शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

स्वरचित अंतरा -मैं तेरे इश्क़ में मर न जाऊँ कहीं



फिल्म - लोफर
 आ
( मैं तेरे इश्क़ में मर न जाऊँ कहीं
तू मुझे आज़माने की कोशिश न कर ) -२
ख़ूबसूरत है तू तो हूँ मैं भी हसीं
मुझसे नज़रें चुराने की कोशिश न कर
मैं तेरे इश्क़ में

शौक़ से तू मेरा इम्तहान ले -२ 
तेरे कदमों पे रख दी है जान ले
बेकदर बेकबर मान जा ज़िद ना कर 

तोड़ कर दिल मेरा ऐ मेरे हमनशीं
इस तरह मुस्कुराने की कोशिश ना कर
ख़ूबसूरत है तू तो हूँ मैं भी हसीं
मुझसे नज़रें चुराने की कोशिश न कर
मैं तेरे इश्क़ में                                       -आनंद बक्शी


तेरी चाहत में पागल मैं हो गयी -२  
तन - मन से घायल मैं हो गयी 
आ ज़रा, पास आ, दूर मुझसे न जा 
मैं तेरी हुई  हूँ जी जान  से
अब मुझे तू सताने की कोशिश न कर. 
मैं तेरे इश्क़ में मर न जाऊँ कही     स्वरचित अंतरा - प्रेम फ़र्रुखाबादी 

ख़ूबसूरत है तू तो हूँ मैं भी हसीं              -आनंद बक्शी
मुझसे नज़रें चुराने की कोशिश न कर
मैं तेरे इश्क़ में



 

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