सोमवार, 20 अक्तूबर 2014

स्वरचित अन्तरा- फिल्म- शोर


 स्वरचित फ़िल्मी अन्तरा 

हम   ने    तुम्हें    देखा   है 
तुम   ने    हमें      देखा   है 
कौन      कहे      किस    से
दिल   किस   ने    फेका  है 
जिसने     भी      फेका    है 
शुरुआत       सुहानी       है     -प्रेम फ़र्रुखाबादी     

                     

जिंदगी और कुछ  भी नहीं 
तेरी      मेरी     कहानी   है 
एक  प्यार   का  नगमा  है 
मौजों      की    रवानी    है      - संतोषानंद


मंगलवार, 14 अक्तूबर 2014

जैसे भी हों हालात, जीना तो पड़ेगा



जैसे भी हों हालात, जीना तो पड़ेगा
गर्मीं हो या बरसात, जीना तो पड़ेगा
ज़रा तकलीफें आयीं तो मरने चल दिए
कैसे हैं ये जज्बात, जीना तो पड़ेगा।

शुक्रवार, 10 अक्तूबर 2014

कभी यह दुनियां पसंद आती है तो कभी नापसंद

कभी यह दुनियां पसंद आती है तो कभी नापसंद। कभी यहाँ से जाने को दिल नहीं करता तो कभी दुनियां छोड़ने को दिल करता है।  जब हम किसी प्यार करते हैं तो बहुत प्यारी लगती है जब नफ़रत करते हैं तो बहुत बुरी लगती है।ऐसा इस लिए होता है कि -
१/३ देवता हैं 
१/३ मनुष्य हैं 
१/३ राक्षस हैं
इन तीन तरह के जीवों की उत्पत्ति का कारण यह ब्रह्माण्ड है हर जीव अपने स्वाभाव के बस कार्य करने के लिए बाध्य है इस पर किसी का बस नहीं चलता।  
-प्रेम फ़र्रुखाबादी

मंगलवार, 7 अक्तूबर 2014

एक सुझाव

 एक सुझाव

कवि सम्मेलनों में गर ऐसा हो तो बहुत अच्छा हो.  हर कवि को एक रचना से ज्यादा सुनाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए अगर कोई कवि यह  समझता  है कि  वो बेहतर है  तो साबित करे इसका निर्णय सामने बैठे श्रोता करें  कि कौन बेहतरीन है बस इतनी सी बात है सोना अलग होगा ,चांदी अलग और लोहा अलग होगा।
या फिर कोई निर्णायक मंडल हो जो यह निश्चित  नंबर १, नंबर २ और  नंबर ३ कौन हैऐसे बेहतरीन कवि सामने आएंगे।

सोमवार, 6 अक्तूबर 2014

वरिष्ठ कवि महोदय की युक्ति

                           वरिष्ठ  कवि महोदय की युक्ति

वरिष्ठ कवि वो कहलाते हैं जो किसी कवि सम्मलेन में जाते हैं और थोड़ी देर बाद ही बड़े विनम्र भाव से संचालक महोदय से निवेदन के साथ कहते  हैं  मुझे जल्दी अवसर देने की कृपा करें एक जरूरी काम है वार्ना मेरी इच्छी तो थी कि सभी कवियों को सुनकर ही जाता । आशा है आप सब हमें क्षमा कर देंगे। सचमुच ही हम सब उन्हें क्षमा कर देते हैं और वो अपनी कविता अधिक से अधिक समय सुनकर सुनाकर अपना प्रतीक  चिन्ह  व पारश्रमिक ले जाना नहीं भूलते हैं. धन्य हो  श्रीमान!
जब मैंने जाते हुए कवि से एकांत में पूंछा  तो बोले मैं  एक वरिष्ठ कवि हूँ बहुत देर तक रुकना मेरे सम्मान के खिलाफ है इस लिए जा रहा हूँ।  मैंने यहाँ तक का सफर ऐसे ही तय नहीं किया श्रेष्ठ  कवि बनने के लिए वरिष्ठ  कवियों से यही युक्ति सीखी है । जयहिंद , चलता हूँ क्षमा करें बंधुवर !

गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

गुरू बनेगा विश्व का, अपना भारत देश



गुरू     बनेगा    विश्व    का, अपना  भारत देश ।
धीरे    -    धीरे    दे   रहे,   मोदी    यह   सन्देश।।  
मोदी   यह   सन्देश,  ज्ञान    का   फैले   प्रकाश।
जिसकी बदौलत कर सकें, अपना सभी विकास।।  
कहे  'प्रेम'  कविराय,  काम   इस  पर  हुआ शुरू । 
जल्दी   ही  कहलायेगा, भारत  अब  विश्व  गुरू ।।