  कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

होश में जो थे बेहोश  हो गए
जो शेर समझते थे खरगोश हो गए
घुसपैठियों को काल के गाल कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।

क्या करें क्या न करें सोचने लगे
अपने अपने बालों को सब नोचने लगे
दुश्मनों के जी का जंजाल  कर दिया
भारत की सेना ने कमाल कर दिया ।
               -प्रेम फ़र्रुखाबादी 


इस दुनियां में कौन है अपना कहना मुश्किल है


इस दुनियां में कौन है अपना, कहना मुश्किल है 
जाने कौन कब दे जाय धोखा, कहना मुश्किल है 
अक्सर  लोग  भरोसे से  ही  तोड़  देते हैं भरोसा 
आखिर किस पर करें भरोसा, कहना मुश्किल है 
                          -प्रेम फ़र्रुखाबादी  


शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

मुझे तन्हा छोड़ कर क्यों चला गया तू



मुझे तन्हा छोड़ कर क्यों चला गया तू 
तन - मन  दोनों  से क्यों गला गया तू 
होली  आने  में  तो अभी  बहुत  देर थी 
होली  से पहले  ही  क्यों  जला गया तू
              - प्रेम फर्रुखाबादी