सोमवार, 9 दिसंबर 2013

स्वरचित अंतरा, ज़िंदगी एक नाटक है

 फ़िल्म - नाटक  - गीत कार आनंद बक्शी 

ज़िंदगी एक नाटक है  हम नाटक में काम करते हैं
पर्दा उठते ही पर्दा गिरते ही सबको सलाम  करते हैं 

खेल में कभी बजती हैं तालियां  
और कभी लोग देते हैं गलियां
भले बनते ही, बुरे बनते ही 
अपने नाम बदनाम करते हैं हम नाटक में काम करते हैं.
ज़िंदगी एक नाटक है 
हम नाटक में काम करते हैं

कभी कभी हम ख़ुशी को मनाते 
और  कभी  हम  दुखी  हो  जाते
क्या  कहें  कैसा, यह जहाँ  ऐसा, कभी दाम बिन दाम करते हैं.   (स्वरचित अंतरा - प्रेम फ़र्रुखाबादी)  
हम नाटक में काम करते हैं
ज़िंदगी एक नाटक है 
हम नाटक में काम करते हैं