मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

बड़ी आशा लेकर आया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी।

बड़ी आशा लेकर आया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी
बड़ी देर से मैं पाया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी
कुछ भी तो ठीक नहीं है, मेरे घर पे माँ भवानी
बड़ी आशा लेकर आया हूँ, तेरे दर पे माँ भवानी

आपस में सब लड़ रहे हैं,एक दूजे पर चढ़ रहे है
कोई दोषी माने खुदको,दोष दूसरों पर मड रहे हैं
समझाने गर बैठूं तो,एक नई कहानी गढ़ रहे हैं
राह पे ला के सबको दुःख सब हर ले माँ भवानी
बड़ी आशा लेकर आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी

जीवन में कोई रस नहीं है कुछ भी मेरे बस नहीं है
लाख जतन किये पकड में किसी की नस नहीं है
अपनी धुन में डूबे हैं सब  होते  टस से मस नहीं है
सोच बदले सबकी ऐसा कोई वर दे मन भवानी
बड़ी आशा लेकर आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी

तेरी शरण ही मेरा सहारा दिल ने मेरे तुझे पुकारा
दुःख के मारों का तेरे  सिवा कोई नहीं है  किनारा
तूने अपनी भक्ति देकर अपने भक्तों को संवारा
कोई अपना चमत्कार मुझ पर कर दे माँ भवानी
बड़ी आशा लेकर आया हूँ तेरे दर पे माँ भवानी








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