शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

स्वरचित अन्तरा - फिल्म -समझौता


स्वरचित अन्तरा - फिल्म -समझौता 

हार मिलेगी, जीत मिलेगी 
कभी नफ़रत तो, कभी प्रीत मिलेगी 
अलग अलग है रीत यहाँ 
अलग ही, रीत मिलेगी -२     -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

समझौता ग़मों से कर लो 
जिंदगी में गम भी मिलते हैं.

स्वरचित अन्तरा - फिल्म -समझौता 

नफ़रत  से नफरत को, भगा न सका कोई 
इस सच को झूठ यहाँ, बता न सका कोई 
हम प्यार से-३  प्यार जगाये हैं,             -प्रेम फ़र्रुखाबादी 
प्यार का तोहफा लाये हैं 
बड़ी दूर से आये हैं, प्यार का तोहफा लाये हैं. 

गुरुवार, 28 जुलाई 2016

फिल्म - कोरा कागज स्वरचित अन्तरा


फिल्म - कोरा  कागज 
स्वरचित अन्तरा 

जाएँ तो जाएँ कहाँ सूझे न राह कोई 
न यहाँ की न वहाँ की मुझे न चाह कोई 
कहने को जिन्दा हूँ लेकिन मर के रह गया.  - प्रेम फ़र्रुखाबादी 

मेरा जीवन कोर कागज कोरा ही रह गया 
जो लिखाथा आंसुओं के संग बह गया 

फिल्म - कोरा कागज 
स्वरचित अन्तरा 

जाने क्यों कोई मुझे भाने लगा है 
सपनो में भी रोज आने लगा है 
चाहे दिन हो या रैना 
छीन लिया दिल का चैना    - प्रेम फ़र्रुखाबादी 

कोई ये तो बतादे मुझे वो 
तो नहीं हो गया मुझे वो  
मेरा पढ़ने में नहि  लागे  दिल   
दिल पे क्या पडि गयी मुश्किल 

मंगलवार, 26 जुलाई 2016

तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ ,तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ


 तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ ,तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ 

उठते बैठते चलते फिरते, तुझको ही बस सोचूँ 
कुछ कुछ होने लगता मन में,मन को कैसे रोकूँ 
बंद हो या खुली आँख हो,देखूँ तेरे ही नज़ारे
तेरे नज़ारे मुझको लगते, अपनी जां से प्यारे 

तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ, तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ 

समझाने वाले समझाते,पर कुछ भी समझ न आये 
कैसे मिले सकून मुझे, यह कोई नहीं बताये 
अपनी अपनी कह के, सारे चले जाते हैं 
और हम बैठे बैठे अपने, हाथ मले जाते हैं 

तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ ,तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ 

प्रीति का दीप जलाकर तूने, मुझमें किया उजाला 
मस्ती में भर दिया है तूने, मेरे मन का प्याला 
तेरी कसम अकेले प्याला, मुझसे पिया न जाये 
किसी तरह भी बिन तेरे, मुझसे जिया न जाए 

तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ तुझे भूलूँ तो कैसे भूलूँ

हर किसी से दिल लगा नहीं करता


हर किसी से दिल लगा नहीं करता
जिससे लगा करता हटा नहीं करता।

उसको कोई कहे तो भला क्या कहे
जो प्यार से प्यार अदा नहीं करता।

इस दुनियां में ऐसा नहीं दिखा कोई
जो कभी किसी से दगा नहीं करता।

प्यार से ही प्यार पैदा होता अक्सर
प्यार से प्यार कभी घटा नहीं करता।

जो प्यार करता है बस करता ही है
भूल कर भी कभी गिला नहीं करता।

आदमी अपने कर्मों का फल भोगता
उसका खुदा उसका बुरा नहीं करता।

चुपचाप बैठ गया है वो दिल लेकर
वफ़ा के बदले क्यों वफ़ा नहीं करता।  


गरीब घर चलाना जानता है


गरीब घर चलाना जानता है
भूख को मिटाना जानता है.

आज तो है कल नहीं रहेगा
फिर भी निभाना जानता है.

रोने को दिल करता बहुत
गम को छुपाना जानता है.

गरीब का कोई नहीं यहाँ
यह बात जमाना जानता है.

जिए हर हाल में जिंदगी
बुरा वक्त भुलाना जानता है.

रूठ कर क्या बिगाड़ लेगा
खुद को बहलाना जानता है.

चल पड़ा हूँ मुहब्बत की डगर


चल पड़ा हूँ मुहब्बत की डगर
न कुछ पता है न कुछ खबर.

कुछ न पूँछिये दिल का हाल
बहुत खुश है दिल का नगर.

दिल दीवाना हो जा पूरी तरह
अब न रहे कोई कमी कसर.

मुहब्बत का ज्ञान नहीं कोई
बिल्कुल अनारी हूँ मैं बेहुनर.

दिल मेरा करे तो क्या करे
न होती शाम न होती सहर.

चाहे सुबह हो चाहे हो शाम
निकल पड़ता हूँ सज संवर.

भटकता हूँ बादलों की तरह
पैर भी दुःखें और दुखे कमर, 

सोमवार, 11 जुलाई 2016

जैसे तुम ने मुझे छुआ है

ज्यों तुम ने मुझे छुआ है.
दिल में कुछ कुछ हुआ है.
मौसम को देख कर जैसे
पेड़ से कोई आम चुआ है.