शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

देखो कर्म हमारे कभी हमारा,पीछा नहीं छोड़ें



देखो कर्म हमारे  कभी  हमारा,पीछा  नहीं छोड़ें
चाहे  कितना  भी  भागें हम, कितना  भी  दौड़ें । 

अच्छे    बुरे    कर्म    जो,   हम   से   हो   जाएँ
फल   देने   को  वही   कर्म,  साथ  हमारे  पौडें।

आने - जाने   के  फेरों  से,  मुक्ति   वही   पाएं 
परमपिता परमेश्वर से जो, अपना रिश्ता जोड़ें।

करुणा, प्रेम, क्षमा की, हिलोरें ,उन में ही, उठें
परहित  की  चादर जो, अपने ,मन ,पर ,ओढ़ें ।

माया ने ,भरमाया, हम ,को ,सब ,को यहाँ पर 
परमानन्द को  चाहें  तो माया  के बंधन तोड़ें।

बैठ अकेले कहीं ध्यान कर, जीवन को समझें
फिर   जीवन   को, जीवन  की, राहों पर मोड़ें।

जो  चाहोगे  मिल  जायेगा, तुम को जीवन से 
लेकिन पहले इस जीवन को,अच्छी तरह गोडें।

एक बार मिले यह जीवन, मिलता नहीं दुबारा
जितना चाहें, जैसे चाहें, इस को आप निचोड़ें।

कर्म श्रेष्ठ है, यही  बताया, जो भी  जी  के गए
नाकामी का 'प्रेम' ठीकरा,किस्मत पर न फोड़ें।





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