गुरुवार, 2 जून 2016

जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ


मन की जिंदगी किसको मिली यहाँ
जिसको मिली यहाँ खुश वो भी नहीं यहाँ

जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ
कभी खुद का गम कभी जग का गम पीते चले जाएँ
जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ।

एक नहीं कई एक मिलेंगे दिल को दुखाने वाले
झुकने वाले नहीं मिलेंगे मिलेंगे झुकाने वाले
चाक गिरेबां हो जाए तो सीते चले जाएँ।
जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ

साथ नहीं कोई देता है देखो प्यारे यहाँ
कहने को सब साथी है देखो सारे यहाँ
अपनी दम पर अपनी साँसे खींचे चले जाएँ।
जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ

उतना इकठ्ठा करो कि यह जिंदगी चलती रहे
प्यार मुहब्बत से रह कर हर ख़ुशी मिलती रहे 
रीते ही हम आये हैं रीते चले जाएँ।
जैसी मिले जिंदगी वैसी जीते चले जाएँ
                              - प्रेम फ़र्रुखाबादी 

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