बुधवार, 12 अगस्त 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - आप की कसम



फिल्म - आप की कसम 

करवटें बदलते रहे सारी रात हम, आप की क़सम
ग़म न करो दिन जुदाई के बहुत हैं कम, आप की क़सम

याद तुम आते रहे इक हूक़ सी उठती रही
नींद मुझसे, नींद से मैं भागती छुपती रही
रात भर बैरन निगोड़ी चाँदनी चुभती रही
आग सी जलती रही, गिरती रही शबनम, आप की क़सम ... -आनंद बक्शी 

भूल जाएँ हम तुम्हें यह हो नहीं सकता कभी 
दिल मेरा किसी और में खो नहीं सकता कभी 
बोझ तेरी दूरियों का और ढो नहीं सकता कभी
देख  कर  तुझको  पड़े  दम  में  मेरी  दम,  आप की क़सम ... -प्रेम फ़र्रुखाबादी  

बुधवार, 5 अगस्त 2015

गरीबों - अमीरों के बीच की दूरी पटना बाकी है


गरीबों - अमीरों के बीच की दूरी पटना बाकी है 
समाज में अभी तक ऐसी घटना घटना बाकी है
यूँ तो दूरी पाटने में लगे हुए हैं कई लोग मगर 
सोच से अभी तक ऐसे बादलों का छटना बाकी है