मंगलवार, 15 सितंबर 2015

स्वरचित अंतरा फिल्म अब्दुल्ला


स्वरचित अंतरा -फिल्म अब्दुल्ला 


मैं ने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं
मेरे यार सा हसीं
चाँद ने कहा चाँदनी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैं ने पूछ चाँद से ...

खूब्सूरती जो तूने पाई
लुट गई ख़ुदा की बस ख़ुदाई
मीर की ग़ज़ल कहूँ तुझे मैं
या कहूँ ख़याम की रुबाई
मैं जो पूछूँ शायरों से ऐसा दिलनशीं
कोई शेर है कहीं
शायर कहे शायरी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैं ने पूछा चाँद से ...             -गीत कार आनंद बख्शी 

पूंछ लिया मैंने हर किसी से 
तेरे सिवा नहीं कोई जमीं पे 
तू नहीं तो नरक है यहाँ पर  
तू जो है तो स्वर्ग है यहीं पे 
मैं ने पूंछा लोगों से कि देखा है कहीं 
मेरे यार सा हंसीं 
लोग कहें जिंदगी की कसम 
नहीं, नहीं, नहीं                  -स्वरचित अंतरा प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मैं ने पूछा चाँद से ...








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