मंगलवार, 6 सितंबर 2016

तेरे प्यार में गिरा गया हूँ उठाले मुझको


तेरे प्यार में गिरा गया हूँ उठाले मुझको, 
दे कर अपनी मुहब्बत के उजाले मुझको। 

खुद को संभालते संभालते थक गया हूँ मैं, 
अब कोई तो आये और आके संभाले मुझको। 

बिना किसी को अपना बनाये कोई जिए कैसे 
मैं कोई बुरा तो नहीं अपना बनाले मुझको। 

तैयार हूँ किसी को अपना बनाने के लिए, 
दिल से निभा दूंगा कोई अपनाले मुझको। 

चुस्त दुरस्त मस्त दिल वाले की तलाश है, 
पसंद ही नहीं आते लोग ढीले ढाले मुझको। 

जब भी बुलाओगे पास दौड़ा चला आऊंगा, 
या फिर तू ही कभी पास बुलाले मुझको। 

किस्मत मेरी बंद पड़ी हुई तालों में यारो, 
चाबी लिए घूम रहा मिलते नहीं ताले मुझको। 

"कंधे पर लाश"


    
 " कंधे पर लाश " 

इंसान ने इंसान का साथ छोड़ दिया है                                           
बेशर्मी से उसने अपना मुख मोड़ लिया है.

इंसान को इंसान कहने में अब शर्म आये 
हैवानियत से उसने अपना नाता जोड़ लिया है. 

ऐसा किसी के साथ न हो जमीन पर 
जिसने भी देखा उनको झकझोड़ दिया है. 

इतनी गिर जाएगी इंसानियत मालूम न था 
खुदगर्जी ने इंसान को इंसान से तोड़ दिया है. 

सोमवार, 5 सितंबर 2016

कब देगा तू मेरा साथ,



एक पत्नी अपने पति से कितनी पीड़ित है. 
अपनी पीड़ा के साथ-साथ वह अपने गुस्से
का भी बयान इस गीत के माध्यम से इस प्रकट कर रही है-

कब देगा तू मेरा साथ,
कब मानेगा मेरी बात
दिन तो जैसे तैसे कटे,
कटती नहीं है मेरी रात ।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

दिखने में लगता है भोला,
जब बोला झूठ ही बोला
देख ली तेरी क्या औकात।
दिन तो जैसे तैसे कटे... 

अंदर से तू है शातिर,
समझ गयी हूँ मैं आखिर
नरक बना दिए हैं हालात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

मुझे कभी समझा ही नहीं,
माना कभी अपना ही नहीं
कभी समझे नहीं मेरे जज्बात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...

सपने मेरे सब चूर हुए,
मरने को मजबूर हुए
दुःख में डूबे हैं दिन रात।
दिन तो जैसे तैसे कटे...