बुधवार, 19 मार्च 2014

स्वरचित अंतरा फ़िल्म - अनुराग

फ़िल्म - अनुराग

र : ओ तेरे नैनों के मैं दीप जलाऊँगा
अपनी आँखों से दुनिया दिखलाऊँगा
तेरे नैनों के ...

ल : अच्छा
वो क्या है
र : एक मन्दिर है
ल : उस मन्दिर में
र : एक मूरत है
ल : ये मूरत कैसी होती है
र : तेरी सूरत जैसी होती है
ल : वो क्या है

मैं क्या जानूँ छाँव है क्या और धूप है क्या
रंग-बिरंगी इस दुनिया का रूप है क्या
वो क्या है
र : एक पर्वत है
ल : उस पर्वत पे
र : एक बादल है
ल : ये बादल कैसा होता है
र : तेरे आँचल जैसा होता है
ल : वो क्या है ( गीत कर -आनंद बक्शी )

 लड़का- प्यार बिना जग सूना, कह गए लोग पुराने
            प्यार की भाषा को तो, बस पागल प्रेमी जाने 
लड़की- अच्छा
लड़का- हाँ 
लड़की-  वो क्या है 
लड़का- एक रस्ता है 
लड़की - रस्ते पे 
लड़का - दो प्रेमी हैं
लड़की-  ये प्रेमी  कैसे होते हैं 
लड़का - तेरे- मेरे जैसे होते हैं 
लड़की- वो क्या है  
लड़का- एक रस्ता है (स्वरचित -प्रेम फ़र्रुखाबादी )