गुरुवार, 21 अगस्त 2014

स्वरचित अंतरा / फिल्म शालीमार / रचना- आनंद बक्शी

 स्वरचित अंतरा /
फिल्म शालीमार / रचना- आनंद बक्शी 
आनंद बक्शी जी मेरी प्रेरणा के स्रोत हैं. 

हम बेवफा हरगिज न थे
पर हम वफ़ा कर न सके
हमने जो सपने  कभी देखे  थे मिलके 
सपने    वो    अपने    सब    चूर   हुए 
तुमने भी जिद की हमने भी जिद की 
जिद   में    ही   हम   तुम    दूर    हुए
मिलके    रहें   सारी   उमर
हम ये   दुआ   कर  न सके       -प्रेम फ़र्रुखाबादी
हम बेवफा हरगिज न थे
पर हम वफ़ा कर न सके
हमने   भी   चाहा   तुमने   भी  चाहा 
पर    एक    अपनी    चाह     न   थी 
हम   भी   चले   थे  तुम  भी चले थे
पर     एक    अपनी    राह    न   थी
दिल से दीवाने हो के भी हम 
दिल में  जगह  कर  न  सके    -प्रेम फ़र्रुखाबादी
हम बेवफा हरगिज न थे
पर हम वफ़ा कर न सके 


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