शनिवार, 12 दिसंबर 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - बैराग


फिल्म - बैराग 

रफ़ी: पीते पीते कभी-कभी यूं जाम बदल जाते हैं
जाम बदल जाते हैं - २
अरे काम बदल जाते हैं, लोगों के नाम बदल जाते हैं
रफ़ी: ये परवाना-ए-शमा, मेहमान है इक रात का - २
दिल की बातें छेड़ दूं, डर है बस इस बात का
यहाँ से वहाँ तक जाने में, वहाँ से यहाँ तक आने में
लोग ये कहते हैं जी - २
बंद लिफ़ाफ़े में भी, दिल के पैग़ाम बदल जाते हैं
पीते पीते ...                                          -आनंद बक्शी 

दौलत का ऐसा नशा, सिर पे चढ़ के बोलता 
जिसपे भी चढ़ जाये, पागल बन के डोलता 
कोई झूठ नहीं कहता हूँ मैं,सचमुच ही कहता हूँ मैं 
दौलत की शान ऐसी,परसा से बदले परसी 
परसी से परशुराम बदल जाते हैं    स्वरचित अन्तरा - प्रेम फ़र्रुखाबादी 

पीते पीते ...

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

स्वरचित अंतरा फिल्म अब्दुल्ला


स्वरचित अंतरा -फिल्म अब्दुल्ला 


मैं ने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं
मेरे यार सा हसीं
चाँद ने कहा चाँदनी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैं ने पूछ चाँद से ...

खूब्सूरती जो तूने पाई
लुट गई ख़ुदा की बस ख़ुदाई
मीर की ग़ज़ल कहूँ तुझे मैं
या कहूँ ख़याम की रुबाई
मैं जो पूछूँ शायरों से ऐसा दिलनशीं
कोई शेर है कहीं
शायर कहे शायरी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैं ने पूछा चाँद से ...             -गीत कार आनंद बख्शी 

पूंछ लिया मैंने हर किसी से 
तेरे सिवा नहीं कोई जमीं पे 
तू नहीं तो नरक है यहाँ पर  
तू जो है तो स्वर्ग है यहीं पे 
मैं ने पूंछा लोगों से कि देखा है कहीं 
मेरे यार सा हंसीं 
लोग कहें जिंदगी की कसम 
नहीं, नहीं, नहीं                  -स्वरचित अंतरा प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मैं ने पूछा चाँद से ...








बुधवार, 12 अगस्त 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - आप की कसम



फिल्म - आप की कसम 

करवटें बदलते रहे सारी रात हम, आप की क़सम
ग़म न करो दिन जुदाई के बहुत हैं कम, आप की क़सम

याद तुम आते रहे इक हूक़ सी उठती रही
नींद मुझसे, नींद से मैं भागती छुपती रही
रात भर बैरन निगोड़ी चाँदनी चुभती रही
आग सी जलती रही, गिरती रही शबनम, आप की क़सम ... -आनंद बक्शी 

भूल जाएँ हम तुम्हें यह हो नहीं सकता कभी 
दिल मेरा किसी और में खो नहीं सकता कभी 
बोझ तेरी दूरियों का और ढो नहीं सकता कभी
देख  कर  तुझको  पड़े  दम  में  मेरी  दम,  आप की क़सम ... -प्रेम फ़र्रुखाबादी  

बुधवार, 5 अगस्त 2015

गरीबों - अमीरों के बीच की दूरी पटना बाकी है


गरीबों - अमीरों के बीच की दूरी पटना बाकी है 
समाज में अभी तक ऐसी घटना घटना बाकी है
यूँ तो दूरी पाटने में लगे हुए हैं कई लोग मगर 
सोच से अभी तक ऐसे बादलों का छटना बाकी है 

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

मेरा जीवन परिचय - मैं, प्रेम नारायण शर्मा ( प्रेम फ़र्रुखाबादी )

 

   मैं, प्रेम नारायण शर्मा ( प्रेम फ़र्रुखाबादी )  मेरा जन्म 20 July 1961 जिला फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हुआ।सितम्बर 1979 से लेकर 2006 तक भारतीय वायु सेना( Indian Air Force) में सेवा की है।  रचनाएँ  प्रेम फ़र्रुखाबादी के नाम से लिखता हूँ। मैं एक (Astrologist & Numerologist) भी हूँ । 2010  में मेरी एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी जिसका नाम था "अक़्स तेरा  लफ़्ज  मेरे " (Aks Tera Lafj Mere)   यह पुस्तक जबलपुर से प्रकाशित हुई जिसके प्रकाशक थे जबलपुर के मशहूर शायर साज़ जबलपुरी जी। मैंने दोहा ,सवैया, कुण्डलियाँ ,गीत और ग़ज़ल आदि  तरह की रचनाएँ लिखी हैं। कई मेरी रचनाएँ समाचार पत्रों में  और विभिन्न पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित हुई हैं। 1993 में वड़ोदरा में "श्री राम भक्त हनुमान "(Shree Ram Bhakt Hanuman)  नमक कैसिट  के गीत लिखने का सौभाग्य मिला। यह कैसिट "सारंगपुर हनुमान जी"अहमदाबाद (गुजरात )को समर्पित की गयी थी।  गुजरात के  सम्मानित मंत्री श्री अशोक भट्ट जी द्वारा इसका उद्घाटन  हुआ था। यह कैसिट गुजरात में चल रही है । हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखने की इच्छा रखता हूँ।मेरा facebook account https://www.facebook.com/PremNarainSharmaa है।   मेरा ब्लॉग  " pnsharma10.blogspot.com" है।   वर्तमान में परिवार के साथ मैं नॉएडा में रह रहा हूँ।  जीवन से पूर्ण सतुष्ट हूँ।  ईश्वर की असीम कृपा है।  

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म -डोली


फिल्म -डोली 

डोली चढ़के दुल्हन ससुराल चली 
कैसे हसरत से देखे बाबुल की गली 

डोलियां खुशनसीबों की सजती रहें 
मेहन्दियां सबके हाथों की सजती रहें 
फूल सहरे की भी मुस्कराते  रहें 
चूड़ियाँ दुल्हनों की खनकती रहें 

डोली चढ़के दुल्हन ससुराल चली 
कैसे हसरत से देखे बाबुल की गली   - राजेंद्र कृष्ण 

लाज दोनों कुलों की निभाएगी ये

प्रीति से अपना सबको बनाएगी ये
जीत लेगी दिलों को ये ससुराल में
साथ सुख दुःख के जीवन बिताएंगी ये  -प्रेम फ़र्रुखाबादी  

डोली चढ़के दुल्हन ससुराल चली 
कैसे हसरत से देखे बाबुल की गली  

रविवार, 28 जून 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - आपकी कसम



ल : पास नहीं आना भूल नहीं जाना
तुमको सौगंध है कि आज मोहब्बत बंद है
पास नहीं आना ...
कि : पहले तो आग भड़काती है
फिर दिल की प्यास तू बुझाती है
तेरी यही अदा तो मुझको पसंद है
ल : अच्छा
कि : हाँ-हाँ
ल : मगर आज मोहब्बत बंद है ...   - आनंद बक्शी 

जब भी मुझे तू दिख जाती है 
नीयत मेरी डिग जाती है 
सच पूंछो आज मेरा  हौसला बुलंद है।  - प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मगर आज मुहब्बत बंद है.…  

अपने पहलू में खो जाने दे 
जो भी होता है  हो जाने दे 
कैसे कहूँ ऐसी आये तुझमें सुगंध है।  - प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मगर आज मुहब्बत बंद है। … 




बुधवार, 24 जून 2015

स्वरचित अन्तरा -ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम


स्वरचित अन्तरा 
फिल्म -आपकी कसम        गीत कार-  -आनंद बक्शी 

ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते

फूल खिलते हैं, लोग मिलते हैं
फूल खिलते हैं, लोग मिलते हैं मगर
पतझड़ में जो फूल मुरझा जाते हैं
वो बहारों के आने से खिलते नहीं
कुछ लोग जो सफ़र में बिछड़ जाते हैं
वो हज़ारों के आने से मिलते नहीं
उम्र भर चाहे कोई पुकारा करे उनका नाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
ज़िन्दगी के सफ़र में ...

कौन अपना है, जग सपना  है 
कौन अपना है, जग सपना  है  सुनो 
भरमाता ही रहता है सारी उमर 
जान कर भी कोई जान पाता नहीं 
किसको अपना कहें किसको गैर कहें 
मान कर भी कोई मान पाता नहीं 
इस तरह जी के, चले जाते है, जो अपने धाम   -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

वो फिर फिर आते, वो फिर फिर आते 
ज़िन्दगी के सफ़र में ...



बुधवार, 17 जून 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - मेरे जीवनसाथी



फिल्म -मेरे जीवनसाथी 

ओ मेरे दिल के चैन
चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिए।     -  मजरूह   सुल्तानपुरी 

कहना जो चाहूँ कैसे कहें वो, 
सोच नहीं पाता हूँ मैं
किसी तरह से भी खुद को,
रोक नहीं पाता  हूँ मैं 
बढ़ रही साँसें, 
कह रही आँखें 
मान जाओ न मुझको मना कीजिये।          -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

ओ मेरे दिल के चैन
चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिए।     -  मजरूह   सुल्तानपुरी 

शुक्रवार, 29 मई 2015

मुहब्बत की बात पर खिल जाता चेहरा तुम्हारा



मुहब्बत की
बात पर खिल जाता चेहरा तुम्हारा
जाने क्यों मनमोहक सा हो जाता चेहरा तुम्हारा

मिलन की बात पर सोच में डूब जाया करते हो
गौर से पढ़ने पर नहीं पढ़ा जाता चेहरा तुम्हारा। 

तेरी दूरियों से जीना मेरा बड़ा मुश्किल हो जाये 
दिल से मेरे निकल ही नहीं पाता चेहरा तुम्हारा

दिलवर सासें ही अब तो तुम से जुदा कर पाएं 
आँखों से दूर नहीं ही कर पाता चेहरा तुम्हारा

बुधवार, 27 मई 2015

स्वरचित अन्तरा - सावन का महीना, पवन करे शोर



सावन का महीना, पवन करे शोर 


तेरी मेरी जोड़ी, जग से न्यारी है

जो भी देखे वो ही बोले, जोड़ी प्यारी है. 

मैं जानू ये, तू भी जाने,

पहली नजर में, हुए हम दीवाने
दीवानेपन की हद हमने, तोड़ डारी है.
जो भी देखे वो ही बोले, जोड़ी प्यारी है
तेरी मेरी जोड़ी, जग से न्यारी है

इंतज़ार की हद हो गयी, अब तो गले लगा लो न



इंतज़ार  की  हद  हो गयी, अब  तो गले  लगा लो न।
बेकरार  की रूह  रो  गयी, अब  तो गले  लगा लो न।।



कब मिलोगी कैसे मिलोगी, कुछ भी समझ न आये
तेरी कसम अब बगैर तेरे तो, कुछ भी नज़र न आये
तबियत मेरी बेचैन हो गयी, अब तो गले लगा लो न। 

जांनू तेरे नाम की माला, हरदम जपता ही रहता हूँ
तुझे पाने को ईश्वर से, फरियादें करता ही रहता हूँ
रातों की मेरी नींद खो गयी,अब तो गले लगा लो न।

तेरे ही बस सपने आते, और किसी के आते नहीं हैं
झूठ नहीं सच कहता हूँ, सपने दिल बहलाते नहीं हैं
हाई  बी पी  मेरी  लो गयी, अब तो गले लगा लो न।

आखिर कब तक हम, यूं मिलते रहेंगे


आखिर  कब  तक  हम, यूं मिलते  रहेंगे

ख्वाबों में कब तक हम, यूं  खिलते रहेंगे।

कसमें वादे बहुत हुए अब आगे की सोचो

बतलाओ  कब तक  हम यूं छिलते रहेंगे।

ऐसा न हो उम्र हमारी तय करने में जाए

जानेमन  कब तक हम, यूं झिलते रहेंगे। 

बोल कर  देख लिया बात नहीं बन पायी

होठों को कब  तक  हम,यूं  सिलते रहेंगे।

झूठ नहीं यह सच है खूब है अपनी जोड़ी

बेचैनी से  कब  तक हम,यूं  हिलते रहेंगे।

जनता को नेताओं ने सदा छला है



जनता को नेताओं ने सदा छला है,बताओ कभी किसी ने किया भला है

सेवा की जगह किया करते शासन,करने के नाम पर करते हैं भाषण
नये-नये ढंगों से जनता को बहलाते,फिर भी ये देश के नेता कहलाते
भोली जनता तो अनपढ़ों का पर्याय, सच बताने का है मेरा अभिप्राय
जो अपनी ताकत को नहीं जानता, उसको जहाँ  में कोई  नहीं मानता

जो हमेशा किस्मत का ही सहारा लेते, वो जुल्म ढ़ाने का ही इशारा देते
जुल्म ढाने वाले दुनियां पे कलंक हैं,सहने वाले भी दुनियां पे कलंक है
ज्ञानियों को कौन बना सकता यहाँ,रंग उन पर कौन चढ़ा सकता यहाँ
अज्ञानी तो जहाँ में सदा रोये तड़पे,भड़काने से भी वो कभी नहीं भड़के
समानता ऐसे नहीं मिली है प्यारे,अज्ञानियों की तो नहीं चली है प्यारे
कोसते ही रहोगें खुद को खुदा को,माफ करना अगर मैंने झूठ कहा तो.








स्वरचित अन्तरा पान खाय सैयां हमारो



पान खाय  सैयां हमारो  
सांवली सुरतिया होठ लाल लाल 
पान खाय  सैयां हमारो  

दूर- दूर वो रहता मुझ से
चाहूँ फिर भी मस्ती छने न
कहते बने न हालत मन की
किसी तरह मेरी बात बने न
बात बने न

पान खाय  सैयां हमारो  
सांवली सुरतिया होठ लाल लाल 
पान खाय  सैयां हमारो  
                      -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

तुम जहाँ स्वर्ग वहां


तुम  जहाँ  स्वर्ग  वहां,बाकी  सब धुआं धुआं 

आप   ने   सच   कहा, खिल उठा  रुआं रुआं।
                                       -प्रेम फ़र्रुखाबादी 

सोमवार, 25 मई 2015

स्वरचित अन्तरा - फिल्म -काली चरण



स्वरचित अन्तरा  - फिल्म -काली चरण 

जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी 
दिल देकर मैं कर बैठी, दिल के दुश्मन से यारी 
तुझको बाहों में भरके, मरी गयी मैं तुझपे मरके 
पत्थर की पूजा करके, हारी मैं हारी 
जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी

हम तुम दोनों मिल जाते तो,मिलती ख़ुशियां सारी
होते पूरे सपने हमारे,मैं हो गयी तेरी दीवानी
होता तू भी दीवाना,दिल मेरा तुझको पुकारे 
तू न माना साजन,दे दी मुझको घुटन
हो, कर ले यकीं मैं खाऊं कसम तुम्हारी।   -स्वरचित अन्तरा-  प्रेम  फ़र्रुखाबादी 

जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी 
दिल देकर मैं कर बैठी, दिल के दुश्मन से यारी 
तुझको बाहों में भरके, मरी गयी मैं तुझपे मरके
पत्थर की पूजा करके, हारी मैं हारी 
जा रे जा ओ हरजाई, देखी तेरी दिलदारी       - वर्मा मालिक 




रविवार, 19 अप्रैल 2015

उनके साथ खड़ा क्या हो गया मेरी पहचान बन गयी



उनके साथ खड़ा क्या हो गया  मेरी  पहचान  बन गयी 
उनके रहम ओ करम से जहाँ में मेरी पहचान बन गयी। 
हर कोई लपक रहा है  मेरी  और  मेरे स्वागत के वास्ते 
यह देख के बदल लिए उन्होंने मुझसे अपने सारे रास्ते। 

मंगलवार, 31 मार्च 2015

स्वरचित अन्तरा फिल्म - बैराग



स्वरचित अन्तरा फिल्म - बैराग     गीतकार- आनंद बक्शी 

छोटी सी उम्र में लग गया रोग कहते है
लोग की मई मर जाऊँगी 
पर मरने से पहले कुछ करने से पहले 

ले के तेरा नाम तुझे बदनाम
मैं कर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी

( येहे किसी सहरी छोरी की प्रीत नहीं है बाबू ) -२

एक बन्जारन केह मतवारे नैनों का है जादू 
तू न जा मेरी मुसकान पे 
खेल जाऊँगी मैं जी-जान पे 
छोड़ूँगी ना साथ -२ ऐसी क्या है बात 
के मैं डर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी             -आनंद बक्शी 

(जिसने प्यार किया ही नहीं,

वो क्या समझे प्यार )-२ 
प्यार बिना यह जीवन जीना,
बिल्कुल है बेकार 
नैनो से नैन मिले ऐसे, मस्ती सी छायी है जैसे
प्यार का नशा -२ कुछ ऐसा चढ़ा 
के मैं तर जाऊँगी                                   -प्रेम फ़र्रुखाबादी 
                                                                               
हो मैं मर जाऊँगी



पर मरने से पहले कुछ करने से पहले 
ले के तेरा नाम तुझे बदनाम
मैं कर जाऊँगी  हो मैं मर जाऊँगी






मंगलवार, 17 मार्च 2015

जिन्दगी, कर ले हँसी, कर के, मुझपे यकीं


जिन्दगी,कर ले  हंसीन , कर के, मुझपे  यकीं

वरना जिन्दगी में  कुछ भी नहीं,कुछ भी नहीं
जिन्दगी, कर ले हंसीन, कर के,  मुझपे यकीं

कसम हैं  तुझको
  मेरी हंसीना
मुझसा 
मिलेगा तुम्हें कहीं ना

आओ बात  तो सुनो  दिल की

क्यों किये हो  मुश्किल  जीना
प्यार से ही रोशन है, सचमुच यह जिन्दगी

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के,मुझपे यकीं

कब  तक मुझसे यूं दूर भागोगे
कब खुलेगी 
आँख कब जागोगे 

सोच सोच के मैं पगलाता जाऊं
आखिर कब तक  बात मानोगे
क्या चाहती हो तुम जरा कुछ  कहो तो सही

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के, मुझपे यकीं

दिल में तुम्हारे क्या चल रहा
बतला दो
जो ख्याल पल रहा
बोलो दिलवर कुछ तो बोलो
यूँ चुप रहना  मुझे  खल रहा

आओ करीब आओ, हां  करो छोडो नहीं नहीं

जिन्दगी, कर ले हंसीन,कर के, मुझपे यकीं

कोई न जाने कब किस को कहाँ प्यार हो जाए


कोई न जाने कब किस को कहां प्यार हो जाये
होश गवां कर  कब अपनी बेहोशी में खो जाये
हर किसी को तलाश है यहां प्रेम अपनेपन की
जिसके पहलू में जाये और मस्ती में सो जाये।