मंगलवार, 31 मार्च 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - बैराग



स्वरचित अन्तरा फिल्म - बैराग     गीतकार- आनंद बक्शी 

छोटी सी उम्र में लग गया रोग कहते है
लोग की मई मर जाऊँगी 
पर मरने से पहले कुछ करने से पहले 

ले के तेरा नाम तुझे बदनाम
मैं कर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी

( येहे किसी सहरी छोरी की प्रीत नहीं है बाबू ) -२

एक बन्जारन केह मतवारे नैनों का है जादू 
तू न जा मेरी मुसकान पे 
खेल जाऊँगी मैं जी-जान पे 
छोड़ूँगी ना साथ -२ ऐसी क्या है बात 
के मैं डर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी             -आनंद बक्शी 

(जिसने प्यार किया ही नहीं,

वो क्या समझे प्यार )-२ 
प्यार बिना यह जीवन जीना,
बिल्कुल है बेकार 
नैनो से नैन मिले ऐसे, मस्ती सी छायी है जैसे
प्यार का नशा -२ कुछ ऐसा चढ़ा 
के मैं तर जाऊँगी                                   -प्रेम फ़र्रुखाबादी 
                                                                               
हो मैं मर जाऊँगी



पर मरने से पहले कुछ करने से पहले 
ले के तेरा नाम तुझे बदनाम
मैं कर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी






मंगलवार, 17 मार्च 2015

जिन्दगी, कर ले हँसी, कर के, मुझपे यकीं


जिन्दगी,कर ले  हंसीन , कर के, मुझपे  यकीं

वरना जिन्दगी में  कुछ भी नहीं,कुछ भी नहीं
जिन्दगी, कर ले हंसीन, कर के,  मुझपे यकीं

कसम हैं  तुझको
  मेरी हंसीना
मुझसा 
मिलेगा तुम्हें कहीं ना

आओ बात  तो सुनो  दिल की

क्यों किये हो  मुश्किल  जीना
प्यार से ही रोशन है, सचमुच यह जिन्दगी

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के,मुझपे यकीं

कब  तक मुझसे यूं दूर भागोगे
कब खुलेगी 
आँख कब जागोगे 

सोच सोच के मैं पगलाता जाऊं
आखिर कब तक  बात मानोगे
क्या चाहती हो तुम जरा कुछ  कहो तो सही

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के, मुझपे यकीं

दिल में तुम्हारे क्या चल रहा
बतला दो
जो ख्याल पल रहा
बोलो दिलवर कुछ तो बोलो
यूँ चुप रहना  मुझे  खल रहा

आओ करीब आओ, हां  करो छोडो नहीं नहीं

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के, मुझपे यकीं

कोई न जाने कब किस को कहाँ प्यार हो जाए


कोई न जाने कब किस को कहां प्यार हो जाये
होश गवां कर  कब अपनी बेहोशी में खो जाये
हर किसी को तलाश है यहां प्रेम अपनेपन की
जिसके पहलू में जाये और मस्ती में सो जाये।