शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

स्वरचित अन्तरा मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा



मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा , मैं  नागन तू  सपेरा 
जनम जनम का तेरा मेरा बैर, ओ रब्बा खैर,
मैं  नागन  तू  सपेरा                                                            -  आनंद बक्शी 

आज तो  बदला  मैं बस लूंगी,छेड़ न   मुझको  मैं डस  लूंगी 
जंतर     जंतर    जादू    टोने, ये   तो   मेरे   खेल   खिलौने 
मुझ पर  चलेगा  न जोर तेरा, मैं       नागन      तू      सपेरा  
मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा,मैं       नागन      तू     सपेरा   

इस घर से  क्या मेरा रिश्ता ,तू क्या जाने क्या है किस्सा 
इस  घर  में   है  मेरा  साथी ,साथी   है   वो  जीवन  साथी
जा, चला  जा, ना  डाल  डेरा  मैं       नागन      तू      सपेरा     -  प्रेम फ़र्रुखाबादी 
मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा,मैं       नागन      तू     सपेरा   

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