बुधवार, 16 जनवरी 2013

लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं



लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं।
जिधर देखो उधर बेशर्म खड़े हैं।

बिना देखे इन्हें चैन ही न आये
दिल के हाथों में मजबूर बड़े हैं।

समझाओ तो समझाते ही नहीं
हो जाते एक दम चिकने घड़े हैं।
बेशर्म इतने कि मत पूँछो भाई
कुत्तों जैसी  कुत्तई पर अड़े हैं।

समाज चुपचाप है इन्हें देख के
तभी लड़कियों पे जुल्म बढ़े हैं।
वही लड़के छेड़ते लड़कियों को
जिसके घर में संस्कार सड़े हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. सच लिखा है ... बेशर्म हो चुका है ये पुरुष समाज ...
    लग्कों में बदलाव माता लिटा ही लाएं तो जल्दी आएगा ...

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