सोमवार, 5 सितंबर 2016

कब देगा तू मेरा साथ,



एक पत्नी अपने पति से कितनी पीड़ित है. 
अपनी पीड़ा के साथ-साथ वह अपने गुस्से
का भी बयान इस गीत के माध्यम से इस प्रकट कर रही है-

कब देगा तू मेरा साथ,
कब मानेगा मेरी बात
दिन तो जैसे तैसे कटे,
कटती नहीं है मेरी रात ।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

दिखने में लगता है भोला,
जब बोला झूठ ही बोला
देख ली तेरी क्या औकात।
दिन तो जैसे तैसे कटे... 

अंदर से तू है शातिर,
समझ गयी हूँ मैं आखिर
नरक बना दिए हैं हालात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

मुझे कभी समझा ही नहीं,
माना कभी अपना ही नहीं
कभी समझे नहीं मेरे जज्बात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

सपने मेरे सब चूर हुए,
मरने को मजबूर हुए
दुःख में डूबे हैं दिन रात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...






     


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