मंगलवार, 26 जुलाई 2016

हर किसी से दिल लगा नहीं करता


हर किसी से दिल लगा नहीं करता
जिससे लगा करता हटा नहीं करता।

उसको कोई कहे तो भला क्या कहे
जो प्यार से प्यार अदा नहीं करता।

इस दुनियां में ऐसा नहीं दिखा कोई
जो कभी किसी से दगा नहीं करता।

प्यार से ही प्यार पैदा होता अक्सर
प्यार से प्यार कभी घटा नहीं करता।

जो प्यार करता है बस करता ही है
भूल कर भी कभी गिला नहीं करता।

आदमी अपने कर्मों का फल भोगता
उसका खुदा उसका बुरा नहीं करता।

चुपचाप बैठ गया है वो दिल लेकर
वफ़ा के बदले क्यों वफ़ा नहीं करता।  


1 टिप्पणी:

  1. तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ ,तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ

    उठते बैठते चलते फिरते, तुझको ही बस सोचूँ
    कुछ कुछ होने लगता मन में,मन को कैसे रोकूँ
    बंद हो या खुली आँख हो,देखूँ तेरे ही नज़ारे
    तेरे नज़ारे मुझको लगते, अपनी जां से प्यारे

    तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ, तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ

    समझाने वाले समझाते,पर कुछ भी समझ न आये
    कैसे मिले सकून मुझे, यह कोई नहीं बताये
    अपनी अपनी कह के, सारे चले जाते हैं
    और हम बैठे बैठे अपने, हाथ मले जाते हैं

    तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ ,तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ

    प्रीति का दीप जलाकर तूने, मुझमें किया उजाला
    मस्ती में भर दिया है तूने, मेरे मन का प्याला
    तेरी कसम अकेले प्याला, मुझसे पिया न जाये
    किसी तरह भी बिन तेरे, मुझसे जिया न जाए

    तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ

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