सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है



कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है। 
जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है। 

अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त, 
उसका जीना जीना जो रोशनी बाँटता है। 

किसी की कभी भी जान ले सकता दुष्ट, 
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है। 

किसी को रुलादे ऐसा गम किस काम का, 
उसको सराहो जो सब को हँसी बाँटता है। 

बुझदिल लोग जिया करते हैं उदासियों में, 
दिलदार वही जो सबको ताजगी बाँटता है।

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

छोड़ें अपने बैर को, माँगें सबकी खैर को


छोड़ें अपने बैर को, माँगें  सबकी खैर को
आओ मिलकर, हमदम, हमदम, हमदम 
सोचें समझें,सोचें समझें,सोचें समझें,हम 
खुशियाँ  लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

बेहतर से बेहतर, हम काम करेंगे
काम से ही अपने, हम नाम करेंगे
देखेंगे,  एक  दूजे  में  ना,  कोई  ख़म। 
खुशियाँ  लुटाके, अपना लेंगे,सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

आपस में हम सब, मिलके रहेंगे 
फ़ूलों की तरह हम, खिलके रहेंगे   
चाहे,  लगाना  पड़े, कितना भी, दम।
खुशियाँ लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

मंदिर में बैठकर हम, ध्यान करेंगे  
नारी का समाज में, सम्मान करेंगे  
इंसानियत का,मिलके,निभा देंगे, धरम। 
खुशियाँ लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम 
छोड़ें अपने बैर को...

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

कथनी और करनी में, जिसके अंतर होय


कथनी और करनी में,  जिसके  अंतर होय।
देखो  उससे सयाना, इन्सां  नहीं  है कोय ।।
इन्सां  नहीं है कोय, देख  मौका  जो बदले।
किसमें इतनी लियाकत, जो उसको पढ़ले।।
कहे"प्रेम"कविराय ये, है उसकी खासियत।
बातें सिर्फ  करे मगर, है नहीं   इंसानियत।।