मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

कोई हँसे कोई रोये इसी को दुनियां कहते हैं



कोई
हँसे कोई रोये इसी को दुनियां कहते हैं
कोई जगे कोई सोये इसी को दुनियां कहते हैं

कोई
तो रिश्वत लेकर खुश होता है
कोई तो रिश्वत देकर दुःख होता है
कोई देता कोई लेता इसी को दुनियां कहते हैं
कोई हँसे कोई रोये इसी को दुनियां कहते हैं
कोई जगे कोई सोये इसी को दुनियां कहते हैं

किसी को छेड़ने में मज़ा आता है

किसी को छिड़ने में मजा आता है
कोई छिड़े कोई छिड़वाये इसी को दुनियां कहते हैं
कोई हँसे कोई रोये इसी को दुनियां कहते हैं
कोई जगे कोई सोये इसी को दुनियां कहते हैं

कोई तो लूटने से खुश होता है  

कोई तो लुटवाने से खुश होता है 
कोई लुटे कोई लुटवाए इसी को दुनिया कहते हैं
कोई हँसे कोई रोये इसी को दुनियां कहते हैं 
कोई जगे कोई सोये इसी को दुनियां कहते हैं




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