शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

स्वरचित अन्तरा फिल्म - नाटक


फिल्म - नाटक 
जिंदगी         एक       नाटक     है  

हम    नाटक   में   काम   करते  हैं  
पर्दा   उठते    ही,  पर्दा   गिरते  ही
अपने  नाम  बाद   नाम   करते हैं 
हम    नाटक   में   काम   करते  हैं  

खेल में  कभी  बजती  हैं तालियां 
और  कभी  लोग  देते  हैं गलियां 
भले    बनते   ही,   बुरे  बनते  ही 
अपने   नाम   बदनाम   करते  हैं     -आनंद बक्शी
                   
कभी  कभी  हम  ख़ुशी  को मनाते
और   कभी   हम   दुखी   हो  जाते
क्या   कहें   कैसा,  ये   जहाँ   ऐसा
कभी    दाम  बिन    दाम   करते हैँ    - प्रेम फ़र्रुखाबादी

हम    नाटक   में   काम   करते  हैं 
जिंदगी         एक       नाटक     है  
हम    नाटक   में   काम   करते  हैं  
पर्दा   उठते    ही,  पर्दा   गिरते  ही
अपने   नाम     बदनाम   करते  हैं     -आनंद बक्शी
                    

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